आस्था, उल्लास और शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही घरों और मंदिरों में माता के जयकारे गूंजने लगेंगे। 18 मार्च को जहां ‘पितृ कार्य अमावस्या’ मनाई गई है, वहीं 19 मार्च को देवकार्य अमावस्या के साथ चैत्र नवरात्र की घट स्थापना होगी। खास बात यह है कि इसी पावन दिन पर गौतम जयंती भी मनाई जाएगी।
घट स्थापना व कलश पूजन के शुभ मुहूर्त
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना (घट स्थापना) का विशेष विधान है। सही मुहूर्त में की गई कलश स्थापना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस दिन शुभ मुहूर्त दोपहर से शाम तक रहेगा। सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 बजे से 1:10 बजे तक। घट स्थापना के लिए इसे सबसे उत्तम समय माना गया है। नवरात्र महोत्सव को लेकर शहर के प्रमुख माता मंदिरों में रंग-रोगन और विशेष सजावट का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। साथ ही बाजारों में भी पूजा सामग्री, चुनरी और कलश की खरीदारी के लिए रौनक देखने को मिल रही है।
शहर के सभी मंदिरों में होगी पूजा अराधना
शहर के चामुडा माता मंदिर, रोडवेज बस स्टैंड परिसर स्थित दुर्गा माता का मंदिर, वन विभाग के पास स्थित दुर्गा माता मंदिर, पुलिस लाइन स्थित संतोषीमाता का मंदिर, बाबाधाम, हरणी महादेव की पहाड़ी स्थित मंदिर समेत चित्तौड़गढ़ किला व झांतला माता मंदिर में दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रहेगी। घट स्थापना के बाद दिनभर मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहेगी।
झिलमिलायाबाबाधाम शक्तिपीठ
शहर के प्रमुख आस्था केंद्र बाबाधाम शक्तिपीठ पर नवरात्र महोत्सव को लेकर व्यापक तैयारियां कर ली गई हैं। इस अवसर पर पूरे शक्तिपीठ परिसर को मनोरम लाइटों, रंग-बिरंगी झिलमिलाती फरियों, झंडियों, चुनर और सुंगधित फूलों से सजाया गया है।
बाबाधाम के अध्यक्ष विनीत अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार को शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ही नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ होगा। गुरुवार सुबह 11:15 बजे पंडित गोविंद गौतम और अन्य पंडितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण व पूरे विधि-विधान के साथ हवन-पूजन शुरू होगा। इसके पश्चात दोपहर 12:15 बजे शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी। नवरात्र महोत्सव के दौरान शक्तिपीठ पर नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान चलेंगे। प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे मंगला आरती होगी, जिसके बाद सुबह 9:15 बजे से हवन-पूजन कर आहुतियां दी जाएंगी। शाम के समय 7:15 बजे संध्या आरती का आयोजन होगा। आरती के पश्चात भक्तों को माता के आशीर्वाद स्वरूप मेहंदी का वितरण किया जाएगा, जिसके लिए महिलाओं की विशेष कतारें लगेंगी। इस दौरान एक विशेष आस्था के तहत निःसंतान दंपतियों (पति-पत्नी) की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने के लिए गोद भराई की रस्म भी की जाएगी।


