घर में शादी की तैयारी, गल्फ कंट्री में फंसे दूल्हे:गयाजी के खंडेल में परिवार कर रहा बेटों का इंतजार, कहा- बारात तैयार, जंग ने हालात बदले

घर में शादी की तैयारी, गल्फ कंट्री में फंसे दूल्हे:गयाजी के खंडेल में परिवार कर रहा बेटों का इंतजार, कहा- बारात तैयार, जंग ने हालात बदले

रिजवान के नाम का सेहरा तैयार है। कार्ड बंट चुके हैं। गाड़ी, बस, होटल, बावर्ची, सब बुक कर लिए गए हैं। काजी साहब भी तैयार बैठे हैं। घर में रौनक है, लेकिन एक कमी सब पर भारी है, दूल्हा ही नहीं पहुंच पा रहा। वक्त नजदीक है। मेहमान इंतजार में हैं लेकिन आखिरी समय पर खबर आती है कि रिजवान नहीं आ पाएंगे। ये सिर्फ एक कहानी नहीं है। गयाजी के खंडेल गांव में दर्जनों ऐसे घर हैं, जहां शादी की तारीख तय है, लेकिन दूल्हा विदेश में फंसा है। वजह अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग है। खाड़ी देशों में हालात बिगड़े हुए हैं। फ्लाइटें रद्द हो रही हैं। टिकट के दाम आसमान छू रहे हैं। सब तय था, लेकिन जंग ने बदल दी तस्वीर खंडेल पंचायत के 300 से 400 युवा खाड़ी देशों में काम करते हैं। हर दूसरे घर का कोई न कोई सदस्य विदेश में है। ईद-बकरीद में घर लौटने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार जंग ने सब गड़बड़ कर दिया दिया। कई युवकों की शादी मार्च में तय है। परिवारों पर संकट है कि शादी होगी या टलेगी। जलील शाह का घर भी इसी चिंता में डूबा है। बेटे की शादी 30 मार्च को जहानाबाद के एरकी गांव में तय है। कार्ड बांटे जा चुके हैं। बारात की तैयारी पूरी है। लेकिन बेटा कतर में फंसा है। 26 मार्च की टिकट थी। दो बार फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है। ‘बेटा आ गया तो बारात जाएगी, नहीं आया तो लड़की वालों से माफी मांग लेंगे’ जलील शाह कहते हैं कि हमने तैयारी पूरी कर रखी है। बेटा आ गया तो बारात निकल जाएगी। नहीं आया तो लड़की वालों और गांव के लोगों से माफी मांग लेंगे। लेकिन उम्मीद अभी भी है। 20 हजार की टिकट के लिए 1 लाख तक खर्च जानकारी के मुताबिक, गल्फ कंट्री से जो लोग किसी तरह आ रहे हैं, उनकी भी हालत आसान नहीं। 20 हजार की टिकट के लिए 60 हजार से लेकर 1 लाख तक खर्च करना पड़ रहा है। गांव के नासिर खान बताते हैं कि 14 और 15 मार्च की टिकट कैंसिल हो गई। 17 मार्च को किसी तरह टिकट मिली। 20 हजार की जगह 60 हजार देना पड़ा। ये हाल सिर्फ सऊदी का नहीं है। कुवैत और कतर में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। मिसाइल हमलों के बीच लोग रात-रात भर जागकर बंकर या सड़कों पर समय काट रहे हैं। लकड़ी के चूल्हे पर बन सकता है शादी का खाना शादी की तैयारी में एक और संकट है, गैस सिलेंडर। जलील शाह बताते हैं कि अगर बेटा 30 मार्च को भी पहुंचता है, तो उसी दिन बारात निकालेंगे। इसके लिए बावर्ची को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को तैयार किया गया है। जरूरत पड़ी तो होटल भी छोड़ देंगे। इज्जत का सवाल है। दहेज नहीं लिया, लेकिन लड़की वालों का खर्च है। शादी टली तो उनका भी नुकसान होगा। ऑनलाइन निकाह का विकल्प भी तैयार गांव के मुखिया प्रतिनिधि जावेद खान बताते हैं कि कई परिवार अब प्लान-बी पर काम कर रहे हैं। अगर दूल्हा या दुल्हन समय पर नहीं पहुंचते हैं, तो ऑनलाइन निकाह कराया जा सकता है। उनके अपने परिवार में भी दो शादियां हैं। एक दूल्हा बहरीन में है, दूसरा कतर में। दोनों अब तक नहीं पहुंच सके हैं। एक रिश्तेदार ने डेढ़ लाख खर्च कर किसी तरह सऊदी से गया पहुंचा। मिसाइलों के साए में जी रहे हैं अपने गांव का एक युवक बताता है कि मेरा भाई कुवैत में है। आसपास मिसाइल गिरी हैं। 