क्यूआर कोड शिशु अस्पताल में, टोकन कट रहा यूपीएचसी जगन्नाथ मंदिर का

क्यूआर कोड शिशु अस्पताल में, टोकन कट रहा यूपीएचसी जगन्नाथ मंदिर का

अलवर. स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने और मरीजों को कतार से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई क्यूआर कोड आधारित पर्ची व्यवस्था फेल हो गई है। राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय में लगे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करने पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (यूपीएचसी) जगन्नाथ मंदिर के नाम से टोकन जनरेट हो रहे हैं। तमाम शिकायतों के बाद शनिवार को जब पत्रिका टीम ने क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन किया, तो ये शिकायतें सच साबित हुईं। मई-2025 में सामान्य, जनाना और शिशु अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की सुविधा के लिए क्यूआर कोड लगाए गए थे। शिशु अस्पताल में गलत क्यूआर कोड लगाए जाने से टोकन दूसरे अस्पताल के नाम से बन रहे हैं, जिससे पर्ची काउंटर पर स्टाफ और मरीजों के बीच लगातार गफलत की स्थिति बनी हुई है।
टोकन के बाद भी नहीं बन रही पर्ची
क्यूआर कोड से पर्ची बनवाने के लिए पहले आभा ऐप पर प्रोफाइल बनाकर उसे अस्पताल से लिंक करना होता है। इसके बाद क्यूआर कोड स्कैन कर टोकन लिया जाता है। गलत क्यूआर कोड के कारण टोकन जनरेट होने के बावजूद ऑपरेटर की सूची में मरीज का नाम नहीं आता, जिससे उन्हें दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में डिजिटल सुविधा के नाम पर शुरू की गई यह व्यवस्था फिलहाल मरीजों के लिए राहत के बजाय नई आफत बन गई है।
जानकारी होने के बावजूद लापरवाही
वेटिंग हॉल में लगी स्टैंडी पर गलत क्यूआर कोड अंकित होने की जानकारी सामने आने के बाद करीब 3-4 महीने पहले उक्त स्टैंडी को वहां से हटा दिया गया था। जिसके बाद हाल ही में कायाकल्प टीम के निरीक्षण के दौरान उसी गलत क्यूआर कोड वाली स्टैंडी को फिर से वेटिंग हॉल में लगा दिया गया। मरीजों की मदद के लिए प्रस्तावित हैल्प डेस्क भी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते मरीजों को इस डिजिटल व्यवस्था का कोई लाभ नहीं मिल रहा है और उन्हें पारंपरिक तरीके से ही पर्ची बनवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *