भागलपुर के सबौर थाना क्षेत्र अंतर्गत मिर्जापुर गांव निवासी आर्मी मेडिकल कोर के हवलदार जवान नीरज कुमार शहीद हो गए। आज इनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। घटना ड्यूटी के दौरान हुई, जब जवान एक मेडिकल से दूसरे मेडिकल अस्पताल जा रहे थे। तभी बाइक बेकाबू हो गया और वो बेहोश होकर गिर गए। दूसरे दिन बाद उसे उठाकर अस्पताल में एडमिट करवाया गया। जवान 4 दिनों तक जिंदगी और मौत से अस्पताल में जूझता रहे। 20 मार्च को मौत की खबर आई। इससे पहले शहीद जवान ने अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि ” हम ठीक हैं अभी आने की जरूरत नहीं हे, लेकिन फिर उसी दिन रात के दो बजे फोन आया कि तबियत ज्यादा खराब है, पत्नी आर्मी कैंप पहुंची, जिसके बाद जवान का निधन हो गया। भोपाल स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती थे जवान के मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद के बड़े भाई ने बताया कि नीरज कुमार भोपाल स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार को उनका पार्थिव शरीर गांव मिर्जापुर लाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी नीशा भारती पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगीं। बेटे गोलू और बेटी नेहा भी पिता को देखकर बिलख उठे। बुजुर्ग मां की आंखों से भी आंसुओं की धारा बहती रही। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। सेना के अधिकारी कर्नल योगेंद्र ने बताया कि ड्यूटी के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते समय उनका एक्सीडेंट हो गया था। वे आर्मी मेडिकल सेक्टर में हवलदार के पद पर तैनात थे। 16 मार्च से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन आखिरकार वे जिंदगी की जंग हार गए। सेना ने दिया शहीद का दर्जा सेना ने उनके बेहतर सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें शहीद का दर्जा दिया। गांव में सेना की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद जवान की अंतिम झलक पाने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। हर किसी की आंखें नम थीं। मौके पर सेना के अधिकारी, स्थानीय पुलिस प्रशासन और नाथनगर के विधायक मिथुन कुमार यादव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। उसके बाद पार्थिव शरीर को बरारी गंगा घाट पर लाया, जहां उसके छोटे बेटे नायरा ने पिता को मुख्यग्नि दी। शहीद की पत्नी नीशा भारती ने बताया कि उन्हें फोन पर पति की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी। जब वे अस्पताल पहुंचीं, तब वे ICU में भर्ती थे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें नौकरी दी जाए, ताकि वे अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें। मृतक की मां ने बताया कि बेटे ने कुछ दिन पहले वीडियो कॉल पर कहा था कि वह ठीक है और चिंता न करें। उन्होंने भी सरकार से बहू को नौकरी और बच्चों की अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग की है। नीरज कुमार साल 2009 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी शहादत से पूरा इलाका गौरवान्वित होने के साथ-साथ गहरे शोक में डूबा है। भागलपुर के सबौर थाना क्षेत्र अंतर्गत मिर्जापुर गांव निवासी आर्मी मेडिकल कोर के हवलदार जवान नीरज कुमार शहीद हो गए। आज इनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। घटना ड्यूटी के दौरान हुई, जब जवान एक मेडिकल से दूसरे मेडिकल अस्पताल जा रहे थे। तभी बाइक बेकाबू हो गया और वो बेहोश होकर गिर गए। दूसरे दिन बाद उसे उठाकर अस्पताल में एडमिट करवाया गया। जवान 4 दिनों तक जिंदगी और मौत से अस्पताल में जूझता रहे। 20 मार्च को मौत की खबर आई। इससे पहले शहीद जवान ने अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि ” हम ठीक हैं अभी आने की जरूरत नहीं हे, लेकिन फिर उसी दिन रात के दो बजे फोन आया कि तबियत ज्यादा खराब है, पत्नी आर्मी कैंप पहुंची, जिसके बाद जवान का निधन हो गया। भोपाल स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती थे जवान के मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद के बड़े भाई ने बताया कि नीरज कुमार भोपाल स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार को उनका पार्थिव शरीर गांव मिर्जापुर लाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी नीशा भारती पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगीं। बेटे गोलू और बेटी नेहा भी पिता को देखकर बिलख उठे। बुजुर्ग मां की आंखों से भी आंसुओं की धारा बहती रही। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। सेना के अधिकारी कर्नल योगेंद्र ने बताया कि ड्यूटी के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते समय उनका एक्सीडेंट हो गया था। वे आर्मी मेडिकल सेक्टर में हवलदार के पद पर तैनात थे। 16 मार्च से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन आखिरकार वे जिंदगी की जंग हार गए। सेना ने दिया शहीद का दर्जा सेना ने उनके बेहतर सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें शहीद का दर्जा दिया। गांव में सेना की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद जवान की अंतिम झलक पाने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। हर किसी की आंखें नम थीं। मौके पर सेना के अधिकारी, स्थानीय पुलिस प्रशासन और नाथनगर के विधायक मिथुन कुमार यादव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। उसके बाद पार्थिव शरीर को बरारी गंगा घाट पर लाया, जहां उसके छोटे बेटे नायरा ने पिता को मुख्यग्नि दी। शहीद की पत्नी नीशा भारती ने बताया कि उन्हें फोन पर पति की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी। जब वे अस्पताल पहुंचीं, तब वे ICU में भर्ती थे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें नौकरी दी जाए, ताकि वे अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें। मृतक की मां ने बताया कि बेटे ने कुछ दिन पहले वीडियो कॉल पर कहा था कि वह ठीक है और चिंता न करें। उन्होंने भी सरकार से बहू को नौकरी और बच्चों की अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग की है। नीरज कुमार साल 2009 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी शहादत से पूरा इलाका गौरवान्वित होने के साथ-साथ गहरे शोक में डूबा है।


