खान विभाग अब अवैध खनन और परिवहन पर शिकंजा कसने के लिए एआई तकनीक अपनाएगा। तय रूट से भटकने वाले वाहन तुरंत विभाग की रडार पर आ जाएंगे। टोल व चेक गेट पर भी बिना सही वजन और वैध ई-पास के बैरियर नहीं खुलेगा। इसके लिए प्रदेश स्तर पर डाटा सेंटर बनाया जाएगा, जिसका कार्यालय विद्याधर नगर में प्रस्तावित नए खनिज भवन में रहेगा। निर्माण में करीब एक से सवा साल लगने का अनुमान है, जबकि डाटा सेंटर के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है। योजना के तहत प्रदेश के करीब 2500 तुलाई कांटों को ऑटोमेटेड किया जाएगा। इनकी मॉनिटरिंग डाटा सेंटर से लेकर एसएमई ऑफिस तक लाइव हो सकेगी। अगस्त तक 125 बड़ी कंपनियों और प्रमुख खदानों से जुड़े 10 हजार वाहनों को विभागीय ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें जीपीएस के जरिए ट्रैक किया जा सकेगा। गौरतलब है कि इस पूरी व्यवस्था के लिए ओडिशा का वर्किंग मॉडल अपनाया जा रहा है। ओडिशा का वर्किंग मॉडल अपनाया ओडिशा ने अवैध बालू खनन रोकने के लिए एआई कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। ये ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन के प्रकार की पहचान कर सकते हैं। वाहनों पर आरएफआईडी टैग लगे हैं, जिन्हें चेक पोस्ट पर लगे रीडर्स बिना गाड़ी रोके स्कैन कर लेते हैं व डाटा मिलान करते हैं। वजन का डाटा सीधे सर्वर पर जाएगा वाहनों के लिए मार्ग पहले से निर्धारित होंगे। कोई वाहन तय रास्ते से भटकेगा या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाता है, तो सिस्टम केंद्रीय कमांड सेंटर को अलर्ट भेजेगा। प्रदेश को ई-रवन्ना के फर्जीवाड़े से सालाना 100 करोड़ से अधिक का नुकसान प्रदेश में ई-रवन्ना और पास 700 किमी दूर तक के बन रहे हैं। एक सरकारी अनुमान के मुताबिक, इससे खान विभाग को सालाना 100 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान होता है। कई मामलों में बजरी की लीजों के पास तुलाई कांटों पर एक वाहन खड़ा करके कई रवन्ने काटे गए। ऐसे होगा काम विशेष पोर्टल के जरिए निगरानी होगी। यह पोर्टल उत्पादन से लेकर परिवहन तक के हर चरण को डिजिटल रूप से जोड़ता है।