19 मार्च की टिकट थी, कैंसिल हो गई। अब सऊदी के जरिए आने की कोशिश कर रहे हैं। परिवार यहां बैठा है, लेकिन हर पल डर में जी रहा है। फोन पर बात होती है, तो दिल दहल जाता है। वहीं, जमील खान का कहना है कि जब सुना कि मिसाइल गिर रही है, तब से नींद उड़ गई थी। बेटा 17 मार्च को आया, तब जाकर चैन मिला। गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा मार खंडेल गांव की तस्वीर बदली है, खाड़ी देशों की कमाई से। गांव में बैंक तक खुल गए हैं। पक्के घर बने हैं। लेकिन यही कमाई अब चिंता का कारण बन गई है। कई परिवार ऐसे हैं जहां एक ही कमाने वाला विदेश में है। वही घर का सहारा है। अगर उसके साथ कुछ हुआ या वह समय पर नहीं पहुंचा, तो पूरा परिवार संकट में आ जाएगा। रफी खान कहते हैं कि सब अल्लाह की मरजी है। बेटा 24 मार्च को आने वाला है। अगर वो भी कैंसिल हुआ तो फिर तारीख बढ़ानी पड़ेगी। हम क्या कर सकते हैं, बस दुआ कर सकते हैं। सरकार से उम्मीद कम, दुआ पर भरोसा ज्यादा गांव के लोग मानते हैं कि सरकार के हाथ में ज्यादा कुछ नहीं है। हालात अंतरराष्ट्रीय हैं। लेकिन भारतीय दूतावास से उन्हें मदद की उम्मीद है। नासिर खान कहते हैं कि भारतीय एंबेसी मदद करती है। बस खुद को सुरक्षित रखना जरूरी है। रिजवान के नाम का सेहरा तैयार है। कार्ड बंट चुके हैं। गाड़ी, बस, होटल, बावर्ची, सब बुक कर लिए गए हैं। काजी साहब भी तैयार बैठे हैं। घर में रौनक है, लेकिन एक कमी सब पर भारी है, दूल्हा ही नहीं पहुंच पा रहा। वक्त नजदीक है। मेहमान इंतजार में हैं लेकिन आखिरी समय पर खबर आती है कि रिजवान नहीं आ पाएंगे। ये सिर्फ एक कहानी नहीं है। गयाजी के खंडेल गांव में दर्जनों ऐसे घर हैं, जहां शादी की तारीख तय है, लेकिन दूल्हा विदेश में फंसा है। वजह अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग है। खाड़ी देशों में हालात बिगड़े हुए हैं। फ्लाइटें रद्द हो रही हैं। टिकट के दाम आसमान छू रहे हैं। सब तय था, लेकिन जंग ने बदल दी तस्वीर खंडेल पंचायत के 300 से 400 युवा खाड़ी देशों में काम करते हैं। हर दूसरे घर का कोई न कोई सदस्य विदेश में है। ईद-बकरीद में घर लौटने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार जंग ने सब गड़बड़ कर दिया दिया। कई युवकों की शादी मार्च में तय है। परिवारों पर संकट है कि शादी होगी या टलेगी। जलील शाह का घर भी इसी चिंता में डूबा है। बेटे की शादी 30 मार्च को जहानाबाद के एरकी गांव में तय है। कार्ड बांटे जा चुके हैं। बारात की तैयारी पूरी है। लेकिन बेटा कतर में फंसा है। 