जौनपुर में ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार (तपजप) ने स्थानीय सांसद बाबूराम कुशवाहा को एक खुला ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में संसदीय क्षेत्र के लाखों ठगी पीड़ितों को उनके जमाधन का भुगतान न मिलने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। संगठन ने अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी अधिनियम 2019 (Buds Act 2019) के अनुपालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। ज्ञापन में बताया गया है कि संसद ने ठगी पीड़ितों के भुगतान के लिए सर्वसम्मति से अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी अधिनियम 2019 पारित किया था। इस कानून के तहत, शासन ने प्रत्येक जिले में सक्षम और सहायक सक्षम अधिकारी (भुगतान अधिकारी) नियुक्त किए हैं। इन अधिकारियों को निर्देश है कि वे ठगी पीड़ितों से आवेदन प्राप्त कर 180 दिनों के भीतर उनके जमाधन का दो से तीन गुना तक भुगतान सुनिश्चित करें। संगठन ने आरोप लगाया है कि जौनपुर क्षेत्र के भुगतान अधिकारी न तो इस कानून का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और न ही पीड़ितों से आवेदन लेकर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि जब यह कानून बना था, तब देश में लगभग 50 करोड़ ठगी पीड़ित थे, लेकिन अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण अब यह संख्या बढ़कर सौ करोड़ हो गई है। संगठन का यह भी आरोप है कि ठग, शासन-प्रशासन के कथित संरक्षण में जनता को ठगते रहे। ज्ञापन में सांसद बाबूराम कुशवाहा पर भी लापरवाही का आरोप लगाया गया है। संगठन का कहना है कि क्षेत्र का जनप्रतिनिधि होने के बावजूद सांसद ने कभी संसद में Buds Act 2019 के अनुपालन या अवमानना पर शासन से कोई प्रश्न नहीं पूछा। इसे उनकी अपने मतदाताओं के भुगतान में अरुचि का संकेत बताया गया है। ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि, शासन, प्रशासन, न्यायपालिका और अन्य समर्थ संस्थानों द्वारा भुगतान गारंटी कानून की उपेक्षा और अवमानना राष्ट्र व देश के साथ धोखा है। संगठन ने इसे लोकतंत्र की हत्या, मतदाताओं का अपमान और जानबूझकर किया गया संगठित अपराध करार दिया है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय प्रणाली और लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा में, जनप्रतिनिधि का यह कर्तव्य है कि वह अपने क्षेत्र के ठगी पीड़ितों और अपराध पीड़ितों को न्याय प्रदान करे तथा उनकी क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करे।


