भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में बिहार ‘फोकस स्टेट’ के रूप में शामिल हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित इस वैश्विक कार्यक्रम में बिहार ने अपनी उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया और वैश्विक निवेशकों व उद्योगपतियों के साथ संवाद किया। समिट में बिहार पैवेलियन चर्चा का केंद्र बना रहा, जहां बड़ी संख्या में आगंतुकों और प्रतिनिधियों ने राज्य की ऊर्जा पहलों को करीब से समझा। बीएसपीएचसीएल की टीम ने निवेशकों से बातचीत कर भविष्य की परियोजनाओं पर चर्चा की। समिट के दौरान बिहार ने अपने ऊर्जा क्षेत्र के विजन को भी मजबूती से पेश किया। पीरपैंती की लगभग 30,000 करोड़ रुपए की परियोजना और कजरा की सौर व बैटरी स्टोरेज परियोजना को प्रमुख पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत राज्य ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 6.1 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ट्रांसमिशन शुल्क में छूट, ऊर्जा बैंकिंग, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और कार्बन क्रेडिट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। 2.2 करोड़ उपभोक्ता, 87 लाख प्रीपेड मीटर ऊर्जा सेवाओं के डिजिटलीकरण में बिहार ने तेजी से काम किया है। अब तक 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में टीबीसीबी मोड में 81,000 करोड़ रुपए के निवेश से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की योजना बनाई है। इसमें 38,950 करोड़ रुपए पावर जेनरेशन, 16,194 करोड़ रुपए ट्रांसमिशन और 22,951 करोड़ रुपए वितरण प्रणाली को मजबूत करने में खर्च किए जाएंगे। वहीं, मेंटेनेंस और रख-रखाव पर 3,346 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पिछले 20 वर्षों में बिहार के बिजली क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है। वर्ष 2005 में जहां राज्य को 700 मेगावाट से भी कम बिजली मिलती थी, वहीं आज 8,700 मेगावाट से अधिक की मांग पूरी की जा रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। राज्य में 2.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं और बिजली अब हर गांव व घर तक पहुंच चुकी है, जिससे विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में बिहार ‘फोकस स्टेट’ के रूप में शामिल हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित इस वैश्विक कार्यक्रम में बिहार ने अपनी उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया और वैश्विक निवेशकों व उद्योगपतियों के साथ संवाद किया। समिट में बिहार पैवेलियन चर्चा का केंद्र बना रहा, जहां बड़ी संख्या में आगंतुकों और प्रतिनिधियों ने राज्य की ऊर्जा पहलों को करीब से समझा। बीएसपीएचसीएल की टीम ने निवेशकों से बातचीत कर भविष्य की परियोजनाओं पर चर्चा की। समिट के दौरान बिहार ने अपने ऊर्जा क्षेत्र के विजन को भी मजबूती से पेश किया। पीरपैंती की लगभग 30,000 करोड़ रुपए की परियोजना और कजरा की सौर व बैटरी स्टोरेज परियोजना को प्रमुख पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत राज्य ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 6.1 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ट्रांसमिशन शुल्क में छूट, ऊर्जा बैंकिंग, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और कार्बन क्रेडिट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। 2.2 करोड़ उपभोक्ता, 87 लाख प्रीपेड मीटर ऊर्जा सेवाओं के डिजिटलीकरण में बिहार ने तेजी से काम किया है। अब तक 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में टीबीसीबी मोड में 81,000 करोड़ रुपए के निवेश से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की योजना बनाई है। इसमें 38,950 करोड़ रुपए पावर जेनरेशन, 16,194 करोड़ रुपए ट्रांसमिशन और 22,951 करोड़ रुपए वितरण प्रणाली को मजबूत करने में खर्च किए जाएंगे। वहीं, मेंटेनेंस और रख-रखाव पर 3,346 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पिछले 20 वर्षों में बिहार के बिजली क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है। वर्ष 2005 में जहां राज्य को 700 मेगावाट से भी कम बिजली मिलती थी, वहीं आज 8,700 मेगावाट से अधिक की मांग पूरी की जा रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। राज्य में 2.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं और बिजली अब हर गांव व घर तक पहुंच चुकी है, जिससे विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।


