नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व शुरू:भागलपुर में गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़, पूजा-अर्चना कर व्रतियों ने प्रसाद किया ग्रहण

नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व शुरू:भागलपुर में गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़, पूजा-अर्चना कर व्रतियों ने प्रसाद किया ग्रहण

नहाय-खाय के साथ 4 दिन तक चलने वाले चैती छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर भागलपुर में गंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्रतियों ने गंगा स्नान कर घाट किनारे पूजा-अर्चना किया। फिर मिट्टी के चूल्हे पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण किया। खाना सबसे पहले व्रत रखने वाली महिला या पुरुष को परोसा जाता है। इसके बाद ही परिवार के अन्य लोग भोजन ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को खाने के बाद ही छठ व्रत की शुरुआत हो जाती है।
36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास दूसरे दिन 23 मार्च को खरना है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गन्ने के रस में बनी खीर, रोटी बनाकर सूर्य भगवान को अर्पित करेंगे। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास का संकल्प लेंगे। छठ को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल तीसरे दिन 24 मार्च को डूबते सूर्य और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन होगा। मान्यता है कि यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का महापर्व है, जो परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतति के कल्याण के लिए किया जाता है। पूरे भागलपुर में छठ को लेकर श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। बाजारों में रौनक बढ़ गई है। नहाय-खाय के साथ 4 दिन तक चलने वाले चैती छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर भागलपुर में गंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्रतियों ने गंगा स्नान कर घाट किनारे पूजा-अर्चना किया। फिर मिट्टी के चूल्हे पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण किया। खाना सबसे पहले व्रत रखने वाली महिला या पुरुष को परोसा जाता है। इसके बाद ही परिवार के अन्य लोग भोजन ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को खाने के बाद ही छठ व्रत की शुरुआत हो जाती है।
36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास दूसरे दिन 23 मार्च को खरना है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गन्ने के रस में बनी खीर, रोटी बनाकर सूर्य भगवान को अर्पित करेंगे। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास का संकल्प लेंगे। छठ को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल तीसरे दिन 24 मार्च को डूबते सूर्य और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन होगा। मान्यता है कि यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का महापर्व है, जो परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतति के कल्याण के लिए किया जाता है। पूरे भागलपुर में छठ को लेकर श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। बाजारों में रौनक बढ़ गई है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *