पीलीभीत में करोड़ों रुपए के गबन मामले में लिपिक निलंबित:मुख्य आरोपी की मदद करने का आरोप, 35 संदिग्ध बैंक खातों का पता चला

पीलीभीत में करोड़ों रुपए के गबन मामले में लिपिक निलंबित:मुख्य आरोपी की मदद करने का आरोप, 35 संदिग्ध बैंक खातों का पता चला

पीलीभीत जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में हुए करोड़ों रुपये के गबन मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने वेतन बिल पटल के लिपिक विमल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम शम्सी की मदद करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि 2015 में चपरासी के पद पर तैनात हुए इल्हाम शम्सी ने सिस्टम में अपनी पैठ बनाई। उसने 2019 से सरकारी धन की हेराफेरी शुरू कर दी। इल्हाम ने लिपिक विमल कुमार की आईडी का अवैध उपयोग कर विभाग के खातों से करोड़ों रुपये निकालकर अपने रिश्तेदारों और करीबियों के खातों में ट्रांसफर किए। अब तक की जांच में लगभग 35 संदिग्ध बैंक खातों का पता चला है। इल्हाम ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के खाते में एक करोड़ रुपये भेजे। इसके अलावा, बुलंदशहर निवासी रिश्तेदार फहद खान के खाते में 42 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। जांच में मणिपुर की एक महिला के खाते में भी धन भेजने के संकेत मिले हैं। तीन अन्य खातों में 50-50 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने की पुष्टि हुई है। आरोपी ने गबन की गई राशि का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में निवेश किया था। मामले का खुलासा बैंक की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी द्वारा जांच बैठाने के बाद हुआ। कुल 98 ट्रांजैक्शन के जरिए सरकारी धन की हेराफेरी की गई। पुलिस ने इल्हाम की पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी अभी भी फरार है। पुलिस की चार टीमें इल्हाम शम्सी की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि शासन स्तर पर गठित जांच कमेटी मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। विमल कुमार के निलंबन के बाद अब 2019 से तैनात रहे अन्य अधिकारियों और कोषागार कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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