वर्तमान समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ साइबर अपराध के मामले भी देखे जा रहे है। इसी गंभीर विषय पर आम जनता और विशेषकर युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से नालंदा साइबर थाना की टीम की ओर से इनर व्हील क्लब की मदद से एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किसान कॉलेज में किया गया। कार्यक्रम में इंस्पेक्टर कुंती कुमारी, (SI) अबू तालिब अंसारी और प्रोग्रामर इंजीनियर निखिल आनंद ने साइबर ठगी के नए और खतरनाक तरीकों का खुलासा करते हुए लोगों को सतर्क रहने की कड़ी हिदायत दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साइबर बदमाश अक्सर हमारी छोटी-छोटी जानकारियों का इस्तेमाल कर हमें अपने जाल में फंसाते हैं। ‘लॉटरी फ्रॉड’ के पीछे के पूरे तंत्र को समझाया सत्र को संबोधित करते हुए SI अबू तालिब अंसारी ने ‘लॉटरी फ्रॉड’ के पीछे के पूरे तंत्र को समझाया। उन्होंने बताया कि जब हम किसी शॉपिंग मॉल या स्टोर में अपना मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत विवरण देते हैं, तो वहां मौजूद कुछ कर्मचारी मात्र कुछ रुपयों के लालच में वह डेटा साइबर अपराधियों को बेच देते हैं। अपराधी आपको ‘लकी ड्रा’ या ‘पुरस्कार’ का झांसा देकर फोन करते हैं और डिलीवरी चार्ज या कलर चॉइस के नाम पर किश्तों में हजारों-लाखों रुपये ठग लेते हैं। उन्होंने तकनीकी सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि व्हाट्सएप की ‘ऑटो-डाउनलोड’ सेटिंग और ‘टू-स्टेप वेरिफिकेशन’ का ऑन न होना आपके लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। अपराधी अज्ञात ‘APK’ फाइल भेजकर आपके फोन का पूरा एक्सेस हासिल कर सकते हैं, जिससे बिना आपकी जानकारी के रात भर में बैंक खाता खाली हो सकता है। महिला अधिकारी कुंती कुमारी ने सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के माध्यम से होने वाली ब्लैकमेलिंग के प्रति छात्राओं और युवाओं को आगाह किया। उन्होंने बताया कि अनजान व्यक्ति के वीडियो कॉल को रिसीव करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि अपराधी आपकी वीडियो रिकॉर्ड कर उसे एडिट करते हैं और फिर सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का डर दिखाकर पैसे वसूलते हैं। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे दावों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कहा कि कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यदि किसी के साथ ऐसी घटना होती है, तो उसे डरने के बजाय तुरंत अपने अभिभावकों या पुलिस से साझा करना चाहिए। मोबाइल में अनावश्यक ऐप्स रखने से बचें। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि अपनी जन्मतिथि, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर जैसे विवरण कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति को न बताएं और मोबाइल में अनावश्यक ऐप्स रखने से बचें। यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है, तो सबसे पहले सिम कार्ड निकाल देना चाहिए ताकि डेटा का आदान-प्रदान रुक सके और तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देनी चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है। वर्तमान समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ साइबर अपराध के मामले भी देखे जा रहे है। इसी गंभीर विषय पर आम जनता और विशेषकर युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से नालंदा साइबर थाना की टीम की ओर से इनर व्हील क्लब की मदद से एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किसान कॉलेज में किया गया। कार्यक्रम में इंस्पेक्टर कुंती कुमारी, (SI) अबू तालिब अंसारी और प्रोग्रामर इंजीनियर निखिल आनंद ने साइबर ठगी के नए और खतरनाक तरीकों का खुलासा करते हुए लोगों को सतर्क रहने की कड़ी हिदायत दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साइबर बदमाश अक्सर हमारी छोटी-छोटी जानकारियों का इस्तेमाल कर हमें अपने जाल में फंसाते हैं। ‘लॉटरी फ्रॉड’ के पीछे के पूरे तंत्र को समझाया सत्र को संबोधित करते हुए SI अबू तालिब अंसारी ने ‘लॉटरी फ्रॉड’ के पीछे के पूरे तंत्र को समझाया। उन्होंने बताया कि जब हम किसी शॉपिंग मॉल या स्टोर में अपना मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत विवरण देते हैं, तो वहां मौजूद कुछ कर्मचारी मात्र कुछ रुपयों के लालच में वह डेटा साइबर अपराधियों को बेच देते हैं। अपराधी आपको ‘लकी ड्रा’ या ‘पुरस्कार’ का झांसा देकर फोन करते हैं और डिलीवरी चार्ज या कलर चॉइस के नाम पर किश्तों में हजारों-लाखों रुपये ठग लेते हैं। उन्होंने तकनीकी सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि व्हाट्सएप की ‘ऑटो-डाउनलोड’ सेटिंग और ‘टू-स्टेप वेरिफिकेशन’ का ऑन न होना आपके लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। अपराधी अज्ञात ‘APK’ फाइल भेजकर आपके फोन का पूरा एक्सेस हासिल कर सकते हैं, जिससे बिना आपकी जानकारी के रात भर में बैंक खाता खाली हो सकता है। महिला अधिकारी कुंती कुमारी ने सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के माध्यम से होने वाली ब्लैकमेलिंग के प्रति छात्राओं और युवाओं को आगाह किया। उन्होंने बताया कि अनजान व्यक्ति के वीडियो कॉल को रिसीव करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि अपराधी आपकी वीडियो रिकॉर्ड कर उसे एडिट करते हैं और फिर सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का डर दिखाकर पैसे वसूलते हैं। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे दावों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कहा कि कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यदि किसी के साथ ऐसी घटना होती है, तो उसे डरने के बजाय तुरंत अपने अभिभावकों या पुलिस से साझा करना चाहिए। मोबाइल में अनावश्यक ऐप्स रखने से बचें। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि अपनी जन्मतिथि, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर जैसे विवरण कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति को न बताएं और मोबाइल में अनावश्यक ऐप्स रखने से बचें। यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है, तो सबसे पहले सिम कार्ड निकाल देना चाहिए ताकि डेटा का आदान-प्रदान रुक सके और तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देनी चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है।


