फल्गु के रबर डैम से ट्रॉली बैग में कारतूस बरामद:तीन महीने पहले चोरी हो गई थी, सफाई के समय मिली रिटायर्ड अधिकारी की बैग

फल्गु के रबर डैम से ट्रॉली बैग में कारतूस बरामद:तीन महीने पहले चोरी हो गई थी, सफाई के समय मिली रिटायर्ड अधिकारी की बैग

गयाजी के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में फल्गु नदी के रबर डैम से एक ट्रॉली बैग मिलने के बाद हड़कंप मच गया। डैम की सफाई चल रही थी। इसी दौरान पानी के बीच से बैग बरामद हुआ। जब बैग खोला गया तो अंदर से .315 बोर के 8 जिंदा कारतूस मिले। इससे मौके पर मौजूद लोगों के बीच दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बैग और कारतूस को कब्जे में लिया गया। जांच शुरू हुई तो मामला और दिलचस्प हो गया। बैग के अंदर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और असलहे का लाइसेंस भी मिला। यहीं से पुलिस को पहली ठोस कड़ी मिली। मुफस्सिल इंस्पेक्टर सुनील कुमार द्विवेदी के मुताबिक, लाइसेंस पर दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। फोन उठाने वाले ने जो कहानी बताई, उसने पूरा मामला पलट दिया। फोन नंबर यूपी के बुंदेलखंड निवासी सुधीश कुमार का निकला। उसने खुद को रिटायर्ड आर्मी जवान बताया। चोरी हो गया था ट्रॉली बैग सुधीश ने पुलिस को बताया कि वह दिसंबर 2025 में गयाजी आया था। मकसद था कि निजी गार्ड की नौकरी तलाशना। लेकिन सैलरी पर बात नहीं बनी। इसके बाद 10 दिसंबर की रात वह मगध मेडिकल इलाके से स्टेशन के लिए निकला। रात करीब 8 बजे की बात है। रास्ते में उसे नींद आ गई। जब आंख खुली तो ट्रॉली बैग गायब था। ट्राली बैग ऑटो के पिछले हिस्से में रखा था। सुधीश ने उसी रात मगध मेडिकल थाना में चोरी का केस दर्ज कराया था। काफी तलाश की, लेकिन बैग का कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार वह वापस यूपी लौट गया। अब तीन महीने बाद उसका बैग फल्गु नदी के रबर डैम से बरामद हुआ है। पुलिस का मानना है कि चोरी के बाद बैग को छिपाने के इरादे से नदी में फेंका गया होगा। मुफस्सिल पुलिस ने बरामद बैग और सामान को मगध मेडिकल थाना को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस हर एंगल से पड़ताल कर रही है। गयाजी के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में फल्गु नदी के रबर डैम से एक ट्रॉली बैग मिलने के बाद हड़कंप मच गया। डैम की सफाई चल रही थी। इसी दौरान पानी के बीच से बैग बरामद हुआ। जब बैग खोला गया तो अंदर से .315 बोर के 8 जिंदा कारतूस मिले। इससे मौके पर मौजूद लोगों के बीच दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बैग और कारतूस को कब्जे में लिया गया। जांच शुरू हुई तो मामला और दिलचस्प हो गया। बैग के अंदर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और असलहे का लाइसेंस भी मिला। यहीं से पुलिस को पहली ठोस कड़ी मिली। मुफस्सिल इंस्पेक्टर सुनील कुमार द्विवेदी के मुताबिक, लाइसेंस पर दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। फोन उठाने वाले ने जो कहानी बताई, उसने पूरा मामला पलट दिया। फोन नंबर यूपी के बुंदेलखंड निवासी सुधीश कुमार का निकला। उसने खुद को रिटायर्ड आर्मी जवान बताया। चोरी हो गया था ट्रॉली बैग सुधीश ने पुलिस को बताया कि वह दिसंबर 2025 में गयाजी आया था। मकसद था कि निजी गार्ड की नौकरी तलाशना। लेकिन सैलरी पर बात नहीं बनी। इसके बाद 10 दिसंबर की रात वह मगध मेडिकल इलाके से स्टेशन के लिए निकला। रात करीब 8 बजे की बात है। रास्ते में उसे नींद आ गई। जब आंख खुली तो ट्रॉली बैग गायब था। ट्राली बैग ऑटो के पिछले हिस्से में रखा था। सुधीश ने उसी रात मगध मेडिकल थाना में चोरी का केस दर्ज कराया था। काफी तलाश की, लेकिन बैग का कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार वह वापस यूपी लौट गया। अब तीन महीने बाद उसका बैग फल्गु नदी के रबर डैम से बरामद हुआ है। पुलिस का मानना है कि चोरी के बाद बैग को छिपाने के इरादे से नदी में फेंका गया होगा। मुफस्सिल पुलिस ने बरामद बैग और सामान को मगध मेडिकल थाना को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस हर एंगल से पड़ताल कर रही है।  

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