संतकबीर नगर जिले में सफाई कर्मचारियों ने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विकास भवन कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन डीपीआरओ कार्यालय के एक बाबू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के एक दिन बाद हुआ। जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन टीम ने 18 मार्च 2026 को डीपीआरओ कार्यालय में तैनात बाबू राजन कुमार को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। कर्मचारियों का आरोप है कि राजन कुमार को प्रभारी अपर जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा सफाई कर्मचारियों का पटल सौंपा गया था और वह उन्हीं के इशारे पर काम करता था। सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष परमहंस गौतम के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब से मनोज कुमार ने जिला पंचायत राज अधिकारी का पदभार संभाला है, तब से कार्यालय में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। कर्मचारियों ने मांग की कि संबद्ध ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को उनके मूल गांवों में वापस भेजा जाए, ताकि कोई अन्य कर्मचारी भ्रष्टाचार का शिकार न हो। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि प्रभारी डीपीआरओ दोपहर 3 बजे के बाद सफाई कर्मचारियों की जांच करते हैं और पंचायत भवनों या विद्यालयों में गंदगी का आरोप लगाकर विभागीय कार्रवाई की धमकी देते हैं। इसके बदले कथित तौर पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। निलंबन की धमकी देकर वसूली का आरोप कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि वे समय पर डीपीआरओ के आवास पर नहीं पहुंचते हैं, तो वेतन रोकने या निलंबन की धमकी देकर भी वसूली की जाती है। मृतक कर्मचारियों के परिजनों को नौकरी या बकाया भुगतान के लिए वर्षों तक कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते हैं, जिससे उन्हें शारीरिक, आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। सफाई कर्मचारी रमेश चंद्र, घनश्याम चौधरी, सूरज कुमार और मानसिंह यादव ने आरोप लगाया कि प्रभारी डीपीआरओ पहले से ही कई मामलों में जांच के घेरे में हैं और उनकी छवि खराब है। उनका कहना है कि वे अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बनाकर वसूली करते हैं। इस संबंध में जब डीपीआरओ मनोज कुमार से पक्ष लेने की कोशिश की गई तो कई बार कॉल करने के बावजूद उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।


