मोहाली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने रेप के मामले में आरोपी पति को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने लगभग तीन साल की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। जानकारी के अनुसार, मोहाली की एक युवती ने वर्ष 2023 में हरियाणा निवासी अपने पति के विरुद्ध वूमन सेल थाने में रेप और मारपीट का मामला दर्ज कराया था। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि पति ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे। दोनों की मुलाकात स्नैपचैट के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद उनकी दोस्ती बढ़ी और वर्ष 2022 में उन्होंने शादी कर ली। हालांकि, शादी के बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जिसके कारण यह मामला पुलिस तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील गुरप्रीत सिंह भट्टी और राम धीमान ने कोर्ट में तर्क दिया कि शिकायतकर्ता के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं थे। उन्होंने यह भी बताया कि जांच के दौरान प्रस्तुत की गई एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) रिपोर्ट में भी आरोपी के खिलाफ रेप के आरोप की पुष्टि नहीं हुई। गवाहों के बयानों में विरोधाभास बचाव पक्ष ने अदालत में प्रस्तुत सबूतों और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास उजागर किए, जिससे शिकायतकर्ता के आरोपों पर संदेह उत्पन्न हुआ। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी किया जाता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और पुख्ता सबूतों की आवश्यकता होती है। यदि संदेह की स्थिति बनी रहती है, तो अदालत आरोपी को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी कर सकती है।


