Reproductive Technology: कहते हैं कि मौत के साथ ही जीवन की सारी संभावनाएं खत्म हो जाती हैं, लेकिन अब विज्ञान इस धारणा को चुनौती दे रहा है। एम्स भोपाल और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की एक महत्वपूर्ण रिसर्च में खुलासा हुआ है कि मृत्यु के बाद भी पुरुष के शरीर में लगभग 21.5 घंटे तक शुक्राणु जीवित रह सकते हैं।
Reproductive Technology: 250 से अधिक सफल प्रक्रियाएं
यह अध्ययन खासतौर पर फांसी से हुई मौतों पर आधारित है और इसे दुनिया का पहला कॉज-स्पेसिफिक ह्यूमन डेटा माना जा रहा है। इस खोज ने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीकों के जरिए मृत व्यक्ति भी पिता बन सकता है। 250 से अधिक सफल प्रक्रियाएं: इस रिसर्च का नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. राघवेन्द्र कुमार विदुआ ने किया। अब तक 250 से अधिक PMSR प्रक्रियाएं की जा चुकी है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा डेटा सेट माना जा रहा है, शोध को जर्नल ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्टिव साइंसेज में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है।
क्या कहती है रिसर्च?
एम्स भोपाल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि करीब 50 प्रतिशत मामलों में जीवित शुक्राणु मिले जिसमें लगभग 44 प्रतिशत मामलों में स्पर्म सक्रिय और गतिशील थे। जिसमें कुछ मामलों में 72 प्रतिशत तक जीवन क्षमता दर्ज की गई। ये आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि मृत्यु के बाद भी प्रजनन कोशिकाएं अपेक्षा से अधिक समय तक सुरक्षित रह सकती हैं।
बदलती सोच, नई उम्मीद
मेकाज के मेडिसिन विभाग में कार्यरत डॉ नवीन दुल्हानी ने कहा कि यह खोज उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो किसी कारणवश अपने प्रियजन को खोने के बाद संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। विज्ञान की यह नई उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला सकती है, बल्कि सामाजिक और नैतिक विमर्श को भी एक नई दिशा देगी।
Reproductive Technology: कानूनी पहलू महत्वपूर्ण
भारत में फिलहाल मरणोपरांत प्रजनन (posthumous reproduction) को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन नहीं हैं। हालांकि, यह रिसर्च भविष्य में नीति निर्माण के लिए अहम साबित हो सकती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद को इस संबंध में सिफारिशें भेजी जाएंगी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर प्रोटोकॉल बना सकती है।
क्या है पीएमएसआर तकनीक?
पोस्ट-मार्टम स्पर्म रिट्रीवल (PMSR) एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें मृत्यु के बाद पुरुष के शरीर से शुक्राणु सुरक्षित तरीके से निकाले जाते हैं। इसमें वासो-एपिडिडाइमल वॉश तकनीक का उपयोग किया जाता है, और प्राप्त स्पर्म को इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों में इस्तेमाल किया जा सकता है।


