सीमावर्ती जिले जैसलमेर में एक बार फिर कुदरत किसानों के इम्तिहान की तैयारी में है। पिछले दो दिनों से आसमान में छाए काले बादलों और ठंडी हवाओं ने गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन किसानों की धड़कनें तेज कर दी हैं। जिले किसानों की करीब 32 लाख क्विंटल फसल इस वक्त खेतों में खुले आसमान के नीचे पड़ी है। यदि तेज आंधी के साथ बारिश या ओलावृष्टि होती है, तो करोड़ों रुपये की यह ‘गाढ़ी कमाई’ मिट्टी में मिल सकती है। मौसम विभाग ने जिले में बुधवार के लिए येलो अलर्ट और गुरुवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आगामी 48 घंटों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने, मेघगर्जन और वज्रपात की प्रबल आशंका जताई गई है। 32 लाख क्विंटल ‘सोना’ खुले में वर्तमान में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रबी फसल की कटाई और थ्रेसिंग का काम चरम पर है। कृषि विभाग के अनुसार, इस सीजन में करीब 11 लाख क्विंटल जीरा, 8 लाख क्विंटल सरसों और 13 लाख क्विंटल चने की बंपर पैदावार का अनुमान है। यानी करीब 32 लाख क्विंटल फसल इस वक्त खेतों में खुले आसमान के नीचे पड़ी है। यदि तेज आंधी के साथ बारिश या ओलावृष्टि होती है, तो करोड़ों रुपये की यह ‘गाढ़ी कमाई’ मिट्टी में मिल सकती है। जीरे की फसल पर सबसे बड़ा खतरा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जे.आर. भाखर ने बताया कि जीरा वजन में बेहद हल्का होता है। 50 किमी की रफ्तार वाली आंधी में जीरे के ढेर तिनकों की तरह उड़ सकते हैं। साथ ही, बारिश से दाना काला पड़ने का डर है, जिससे बाजार में उचित दाम नहीं मिलेगा। प्रशासन की सलाह डॉ. भाखर ने सोशल मीडिया और फील्ड स्टाफ के जरिए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों से अपील की गई है कि वे कटी हुई फसल को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं या तिरपाल से मजबूती से ढंककर रखें। ग्रामीण इलाकों में फिलहाल थ्रेसर से फसल निकालने की होड़ मची हुई है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ का असर मंगलवार सुबह से ही दिखने लगा है।


