पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। फलदार बागानों से लेकर अनाज की फसलें हुईं नष्ट इस प्राकृतिक आपदा से आम, लीची और केले के बागानों के साथ-साथ गेहूं और मक्के की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। धमदाहा प्रखंड में ही हजारों एकड़ फसल नष्ट होने की जानकारी सामने आ रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कर्ज लेकर की थी खेती, अब मुआवजे की उम्मीद प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी आंधी-तूफान से फसलें बर्बाद हुई थीं, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। इस बार कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन तबाही ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है। किसानों का कहना है कि समय पर राहत नहीं मिली तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। खेतों में दिख रहा बर्बादी का मंजर मक्के की फसलें जमीन पर गिर चुकी हैं, गेहूं की बालियां टूट गई हैं और फलदार पेड़ों से कच्चे फल झड़कर बर्बाद हो गए हैं। इस आपदा से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। प्रशासन ने सर्वे का दिया निर्देश अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अनुपम ने बताया कि अनुमंडल के सभी चारों प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को फसल क्षति का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राहत की आस में किसान फिलहाल किसान मुआवजे की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब देखना होगा कि इस बार उन्हें समय पर राहत मिल पाती है या उनकी उम्मीदें फिर अधूरी रह जाती हैं। पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। फलदार बागानों से लेकर अनाज की फसलें हुईं नष्ट इस प्राकृतिक आपदा से आम, लीची और केले के बागानों के साथ-साथ गेहूं और मक्के की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। धमदाहा प्रखंड में ही हजारों एकड़ फसल नष्ट होने की जानकारी सामने आ रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कर्ज लेकर की थी खेती, अब मुआवजे की उम्मीद प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी आंधी-तूफान से फसलें बर्बाद हुई थीं, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। इस बार कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन तबाही ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है। किसानों का कहना है कि समय पर राहत नहीं मिली तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। खेतों में दिख रहा बर्बादी का मंजर मक्के की फसलें जमीन पर गिर चुकी हैं, गेहूं की बालियां टूट गई हैं और फलदार पेड़ों से कच्चे फल झड़कर बर्बाद हो गए हैं। इस आपदा से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। प्रशासन ने सर्वे का दिया निर्देश अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अनुपम ने बताया कि अनुमंडल के सभी चारों प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को फसल क्षति का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राहत की आस में किसान फिलहाल किसान मुआवजे की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब देखना होगा कि इस बार उन्हें समय पर राहत मिल पाती है या उनकी उम्मीदें फिर अधूरी रह जाती हैं।


