Shaheed Diwas 2026: आज हम सब अपने देश में जिस खुली हवा में आजादी से सांस ले रहे हैं, उसे मुमकिन बनाने के लिए न जाने कितने वीरों ने अपनी खुशियां और अपनी जान दांव पर लगा दी। उन्हीं महान बलिदानियों के सम्मान में हर साल शहीद दिवस मनाते हैं। लेकिन अक्सर कई लोग इस बात को लेकर थोड़े कंफ्यूज रहते हैं कि हम साल में दो बार शहीद दिवस क्यों मनाते हैं? दरअसल, भारत में 30 जनवरी और 23 मार्च, इन दोनों दिनों को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। आइए, आज के इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इन दोनों दिनों को शहीद दिवस के रूप में ही क्यों मनाया जाता है और इनका इतिहास क्या है।
राष्ट्रपिता की याद में
30 जनवरी का शहीद दिवस बापू यानी महात्मा गांधी की याद में मनाया जाता है। साल 1948 में इसी दिन नई दिल्ली के बिरला भवन में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। गांधी जी ने पूरी दुनिया को दिखाया कि बिना हथियार उठाए भी, सिर्फ सत्य और अहिंसा के दम पर इतनी बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत को गुलामी की जंजीरों से निकालने में लगा दिया। उनकी इसी शहादत को नमन करने के लिए हर साल देश के बड़े नेता उनकी समाधि यानी राजघाट पर जाकर उन्हें याद करते हैं।
तीन जांबाज क्रांतिकारियों की याद में
30 जनवरी के बाद 23 मार्च की तारीख हर हिंदुस्तानी के रोंगटे खड़े कर देने वाला दिन है। साल 1931 में इसी दिन अंग्रेज सरकार ने हमारे देश के तीन सबसे जांबाज क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी के फंदे पर लटकाया था। इन नौजवानों ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए अंग्रेज अफसर सांडर्स को मार गिराया था और दिल्ली की असेंबली में बम फेंककर यह साबित कर दिया था कि वे अंग्रेजों के जुल्म के आगे झुकने वाले नहीं हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब उन्हें फांसी दी गई, तब भगत सिंह सिर्फ 23 साल के थे। उनकी यह कुर्बानी आज भी हमारे युवाओं की रगों में जोश भर देती है। यही वजह है कि 23 मार्च को भी पूरे देश में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।


