चित्रकूट के पाठा क्षेत्र की मांगों पर वार्ता विफल:बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा का अनशन पांचवें दिन भी जारी

चित्रकूट के पाठा क्षेत्र की मांगों पर वार्ता विफल:बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा का अनशन पांचवें दिन भी जारी

चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में मूलभूत जनसमस्याओं को लेकर बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा का क्रमिक अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, परिवहन और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर प्रशासन को 20 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा था। ठोस आश्वासन और प्रभावी कार्रवाई न मिलने के कारण अनशन जारी रखने का निर्णय लिया गया है। पांचवें दिन अनशन स्थल पर एसडीएम, तहसीलदार और सीओ पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल बातचीत से काम नहीं चलेगा। उनकी मांग है कि जब तक मांगों पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। वार्ता के बाद सभी सहयोगियों ने सर्वसम्मति से क्रमिक अनशन जारी रखने का फैसला किया। मोर्चा की प्रमुख मांगों में देवांगना घाटी से ददरी-मारकुंडी संपर्क मार्ग का चौड़ीकरण, रुकमा खुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस और स्टाफ की तैनाती शामिल है। इसके अतिरिक्त, रुकमा बुजुर्ग पुस्तकालय का संचालन तथा मारकुंडी, इटवा डुडैला और सरैंया में नए पुस्तकालयों का निर्माण भी मांगा गया है। अन्य मांगों में खेलो इंडिया के तहत खेल स्टेडियम, डिग्री कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज, बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण, पशु अस्पताल में पेयजल और डॉक्टरों की तैनाती, विद्युत कटौती व लो वोल्टेज से निजात, हर घर जल योजना का शीघ्र पूरा होना, तालाबों का सुंदरीकरण, सड़कों की मरम्मत, सरकारी बस संचालन, माडो बांध के गेट की मरम्मत, श्मशान घाट निर्माण और ददरी माफी में पुलिस चौकी की स्थापना शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने बहिलपुरवा और मारकुंडी रेलवे क्षेत्र में फ्लाईओवर निर्माण, पलायन रोकने के लिए उद्योग-धंधों की स्थापना, विद्यालयों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा, रुकमा खुर्द को कर्वी तहसील से जोड़ना तथा ऑटो रिक्शा स्टैंड बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। अनशन में एडवोकेट प्रखर पटेल, समाजसेवी मुकेश कुमार, मीरा भारती, दिनेश पटेल, संदीप, संजय, चन्द्रशेखर, धर्मेंद्र कुमार भास्कर, मुकेश सिंह, विपिन, अजय और प्रदीप सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल रहे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाठा क्षेत्र की उपेक्षित समस्याओं पर ठोस निर्णय नहीं होगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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