नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व की शुरुआत:गयाजी में मंदिर और घाटों पर उमड़ी भीड़; व्रती बोलीं- परिवार में सुख-शांति के लिए पूजा कर रही हूं

नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व की शुरुआत:गयाजी में मंदिर और घाटों पर उमड़ी भीड़; व्रती बोलीं- परिवार में सुख-शांति के लिए पूजा कर रही हूं

नहाय-खाय के साथ 4 दिन तक चलने वाले चैती छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर गयाजी में छत्रपति समेत कई घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्रतियों ने गंगा स्नान कर घाट किनारे पूजा-अर्चना किया। फिर मिट्टी के चूल्हे पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया। संजू देवी ने कहा, ‘छठ सिर्फ पूजा नहीं, जीवन का संस्कार है। परिवार की सुख-शांति के लिए किया जाता है। पहली बार चैती छठ कर रही हूं। घर में छठ गीत गूंज रहे हैं। गेहूं धोकर प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। हर नियम का पालन किया जा रहा है। व्रती इंदु शर्मा ने बताया कि छठ नियम और अनुशासन का पर्व है। यह पर्व गांव, घर, परिवार की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। 36 घंटे का निर्जला उपवास दूसरे दिन 23 मार्च को खरना है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गन्ने के रस में बनी खीर, रोटी बनाकर सूर्य भगवान को अर्पित करेंगे। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास का संकल्प लेंगे। तीसरे दिन 24 मार्च को डूबते सूर्य और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन होगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम चैती छठ महापर्व पर जिला प्रशासन अलर्ट मोड में हैं। घाटों की सफाई कराई गई है। सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। बैरिकेडिंग, लाइटिंग और गोताखोर की व्यवस्था की गई है। ताकि व्रतियों को कोई परेशानी न हो। नहाय-खाय के साथ 4 दिन तक चलने वाले चैती छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर गयाजी में छत्रपति समेत कई घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्रतियों ने गंगा स्नान कर घाट किनारे पूजा-अर्चना किया। फिर मिट्टी के चूल्हे पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया। संजू देवी ने कहा, ‘छठ सिर्फ पूजा नहीं, जीवन का संस्कार है। परिवार की सुख-शांति के लिए किया जाता है। पहली बार चैती छठ कर रही हूं। घर में छठ गीत गूंज रहे हैं। गेहूं धोकर प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। हर नियम का पालन किया जा रहा है। व्रती इंदु शर्मा ने बताया कि छठ नियम और अनुशासन का पर्व है। यह पर्व गांव, घर, परिवार की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। 36 घंटे का निर्जला उपवास दूसरे दिन 23 मार्च को खरना है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गन्ने के रस में बनी खीर, रोटी बनाकर सूर्य भगवान को अर्पित करेंगे। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास का संकल्प लेंगे। तीसरे दिन 24 मार्च को डूबते सूर्य और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन होगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम चैती छठ महापर्व पर जिला प्रशासन अलर्ट मोड में हैं। घाटों की सफाई कराई गई है। सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। बैरिकेडिंग, लाइटिंग और गोताखोर की व्यवस्था की गई है। ताकि व्रतियों को कोई परेशानी न हो।  

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