अररिया के फारबिसगंज में कार्यरत एएनएम शालिनी कुमारी साइबर ठगी का शिकार हो गईं। ठगों ने ऑनलाइन ऑर्डर रद्द होने का झांसा देकर उनके बैंक खाते से लगभग 95 हजार रुपये निकाल लिए। शालिनी कुमारी मूल रूप से मुंगेर की निवासी हैं और वर्तमान में फारबिसगंज के किरकीचिया स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर किया था सामान ऑर्डर शालिनी कुमारी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सामान ऑर्डर किया था और ऑनलाइन भुगतान भी कर दिया था। इसके बाद उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताया और कहा कि तकनीकी कारणों से उनका ऑर्डर रद्द हो गया है। उसने नया ऑर्डर देने के बहाने दोबारा भुगतान करने को कहा। जब शालिनी ने अपने पुराने भुगतान की जानकारी दी, तो ठग ने उन्हें आश्वासन दिया कि पुराना पैसा जल्द ही उनके खाते में वापस कर दिया जाएगा। इसी दौरान उसने ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) साझा करने को कहा। शालिनी कुमारी ने विश्वास करके ओटीपी बता दिया। कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से 95 हजार रुपये निकाल लिए गए। संबंधित बैंक से ट्रांजेक्शन डिटेल्स मंगवाए घटना का पता चलने पर पीड़िता ने गुरुवार को अररिया के साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संबंधित बैंक से लेनदेन का विवरण (ट्रांजेक्शन डिटेल्स) मंगवाई जा रही हैं। ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड शेयर न करें साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह ठगी का एक सामान्य तरीका है, जिसमें ठग ऑर्डर रद्द होने या रिफंड का लालच देकर ओटीपी और अन्य बैंकिंग विवरण हासिल कर लेते हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर बैंक विवरण, ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड कभी साझा न करें। ऐसे कॉल आने पर तुरंत संबंधित बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। अररिया के फारबिसगंज में कार्यरत एएनएम शालिनी कुमारी साइबर ठगी का शिकार हो गईं। ठगों ने ऑनलाइन ऑर्डर रद्द होने का झांसा देकर उनके बैंक खाते से लगभग 95 हजार रुपये निकाल लिए। शालिनी कुमारी मूल रूप से मुंगेर की निवासी हैं और वर्तमान में फारबिसगंज के किरकीचिया स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर किया था सामान ऑर्डर शालिनी कुमारी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सामान ऑर्डर किया था और ऑनलाइन भुगतान भी कर दिया था। इसके बाद उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताया और कहा कि तकनीकी कारणों से उनका ऑर्डर रद्द हो गया है। उसने नया ऑर्डर देने के बहाने दोबारा भुगतान करने को कहा। जब शालिनी ने अपने पुराने भुगतान की जानकारी दी, तो ठग ने उन्हें आश्वासन दिया कि पुराना पैसा जल्द ही उनके खाते में वापस कर दिया जाएगा। इसी दौरान उसने ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) साझा करने को कहा। शालिनी कुमारी ने विश्वास करके ओटीपी बता दिया। कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से 95 हजार रुपये निकाल लिए गए। संबंधित बैंक से ट्रांजेक्शन डिटेल्स मंगवाए घटना का पता चलने पर पीड़िता ने गुरुवार को अररिया के साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संबंधित बैंक से लेनदेन का विवरण (ट्रांजेक्शन डिटेल्स) मंगवाई जा रही हैं। ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड शेयर न करें साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह ठगी का एक सामान्य तरीका है, जिसमें ठग ऑर्डर रद्द होने या रिफंड का लालच देकर ओटीपी और अन्य बैंकिंग विवरण हासिल कर लेते हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर बैंक विवरण, ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड कभी साझा न करें। ऐसे कॉल आने पर तुरंत संबंधित बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।


