नालंदा के लाल का राष्ट्रीय डेफ सब-जूनियर चैंपियनशिप में जलवा:धीरज ने 600 मीटर दौड़ में जीता गोल्ड मेडल, प्रतियोगिता में देशभर के एथलीटों ने लिया हिस्सा

नालंदा के लाल का राष्ट्रीय डेफ सब-जूनियर चैंपियनशिप में जलवा:धीरज ने 600 मीटर दौड़ में जीता गोल्ड मेडल, प्रतियोगिता में देशभर के एथलीटों ने लिया हिस्सा

गुजरात यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स ग्राउंड में आयोजित ’10वीं राष्ट्रीय डेफ सब-जूनियर, जूनियर और 27वीं राष्ट्रीय डेफ सीनियर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2025-26′ में नालंदा के खिलाड़ी धीरज कुमार ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। जिले के रहुई प्रखंड अंतर्गत एकबालगंज निवासी धीरज कुमार ने अंडर-14 आयु वर्ग की 600 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर पूरे बिहार का मान बढ़ाया है। इस उपलब्धि से न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे जिले के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कठिन संघर्ष और अटूट मेहनत की जीत धीरज की इस सफलता के पीछे एक लंबी मेहनत और खेल के प्रति गहरा समर्पण छिपा है। ‘नालंदा जोश खेल क्लब’, रहुई के सचिव प्रमोद कुमार ने धीरज की प्रतिभा को पहचाना और उनके माता-पिता को खेल के महत्व को समझाते हुए उन्हें मैदान तक लाने के लिए राजी किया। इसके बाद धीरज ने ‘नालंदा लक्ष्य खेल अकादमी’, हरनौत के सचिव सह मुख्य कोच कुंदन कुमार पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में कड़ा अभ्यास शुरू किया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दिव्यांगता को कभी बाधा नहीं बनने दिया और निरंतर अभ्यास के दम पर आज राष्ट्रीय स्तर पर सोने का तमगा हासिल किया। बिहार की टीम में शामिल नालंदा के लाल बिहार बधिर क्रीड़ा परिषद के माध्यम से चयनित होकर धीरज कुमार 18 मार्च को पटना जंक्शन से अहमदाबाद के लिए रवाना हुए थे। 20 मार्च से 23 मार्च तक चल रही इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के एथलीटों ने हिस्सा लिया है, जिसमें धीरज ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। धीरज की इस जीत पर रहुई नगर पंचायत के उप मुख्य पार्षद अनिल कुमार पाण्डेय, कोच कुंदन कुमार पाण्डेय, प्रमोद कुमार, रवि कुमार, सत्यनाम कबीर, पप्पू कुमार और सौम्या सहित जिले के कई गणमान्य लोगों ने बधाई दी है। सभी ने एक स्वर में कहा कि धीरज की यह जीत साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए बने प्रेरणा डेफ स्पोर्ट्स एसोसिएशन, बिहार शरीफ और नालंदा जोश खेल क्लब के पदाधिकारियों ने धीरज को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि नालंदा के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। धीरज की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस उन्हें तराशने और सही मंच प्रदान करने की आवश्यकता है। गुजरात यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स ग्राउंड में आयोजित ’10वीं राष्ट्रीय डेफ सब-जूनियर, जूनियर और 27वीं राष्ट्रीय डेफ सीनियर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2025-26′ में नालंदा के खिलाड़ी धीरज कुमार ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। जिले के रहुई प्रखंड अंतर्गत एकबालगंज निवासी धीरज कुमार ने अंडर-14 आयु वर्ग की 600 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर पूरे बिहार का मान बढ़ाया है। इस उपलब्धि से न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे जिले के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कठिन संघर्ष और अटूट मेहनत की जीत धीरज की इस सफलता के पीछे एक लंबी मेहनत और खेल के प्रति गहरा समर्पण छिपा है। ‘नालंदा जोश खेल क्लब’, रहुई के सचिव प्रमोद कुमार ने धीरज की प्रतिभा को पहचाना और उनके माता-पिता को खेल के महत्व को समझाते हुए उन्हें मैदान तक लाने के लिए राजी किया। इसके बाद धीरज ने ‘नालंदा लक्ष्य खेल अकादमी’, हरनौत के सचिव सह मुख्य कोच कुंदन कुमार पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में कड़ा अभ्यास शुरू किया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दिव्यांगता को कभी बाधा नहीं बनने दिया और निरंतर अभ्यास के दम पर आज राष्ट्रीय स्तर पर सोने का तमगा हासिल किया। बिहार की टीम में शामिल नालंदा के लाल बिहार बधिर क्रीड़ा परिषद के माध्यम से चयनित होकर धीरज कुमार 18 मार्च को पटना जंक्शन से अहमदाबाद के लिए रवाना हुए थे। 20 मार्च से 23 मार्च तक चल रही इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के एथलीटों ने हिस्सा लिया है, जिसमें धीरज ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। धीरज की इस जीत पर रहुई नगर पंचायत के उप मुख्य पार्षद अनिल कुमार पाण्डेय, कोच कुंदन कुमार पाण्डेय, प्रमोद कुमार, रवि कुमार, सत्यनाम कबीर, पप्पू कुमार और सौम्या सहित जिले के कई गणमान्य लोगों ने बधाई दी है। सभी ने एक स्वर में कहा कि धीरज की यह जीत साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए बने प्रेरणा डेफ स्पोर्ट्स एसोसिएशन, बिहार शरीफ और नालंदा जोश खेल क्लब के पदाधिकारियों ने धीरज को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि नालंदा के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। धीरज की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस उन्हें तराशने और सही मंच प्रदान करने की आवश्यकता है।  

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