पिछले साल नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) का टारगेट पूरा करने वाला नगर निगम इस वित्तीय वर्ष में पिछड़ता नजर आ रहा है। निगम को साल 2025-26 में 20 करोड़ टैक्स जमा करना है, लेकिन वह पूरे साल में अब तक 15.02 करोड़ रुपए ही वसूल पाया है। अब 12 दिन में 4.98 करोड़ वसूलना चुनौती होगा। ऐसे में निगम के हाथ से सरकार से मिलने वाली ग्रांट भी फिसलती नजर आ रही है। निगम ने 5 हजार 369 संपत्तियों से 15.02 करोड़ रुपए टैक्स वसूला है। जबकि, निगम क्षेत्र में 30 हजार कर योग्य संपत्तियां हैं। इनका 2 अरब 16 करोड़, 85 लाख 47 हजार 275 रुपए टैक्स बनता है। बता दें कि पिछले साल निगम ने 17 करोड़ के टारगेट को पूरा करते हुए 9.88 प्रतिशत ज्यादा 18.68 करोड़ हासिल कर लिए थे। 10-20 लाख टैक्स वाली संपत्तियां ही बचीं यूडी टैक्स साल 2007 से लागू होता है। पिछले साल तक निगम ने 60-70 लाख से 1 करोड़ रुपए तक बकाया यूडी टैक्स वाली संपत्तियों से राशि वसूल कर ली थी। इससे टैक्स का टारगेट भी पूरा कर लिया था। इस साल 10-20 लाख रुपए यूडी टैक्स वाली संपत्तियां ही बची हैं। ऐसे में इन्हें सीज कर वसूली करने पर भी टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा है। बड़ी राशि होने पर टारगेट जल्दी पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा शहर की 42 सरकारी संपत्तियां भी टैक्स नहीं चुका रही हैं। इनका भी 3.65 करोड़ रुपए बकाया है। इनके टैक्स चुकाने पर निगम पर सिर्फ 1.33 करोड़ का ही बोझ रहेगा।


