मुंगेर DSP ने 2 वर्षीय गुंजा का कराया एडमिशन:मजदूर की बेटी की पढ़ाई का उठाया खर्च,कहा-कोई दिक्कत आए तो बताएं

मुंगेर के यातायात डीएसपी प्रभात रंजन ने एक मानवीय पहल करते हुए मजदूर की दो वर्षीय बेटी गुंजा कुमारी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है। ईद के दिन डीएसपी ने ड्यूटी के दौरान बच्ची को देखा और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति जानने के बाद यह कदम उठाया। बच्ची को बिस्किट देकर पास बुलाया यह घटना शनिवार सुबह कोतवाली चौक पर हुई, जब डीएसपी प्रभात रंजन अपनी ड्यूटी पर थे। उन्होंने देखा कि लगभग दो साल की एक बच्ची उन्हें लगातार देख रही थी। यह बच्ची किला परिसर निवासी मजदूर श्रवण मांझी की बेटी गुंजा कुमारी थी। डीएसपी ने बच्ची की मासूमियत से प्रभावित होकर अपने अंगरक्षक से उसके लिए बिस्किट मंगवाए और उसे अपने पास बुलाया। बच्ची के साथ उसकी मां दुर्गा देवी और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। डीएसपी ने परिजनों से बच्ची की पढ़ाई के बारे में पूछा। परिवार ने अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बताया कि वे बच्ची को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल है। इसके बाद डीएसपी ने परिवार को उसी दिन सुबह 11 बजे मिलने के लिए बुलाया। ईद की छुट्टी के बावजूद खुलवाया स्कूल निर्धारित समय पर परिवार कोतवाली चौक पहुंचा, जहां से डीएसपी उन्हें अपने सरकारी वाहन में बिठाकर कर्णाक मोड़ स्थित एक निजी प्ले स्कूल ले गए। ईद की छुट्टी होने के कारण स्कूल बंद था, लेकिन डीएसपी ने विद्यालय के डायरेक्टर को बुलाकर स्कूल खुलवाया और गुंजा के नामांकन की प्रक्रिया शुरू करवाई। जब परिजनों ने फीस भरने में असमर्थता व्यक्त की, तो डीएसपी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह गुंजा की पूरी पढ़ाई का खर्च स्वयं उठाएंगे। उन्होंने तत्काल 2100 रुपये का भुगतान कर नामांकन, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की। डीएसपी ने यह भी आश्वासन दिया कि अगले कुछ दिनों में छह महीने की फीस भी जमा कर दी जाएगी, ताकि बच्ची की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। स्कूल बैग, पानी की बोतल, जूते दिलाए इतना ही नहीं, डीएसपी ने अपने खर्च से बच्ची के लिए स्कूल बैग, पानी की बोतल, जूते और अन्य जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई। इस पूरी घटना को देखकर आसपास के लोग भावुक हो उठे और डीएसपी की सराहना करने लगे। डीएसपी ने यह भी कहा कि शिक्षा ही जीवन में बदलाव लाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि यदि बच्ची को स्कूल आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो उसके परिवहन का खर्च भी वे स्वयं वहन करेंगे। मुंगेर के यातायात डीएसपी प्रभात रंजन ने एक मानवीय पहल करते हुए मजदूर की दो वर्षीय बेटी गुंजा कुमारी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है। ईद के दिन डीएसपी ने ड्यूटी के दौरान बच्ची को देखा और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति जानने के बाद यह कदम उठाया। बच्ची को बिस्किट देकर पास बुलाया यह घटना शनिवार सुबह कोतवाली चौक पर हुई, जब डीएसपी प्रभात रंजन अपनी ड्यूटी पर थे। उन्होंने देखा कि लगभग दो साल की एक बच्ची उन्हें लगातार देख रही थी। यह बच्ची किला परिसर निवासी मजदूर श्रवण मांझी की बेटी गुंजा कुमारी थी। डीएसपी ने बच्ची की मासूमियत से प्रभावित होकर अपने अंगरक्षक से उसके लिए बिस्किट मंगवाए और उसे अपने पास बुलाया। बच्ची के साथ उसकी मां दुर्गा देवी और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। डीएसपी ने परिजनों से बच्ची की पढ़ाई के बारे में पूछा। परिवार ने अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बताया कि वे बच्ची को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल है। इसके बाद डीएसपी ने परिवार को उसी दिन सुबह 11 बजे मिलने के लिए बुलाया। ईद की छुट्टी के बावजूद खुलवाया स्कूल निर्धारित समय पर परिवार कोतवाली चौक पहुंचा, जहां से डीएसपी उन्हें अपने सरकारी वाहन में बिठाकर कर्णाक मोड़ स्थित एक निजी प्ले स्कूल ले गए। ईद की छुट्टी होने के कारण स्कूल बंद था, लेकिन डीएसपी ने विद्यालय के डायरेक्टर को बुलाकर स्कूल खुलवाया और गुंजा के नामांकन की प्रक्रिया शुरू करवाई। जब परिजनों ने फीस भरने में असमर्थता व्यक्त की, तो डीएसपी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह गुंजा की पूरी पढ़ाई का खर्च स्वयं उठाएंगे। उन्होंने तत्काल 2100 रुपये का भुगतान कर नामांकन, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की। डीएसपी ने यह भी आश्वासन दिया कि अगले कुछ दिनों में छह महीने की फीस भी जमा कर दी जाएगी, ताकि बच्ची की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। स्कूल बैग, पानी की बोतल, जूते दिलाए इतना ही नहीं, डीएसपी ने अपने खर्च से बच्ची के लिए स्कूल बैग, पानी की बोतल, जूते और अन्य जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई। इस पूरी घटना को देखकर आसपास के लोग भावुक हो उठे और डीएसपी की सराहना करने लगे। डीएसपी ने यह भी कहा कि शिक्षा ही जीवन में बदलाव लाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि यदि बच्ची को स्कूल आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो उसके परिवहन का खर्च भी वे स्वयं वहन करेंगे।  

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