Noida Engineer Yuvraj Mehta Case: नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने साफ कहा कि अब तक जो तरीका चल रहा था, वह अब बर्दाश्त नहीं होगा। सभी संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगे गए हैं और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
हाईकोर्ट की टिप्पणियां और नाराजगी
कोर्ट ने बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर दिए गए जवाबों से असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और पुलिस को मिलकर एक मजबूत योजना बनानी होगी। आपदा के समय सभी विभागों के बीच अच्छा तालमेल जरूरी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अक्सर घटना होने के बाद एक विभाग दूसरे को फोन करता रहता है, लेकिन फोन नहीं उठता या कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच पाते। कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा कि विभागों के बीच यह संवाद की कमी हर हाल में खत्म होनी चाहिए।
नोएडा प्राधिकरण पर कोर्ट के सवाल
हाईकोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने पूछा- क्या आप सिर्फ बिल्डरों को इमारतें बनाने की अनुमति देकर काम चला लोगे, या असली जिम्मेदारी भी लोगे? प्राधिकरण बिल्डरों को 40-40 मंजिला इमारतें बनाने दे रहा है, लेकिन क्या यह जांचता है कि आपदा के समय उन ऊंची इमारतों तक पहुंचने के साधन बिल्डर के पास हैं या नहीं? कोर्ट ने कहा कि
क्या सब कुछ आंख मूंदकर मंजूर किया जा रहा है?
कोर्ट ने आगे कहा- अगर बिल्डर के पास जरूरी उपकरण नहीं हैं और प्राधिकरण फीस तो ले रहा है, तो मुश्किल समय में मदद कौन पहुंचाएगा? यह जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर नोएडा प्राधिकरण से एक विस्तृत योजना और कार्यक्रम लेकर आने को कहा है। अब यह मामला 1 अप्रैल को फिर सुना जाएगा।
बचाव कार्य में हुई चूक पर सवाल
कोर्ट ने इस बात पर बहुत दुख जताया कि युवराज ने घंटों तक मदद मांगी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। कोर्ट ने पूछा- आखिर ऐसी क्या वजह रही कि इतनी देर लग गई? बचाव टीमों को ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को निकालने की क्या ट्रेनिंग दी गई थी? घटना के समय मौके पर कौन-कौन से अधिकारी मौजूद थे? कोर्ट ने इन सभी बातों के जवाब मांगे हैं ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।


