Ahmedabad. शहर क्राइम ब्रांच की ओर से गुरुवार को 2.38 करोड़ रुपए के 500 दर के जाली नोट के साथ अहमदाबाद, सूरत से गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों के पास अभी चाइना से मंगाया गया इतना विशेष पेपर था कि ये उससे 500 के दर के 5600 और जाली नोट छापने वाले थे। आरोपियों ने चीन से ऑनलाइन ऑर्डर करके इस विशेष कागज को मंगाया था
। इस कागज की विशेषता यह है कि इसमें भारतीय नोट के करीब 50 फीसदी साइलेंट फीचर पहले से ही मौजूद हैं। जिसमें सबसे अहम सिक्युरिटी थ्रेड (सुरक्षा धागा), भी इस कागज में है। अंग्रेजी में लिखा आरबीआइ और भारत भी इसमें मौजूद है। यही वजह है कि यह जाली नोट यदि आपके हाथ में आ भी जाए तो उसे जल्दी पहचानना मुश्किल है, जिसके चलते आरोपियों ने बाजार में 10 लाख रुपए के जाली नोट भुना भी लिए थे। इससे इनका हौंसला बढ़ गया जिससे इन्होंने बड़ी संख्या में नोट को छापना शुरू कर दिया। इन नोट के सीरियल नंबर भी अलग-अलग हैं।
एक ही प्रिंटर और कटर से करते थे छपाई
जाली नोट के बारे में किसी को पता नहीं चले इसलिए मुख्य आरोपी मुकेश ठुमर साथियों के साथ सूरत स्थित उसके घर में एक ही हाई क्लाविटी के प्रिंटर और कटर से इसे छापते थे। एक पेपर में तीन नोट को तैयार करते थे। योग गुरु प्रदीप के सूरत स्थित आश्रम में इसका षडयंत्र रचा गया था। आरोपी जब सूरत से अहमदाबाद 2.10 करोड़ के जाली नोट की खेप पहुंचाने आए थे तो वो भी साथ आया था। इन नोटों के जरिए वह आश्रम का विकास करना चाहता था।
विदेश से आने वाले पार्सलों की सुरक्षा, जांच पर सवाल
इस मामले ने विदेश से आने वाले पार्सलों में घोषित की गई वस्तु है या नहीं इस संबंध में की जाने वाली जांच पर सवाल खड़े किए हैं। स्टेशनरी का सामान बताकर आरोपी देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले पहले से ही 50 फीसदी सिक्युरिटी फीचर वाले कागज चीन से मंगा रहे थे। ये देश में आ गए, किसी को भनक भी नहीं लगी।
सात आरोपियों का 30 मार्च तक का रिमांड मंजूर
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सभी 7 आरोपियों को शुक्रवार को अहमदाबाद स्थित मेट्रोपोलिटन अदालत में पेश किया। अहमदाबाद स्थित अदालत ने आरोपियों का 30 जनवरी तक का डिमांड मंजूर किया है। जब्त जाली नोटों को आगे की जांच के लिए नागपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाएगा। पुलिस ने आरोपियों से लैपटॉप, कलर प्रिंटर, पेपर कटर, नोट छापने का कागज और अधछपे नकली नोट जब्त किए हैं। जांच में पता चला है कि प्रदीप गुरु और मुकेश 10 वर्षों से संपर्क में थे। आरोपी पूछताछ में पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनके बैंक खातों, आय के स्रोत और संभावित अवैध संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।