26 मार्च की टिकट थी। दो बार फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है। ‘बेटा आ गया तो बारात जाएगी, नहीं आया तो लड़की वालों से माफी मांग लेंगे’ जलील शाह कहते हैं कि हमने तैयारी पूरी कर रखी है। बेटा आ गया तो बारात निकल जाएगी। नहीं आया तो लड़की वालों और गांव के लोगों से माफी मांग लेंगे। लेकिन उम्मीद अभी भी है। 20 हजार की टिकट के लिए 1 लाख तक खर्च जानकारी के मुताबिक, गल्फ कंट्री से जो लोग किसी तरह आ रहे हैं, उनकी भी हालत आसान नहीं। 20 हजार की टिकट के लिए 60 हजार से लेकर 1 लाख तक खर्च करना पड़ रहा है। गांव के नासिर खान बताते हैं कि 14 और 15 मार्च की टिकट कैंसिल हो गई। 17 मार्च को किसी तरह टिकट मिली। 20 हजार की जगह 60 हजार देना पड़ा। ये हाल सिर्फ सऊदी का नहीं है। कुवैत और कतर में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। मिसाइल हमलों के बीच लोग रात-रात भर जागकर बंकर या सड़कों पर समय काट रहे हैं। लकड़ी के चूल्हे पर बन सकता है शादी का खाना शादी की तैयारी में एक और संकट है, गैस सिलेंडर। जलील शाह बताते हैं कि अगर बेटा 30 मार्च को भी पहुंचता है, तो उसी दिन बारात निकालेंगे। इसके लिए बावर्ची को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को तैयार किया गया है। जरूरत पड़ी तो होटल भी छोड़ देंगे। इज्जत का सवाल है। दहेज नहीं लिया, लेकिन लड़की वालों का खर्च है। शादी टली तो उनका भी नुकसान होगा। ऑनलाइन निकाह का विकल्प भी तैयार गांव के मुखिया प्रतिनिधि जावेद खान बताते हैं कि कई परिवार अब प्लान-बी पर काम कर रहे हैं। अगर दूल्हा या दुल्हन समय पर नहीं पहुंचते हैं, तो ऑनलाइन निकाह कराया जा सकता है। उनके अपने परिवार में भी दो शादियां हैं। एक दूल्हा बहरीन में है, दूसरा कतर में। दोनों अब तक नहीं पहुंच सके हैं। एक रिश्तेदार ने डेढ़ लाख खर्च कर किसी तरह सऊदी से गया पहुंचा। मिसाइलों के साए में जी रहे हैं अपने गांव का एक युवक बताता है कि मेरा भाई कुवैत में है। आसपास मिसाइल गिरी हैं। 19 मार्च की टिकट थी, कैंसिल हो गई। अब सऊदी के जरिए आने की कोशिश कर रहे हैं। परिवार यहां बैठा है, लेकिन हर पल डर में जी रहा है। फोन पर बात होती है, तो दिल दहल जाता है। वहीं, जमील खान का कहना है कि जब सुना कि मिसाइल गिर रही है, तब से नींद उड़ गई थी। बेटा 17 मार्च को आया, तब जाकर चैन मिला। गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा मार खंडेल गांव की तस्वीर बदली है, खाड़ी देशों की कमाई से। गांव में बैंक तक खुल गए हैं। पक्के घर बने हैं। लेकिन यही कमाई अब चिंता का कारण बन गई है। कई परिवार ऐसे हैं जहां एक ही कमाने वाला विदेश में है। वही घर का सहारा है। अगर उसके साथ कुछ हुआ या वह समय पर नहीं पहुंचा, तो पूरा परिवार संकट में आ जाएगा। रफी खान कहते हैं कि सब अल्लाह की मरजी है। बेटा 24 मार्च को आने वाला है। अगर वो भी कैंसिल हुआ तो फिर तारीख बढ़ानी पड़ेगी। हम क्या कर सकते हैं, बस दुआ कर सकते हैं। सरकार से उम्मीद कम, दुआ पर भरोसा ज्यादा गांव के लोग मानते हैं कि सरकार के हाथ में ज्यादा कुछ नहीं है। हालात अंतरराष्ट्रीय हैं। लेकिन भारतीय दूतावास से उन्हें मदद की उम्मीद है। नासिर खान कहते हैं कि भारतीय एंबेसी मदद करती है। बस खुद को सुरक्षित रखना जरूरी है।  

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