आंधी-बारिश से गेहूं, मकई सहित रबी की फसलें खराब:मधेपुरा में खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बिछ गईं

आंधी-बारिश से गेहूं, मकई सहित रबी की फसलें खराब:मधेपुरा में खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बिछ गईं

मधेपुरा में शुक्रवार शाम आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा से किसानों की कमर टूट गई है, जिससे सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं, मकई सहित रबी की फसलें व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं। तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बिछ गईं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई। खासकर मकई और गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, कई जगहों पर फसल के बचने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। इस आपदा ने किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। आंधी-तूफान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है। मुरलीगंज के तमौट परसा गांव के किसान चुन्ना सिंह, लक्ष्मण महतो, अरुण महतो, संजय सिंह, राजन सिंह, डब्लू सिंह और कविता देवी ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन आंधी-तूफान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। मकई और गेहूं की पूरी फसल नष्ट हो गई वहीं, मधेपुरा प्रखंड के महेशुआ गांव के किसान मो. शाहनवाज आलम ने कहा कि उनकी मकई और गेहूं की पूरी फसल नष्ट हो गई है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अब पूरे साल जीवनयापन कैसे होगा, यह सबसे बड़ी समस्या बन गई है। प्रभावित किसानों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई उनके बस की बात नहीं है। किसानों ने प्रशासन और राज्य सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों ने आग्रह किया है कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि वास्तविक क्षति का आकलन हो सके और उन्हें उचित मुआवजा मिल सके। आपदा राहत कोष से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग साथ ही किसानों ने आपदा राहत कोष से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर मदद नहीं मिली, तो उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है और किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी परेशानी को समझते हुए जल्द राहत पहुंचाएगी। मधेपुरा में शुक्रवार शाम आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा से किसानों की कमर टूट गई है, जिससे सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं, मकई सहित रबी की फसलें व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं। तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बिछ गईं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई। खासकर मकई और गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, कई जगहों पर फसल के बचने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। इस आपदा ने किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। आंधी-तूफान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है। मुरलीगंज के तमौट परसा गांव के किसान चुन्ना सिंह, लक्ष्मण महतो, अरुण महतो, संजय सिंह, राजन सिंह, डब्लू सिंह और कविता देवी ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन आंधी-तूफान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। मकई और गेहूं की पूरी फसल नष्ट हो गई वहीं, मधेपुरा प्रखंड के महेशुआ गांव के किसान मो. शाहनवाज आलम ने कहा कि उनकी मकई और गेहूं की पूरी फसल नष्ट हो गई है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अब पूरे साल जीवनयापन कैसे होगा, यह सबसे बड़ी समस्या बन गई है। प्रभावित किसानों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई उनके बस की बात नहीं है। किसानों ने प्रशासन और राज्य सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों ने आग्रह किया है कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि वास्तविक क्षति का आकलन हो सके और उन्हें उचित मुआवजा मिल सके। आपदा राहत कोष से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग साथ ही किसानों ने आपदा राहत कोष से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर मदद नहीं मिली, तो उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है और किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी परेशानी को समझते हुए जल्द राहत पहुंचाएगी।  

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