आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ा दी है। इकाई ने एक अधीक्षक के नेतृत्व में 5 सदस्यीय विशेष निगरानी टीम का गठन किया है, जो पूरे राज्य से मिलने वाली शिकायतों की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। विशेष टीम करेगी निगरानी पटना स्थित पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान ईओयू के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार ने बताया कि, टेंडर आमंत्रण, आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को देखते हुए त्वरित और प्रभावी जांच के लिए यह टीम बनाई गई है। यह टीम पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में कार्य करेगी, जिसमें एक डीएसपी और पुलिस निरीक्षक रैंक के अधिकारी शामिल होंगे। इस टीम का मुख्य उद्देश्य शिकायतों का सत्यापन करना, अनियमितताओं की पुष्टि होने पर विधिसम्मत कार्रवाई करना और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता के साथ निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।’ NBPDCL इंजीनियर पर DA केस ईओयू ने नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के खिलाफ 16 मार्च 2026 को आय से अधिक संपत्ति (DA) का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से 62.66% अधिक संपत्ति अर्जित की है। जांच में जमीन, आभूषण और बैंक खातों से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। FIR में दर्ज संपत्तियों के अलावा 4-5 अन्य जमीन के कागजात भी मिले हैं, जिनकी जांच जारी है। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ संपत्तियां नेपाल में रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई हैं। इस अंतरराष्ट्रीय पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। 21 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED को सौंपा ईओयू ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दो बड़े मामलों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दिया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया गया है। ईओयू के मुताबिक, इन मामलों में करीब 21 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। संबंधित सभी दस्तावेज और सूचनाएं ED को उपलब्ध करा दी गई है। फिलहाल, इन मामलों की जांच ED कर रही है। अवैध खनन में 350 करोड़ का नुकसान, 62 केस की निगरानी राज्य में अवैध खनन के मामलों में भी ईओयू ने सख्त रुख अपनाया है। खनन एवं भू-विज्ञान विभाग को लगभग 350 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े 62 एफआईआर की निगरानी की जा रही है। जांच में सामने आया है कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के कुछ अधिकारियों ने 17 जिलों में लाइसेंस धारकों के साथ मिलकर खनन पोर्टल में तकनीकी छेड़छाड़ की, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ। ईओयू सभी 62 मामलों पर नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर ईओयू की यह पहल सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। टेंडर प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी पर नजर रखने के लिए बनाई गई विशेष टीम आने वाले समय में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ा दी है। इकाई ने एक अधीक्षक के नेतृत्व में 5 सदस्यीय विशेष निगरानी टीम का गठन किया है, जो पूरे राज्य से मिलने वाली शिकायतों की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। विशेष टीम करेगी निगरानी पटना स्थित पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान ईओयू के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार ने बताया कि, टेंडर आमंत्रण, आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को देखते हुए त्वरित और प्रभावी जांच के लिए यह टीम बनाई गई है। यह टीम पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में कार्य करेगी, जिसमें एक डीएसपी और पुलिस निरीक्षक रैंक के अधिकारी शामिल होंगे। इस टीम का मुख्य उद्देश्य शिकायतों का सत्यापन करना, अनियमितताओं की पुष्टि होने पर विधिसम्मत कार्रवाई करना और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता के साथ निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।’ NBPDCL इंजीनियर पर DA केस ईओयू ने नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के खिलाफ 16 मार्च 2026 को आय से अधिक संपत्ति (DA) का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से 62.66% अधिक संपत्ति अर्जित की है। जांच में जमीन, आभूषण और बैंक खातों से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। FIR में दर्ज संपत्तियों के अलावा 4-5 अन्य जमीन के कागजात भी मिले हैं, जिनकी जांच जारी है। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ संपत्तियां नेपाल में रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई हैं। इस अंतरराष्ट्रीय पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। 21 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED को सौंपा ईओयू ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दो बड़े मामलों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दिया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया गया है। ईओयू के मुताबिक, इन मामलों में करीब 21 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। संबंधित सभी दस्तावेज और सूचनाएं ED को उपलब्ध करा दी गई है। फिलहाल, इन मामलों की जांच ED कर रही है। अवैध खनन में 350 करोड़ का नुकसान, 62 केस की निगरानी राज्य में अवैध खनन के मामलों में भी ईओयू ने सख्त रुख अपनाया है। खनन एवं भू-विज्ञान विभाग को लगभग 350 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े 62 एफआईआर की निगरानी की जा रही है। जांच में सामने आया है कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के कुछ अधिकारियों ने 17 जिलों में लाइसेंस धारकों के साथ मिलकर खनन पोर्टल में तकनीकी छेड़छाड़ की, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ। ईओयू सभी 62 मामलों पर नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर ईओयू की यह पहल सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। टेंडर प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी पर नजर रखने के लिए बनाई गई विशेष टीम आने वाले समय में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है।


