प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया हैं। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी हैं। याचिका में कहा गया है कि सरकार और आयोग जानबूझकर चुनाव टाल रहे है। जो हाईकोर्ट के आदेश की सीधे तौर पर अवमानना हैं। याचिका में राज्य चुनाव आयोग द्वारा निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण कार्यक्रम को आधार बनाते हुए कहा गया है कि चुनाव आयोग ने चरणबद्ध तरीके से 22 अप्रैल तक फाइनल मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम तय किया गया है। ऐसे में साफ है कि निकाय चुनाव किसी भी हाल में हाईकोर्ट द्वारा तय 15 अप्रेल की समय सीमा में पूरे नहीं हो सकते हैं। सरकार और आयोग को भेजा था लीगल नोटिस
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट मे अवमानना याचिका दायर करने से पहले राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को अधिवक्ता पुनीत सिंघवी के जरिए लीगल नोटिस भेजकर पुनरीक्षण कार्यक्रम को रिवाइज करने का अनुरोध किया था। उन्होंने आयोग से अपील की थी कि वह मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम रिवाइज करें और 15 अप्रैल के हिसाब से इसे फिर से जारी करें। ऐसा नहीं करने पर वे हाईकोर्ट में राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के लिए अवमानना याचिका दायर की जाएगी। कोर्ट ने दिए थे 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। वहीं सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के समय कोर्ट ने भी राज्य में 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिए कहा था।


