दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रहे ‘ऑपरेशन गैंडा’ के तहत रविवार को दो नर गैंडों को जंगल में छोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन यह कोशिश नाकाम रही। पूरे दिन चली सर्चिंग के बावजूद दोनों गैंडों का पता नहीं चल सका, जिससे पहले दिन कोई भी गैंडा अवमुक्त नहीं किया जा सका। विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की टीम अब सोमवार सुबह एक बार फिर गैंडों को जंगल में छोड़ने का प्रयास करेगी। इस अभियान के तहत गैंडा पुनर्वास केंद्र से कुल छह गैंडों को स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ा जाना है। 22 से 28 मार्च तक चलना है अभियान
वन विभाग के मुताबिक 22 मार्च से 28 मार्च के बीच छह गैंडों को जंगल में छोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है। इससे पहले नवंबर 2024 और मार्च 2025 में दो-दो गैंडों को सफलतापूर्वक छोड़ा जा चुका है। फिलहाल दुधवा के जंगलों में चार गैंडे स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। जैव विविधता के लिए अहम पहल
दुधवा टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है, जहां हाथी, बाघ, भालू और हिरण समेत कई दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। गैंडों का पुनर्वास इस क्षेत्र की जैव विविधता को और समृद्ध बना रहा है। देश में गैंडों की मौजूदगी का गौरव केवल तीन राज्यों को है, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है, और प्रदेश में यह पहचान सिर्फ दुधवा को मिली है। 1984 से चल रही पुनर्वास योजना
दुधवा में गैंडा पुनर्वास योजना की शुरुआत वर्ष 1984 में हुई थी, जो अब विस्तार के अगले चरण में पहुंच चुकी है। इस अभियान के लिए विशेषज्ञों और वन्य चिकित्सकों की टीम तैनात की गई है और सभी जरूरी अनुमतियां भी ली जा चुकी हैं। विशेषज्ञों की निगरानी में ऑपरेशन
पूरा अभियान पद्मश्री से सम्मानित वन्य विशेषज्ञ डॉ. के. के. शर्मा के नेतृत्व में चल रहा है। उनके साथ विश्व प्रकृति निधि (WWF) की टीम भी तकनीकी सहयोग दे रही है। वन विभाग के अनुसार, अचानक बदलते मौसम ने अभियान के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यदि मौसम में जल्द सुधार नहीं होता है, तो यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।


