Gangaur Festival: जयपुर. राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराओं और लोक आस्था के प्रमुख पर्व गणगौर के अवसर पर राज्य सरकार ने जयपुर शहर में आधे दिन का अवकाश घोषित किया है। यह अवकाश 21 मार्च (शनिवार) को दोपहर 1:30 बजे से प्रभावी रहेगा। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
संयुक्त शासन सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग दाताराम ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अवकाश जयपुर शहर स्थित राज्य सरकार के सभी कार्यालयों, राजकीय उपक्रमों और शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। निर्णय का उद्देश्य गणगौर मेले और उससे जुड़े पारंपरिक आयोजनों में आमजन और सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि गणगौर राजस्थान का एक प्रमुख लोक पर्व है, जिसे विशेष रूप से महिलाएं बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है तथा सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगलकामना की जाती है। जयपुर में इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य, सजी-धजी झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होती हैं।
सरकार के इस निर्णय से शहर में आयोजित होने वाले गणगौर मेले में अधिक संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। आधे दिन के अवकाश से कर्मचारी और विद्यार्थी मेले की रौनक का आनंद ले सकेंगे तथा पारंपरिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले पाएंगे।
प्रशासन द्वारा मेले के दौरान सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। पुलिस और नगर निगम की टीमें मिलकर शहर में सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
इस निर्णय को आमजन ने सकारात्मक रूप से लिया है और इसे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया है। गणगौर मेले के इस विशेष अवसर पर जयपुर शहर एक बार फिर पारंपरिक रंगों और उल्लास से सराबोर नजर आएगा।
उल्लेखनीय है कि इस बार 21 मार्च को शनिवार है। ऐसे में अधिकांश सरकारी कार्यालय में अवकाश रहता है। इसके अलावा 21 मार्च को ईदुल—फितुर का पूर्व में ही अवकाश घोषित है। इस कारण सरकारी कार्यालयों में को इस बार पूरे दिन का अवकाश मिलेगा।
राज्य सरकार का एक सराहनीय कदम
गणगौर मेले के अवसर पर जयपुर में आधे दिन का अवकाश घोषित करना राज्य सरकार का एक सराहनीय कदम है। यह निर्णय न केवल सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देता है, बल्कि लोगों को अपने परिवार और समाज के साथ इस महत्वपूर्ण पर्व को मनाने का अवसर भी प्रदान करता है। गणगौर जैसे लोक उत्सव राजस्थान की पहचान हैं, जिनमें जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आधे दिन की छुट्टी से कर्मचारी और विद्यार्थी मेले की रौनक का आनंद ले सकेंगे। ऐसे फैसले हमारी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने और सामाजिक एकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


