पूर्णिया में प्रकृति का महापर्व सरहुल मना:हजारों श्रद्धालु पारंपरिक आदिवासी वेश में नृत्य करते दिखे

पूर्णिया में प्रकृति का महापर्व सरहुल मना:हजारों श्रद्धालु पारंपरिक आदिवासी वेश में नृत्य करते दिखे

पूर्णिया जिले में शनिवार को प्रकृति का महापर्व सरहुल पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सरहुल बाहा पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। महोत्सव समिति हांसदा तरबन्ना और गुलाबबाग सहित कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। तरबन्ना स्थित पूजा स्थल से एक भव्य सरहुल शोभा यात्रा निकाली गई। इस शोभा यात्रा में युवतियां, महिलाएं और पुरुष पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नृत्य करते हुए नजर आए, जो आकर्षण का केंद्र रहा। सरहुल पूजा के मौके पर बिहार अनुसूचित जनजाति उपाध्यक्ष शैलेंद्र गढ़वाल और पूर्णिया की महापौर विभा कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। इनके साथ सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी जितेंद्र यादव, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। पूजा समिति के सदस्यों ने अतिथियों को अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। महापौर विभा कुमारी और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेंद्र यादव ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने आदिवासी समाज के पारंपरिक नृत्य और शोभा यात्रा में भी सक्रिय रूप से भाग लिया। महापौर विभा कुमारी ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के सबसे निकट है और उनकी जीवनशैली प्रकृति संरक्षण का सर्वोत्तम उदाहरण है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को साकार करती है। जितेंद्र यादव ने इस अवसर पर कहा कि सरहुल प्रकृति और फूलों का पर्व है, जो धरती माता को समर्पित है। यह नए कृषि कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है और पर्यावरण संरक्षण व आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इस मौके पर आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र उरांव, कमेटी के अध्यक्ष संजू तिर्की, सचिव सुनील लकड़ा, कोषाध्यक्ष बीरबल उरांव, वार्ड पार्षद लखेंद्र साह सहित कई गणमान्य लोग और हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे। पूर्णिया जिले में शनिवार को प्रकृति का महापर्व सरहुल पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सरहुल बाहा पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। महोत्सव समिति हांसदा तरबन्ना और गुलाबबाग सहित कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। तरबन्ना स्थित पूजा स्थल से एक भव्य सरहुल शोभा यात्रा निकाली गई। इस शोभा यात्रा में युवतियां, महिलाएं और पुरुष पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नृत्य करते हुए नजर आए, जो आकर्षण का केंद्र रहा। सरहुल पूजा के मौके पर बिहार अनुसूचित जनजाति उपाध्यक्ष शैलेंद्र गढ़वाल और पूर्णिया की महापौर विभा कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। इनके साथ सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी जितेंद्र यादव, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। पूजा समिति के सदस्यों ने अतिथियों को अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। महापौर विभा कुमारी और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेंद्र यादव ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने आदिवासी समाज के पारंपरिक नृत्य और शोभा यात्रा में भी सक्रिय रूप से भाग लिया। महापौर विभा कुमारी ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के सबसे निकट है और उनकी जीवनशैली प्रकृति संरक्षण का सर्वोत्तम उदाहरण है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को साकार करती है। जितेंद्र यादव ने इस अवसर पर कहा कि सरहुल प्रकृति और फूलों का पर्व है, जो धरती माता को समर्पित है। यह नए कृषि कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है और पर्यावरण संरक्षण व आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इस मौके पर आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र उरांव, कमेटी के अध्यक्ष संजू तिर्की, सचिव सुनील लकड़ा, कोषाध्यक्ष बीरबल उरांव, वार्ड पार्षद लखेंद्र साह सहित कई गणमान्य लोग और हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।  

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