राजा कर्ण की कर्मभूमि बिलहरी में मां चंडी का अद्भुत दरबार, उमड़ रही श्रद्धालओं की भीड़

राजा कर्ण की कर्मभूमि बिलहरी में मां चंडी का अद्भुत दरबार, उमड़ रही श्रद्धालओं की भीड़

कटनी. समूचा देश इन दिनों मां आदिशक्ति की आराधना में डूबा हुआ है। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व भक्तिभाव और उत्साह के चरम पर है। इसी आस्था के बीच बिलहरी जो कभी राजा कर्ण की राजधानी मानी जाती थी, आज भी अपने दिव्य इतिहास और अद्भुत चमत्कारों के लिए श्रद्धालुओं का केंद्र बनी हुई है। यहां स्थित प्राचीन मां चंडी मंदिर में इन दिनों भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां भक्त माता के दर्शन कर मनोकामना पूर्ति की अरदास कर रहे हैं।
मंदिर के पंडा बताते हैं कि बिलहरी की धरा पर राजा कर्ण राज्य करते थे, जो अपनी उदारता और दानवीरता के लिए विश्वविख्यात हैं। मान्यता है कि प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर वे मां चंडी के मंदिर आते थे। मंदिर परिसर में एक विशाल कढ़ाव में तेल उबलता रहता था। कथा के अनुसार राजा कर्ण उसमें कूद जाते थे, जिसके बाद देवी स्वयं अमृत छिडकक़र उन्हें पुनर्जीवित करती थीं और ढाई मन सोना प्रदान करती थीं। उसी सोने में से रोज सवा मन सोना वह जरूरतमंदों को दान करते थे। बिलहरी में नवरात्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है, घंटों की ध्वनि, नारियल की सुगंध, और माता के जयकारों के बीच भक्त आदिशक्ति के अद्भुत रूप का साक्षात्कार कर रहे हैं।

यह भी है किवदंती

कहा जाता है कि इस रहस्य का पता राजा विक्रमादित्य ने लगाया था। वे एक बालक की खोज में बिलहरी पहुंचे और घटना का भेद जानने के लिए कई दिनों तक निगरानी की। सत्य जानने के बाद राजा विक्रमादित्य स्वयं कढ़ाहे में कूद गए और देवी के आशीर्वाद से अक्षय पात्र और अमृत कलश प्राप्त कर ले गए। शहर से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित बिलहरी, जिसे आज पुष्पावती नगरी भी कहा जाता है, अपने प्राचीन मंदिरों, नक्काशीदार पत्थरों और ऐतिहासिक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं कलाकृतियों के बीच विराजमान है मां चंडी का भव्य मंदिर, जहां नवरात्र के अवसर पर भक्तों का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां मां चंडी की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ परिवारों सहित लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

यह है नगरी की खासियत

कटनी जिले का बिलहरी अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक विशेषताओं के कारण खास पहचान रखता है। यह क्षेत्र प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक महत्व के अवशेषों के लिए जाना जाता है, जहां स्थानीय आस्था गहराई से जुड़ी हुई है। बिलहरी के आसपास का वातावरण हरियाली और शांत प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, जो इसे दर्शनीय बनाता है। यहां के मंदिरों में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, खासकर त्योहारों के समय रौनक बढ़ जाती है। ग्रामीण संस्कृति, परंपराएं और सादगी यहां की प्रमुख पहचान हैं। साथ ही, यह क्षेत्र कटनी शहर से नजदीक होने के कारण आसानी से पहुंच योग्य है, जिससे पर्यटन और धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

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