Aplastic Anemia क्या है? यह खतरनाक बीमारी चुपचाप कर देती है खून बनना बंद

Aplastic Anemia क्या है? यह खतरनाक बीमारी चुपचाप कर देती है खून बनना बंद

Aplastic Anemia Symptoms: अधिकतर लोग एनीमिया (खून की कमी) को सिर्फ आयरन की कमी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन एक और खतरनाक प्रकार भी होता है जिसे Aplastic Anemia कहा जाता है। यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है, जिसमें शरीर का ब्लड बनाने वाला सिस्टम यानी बोन मैरो ठीक से काम करना बंद कर देता है।

Aplastic Anemia क्या है?

हमारे शरीर में बोन मैरो खून के तीन जरूरी हिस्से बनाता है। रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स। लेकिन इस बीमारी में ये तीनों ही कम बनने लगते हैं। इस वजह से शरीर में खून की कमी, इंफेक्शन का खतरा और ब्लीडिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए इसे bone marrow failure भी कहा जाता है।

किन लोगों को होता है और क्यों?

यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर युवा लोगों में ज्यादा देखी जाती है। कई बार इसका सही कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन कुछ वजहें हो सकती हैं:

  • जेनेटिक कारण
  • कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट
  • खतरनाक केमिकल (जैसे बेंजीन) का संपर्क
  • रेडिएशन
  • वायरल इंफेक्शन
  • शरीर की इम्यूनिटी का खुद ही बोन मैरो पर हमला करना

इसके लक्षण क्या हैं?

इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे नजर आते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • हमेशा थकान रहना
  • सांस फूलना
  • शरीर के अलग-अलग हिस्सों से खून आना
  • बार-बार मुंह में छाले होना
  • जल्दी-जल्दी चोट लगना या नीले निशान पड़ना
  • बार-बार बुखार या इंफेक्शन होना

अगर ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत जांच करवानी चाहिए। इसकी पुष्टि के लिए “बोन मैरो बायोप्सी” टेस्ट किया जाता है।

इलाज क्या है?

आज के समय में इसका इलाज संभव है। युवाओं के लिए सबसे अच्छा इलाज स्टेम सेल ट्रांसप्लांट माना जाता है, जिसमें किसी मैचिंग डोनर से नई कोशिकाएं दी जाती हैं। सही समय पर इलाज हो जाए तो ठीक होने की संभावना 90% तक हो सकती है। जो मरीज ट्रांसप्लांट नहीं करा सकते, उनके लिए दवाओं के जरिए इलाज किया जाता है, जिससे बोन मैरो धीरे-धीरे रिकवर करने लगता है।

भारत में क्या है चुनौती?

भारत में इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी दिक्कत है, जागरूकता की कमी और सही इलाज तक पहुंच। कई बार मरीज समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। इसके अलावा, स्टेम सेल डोनर की भी कमी है, जिससे ट्रांसप्लांट में देरी हो जाती है।

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