Azam Abdullah Pan Card Case: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान से जुड़े पैन कार्ड मामले में सजा के खिलाफ दायर अपील पर सेशन कोर्ट में सुनवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सोमवार को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस लगभग पूरी हो गई, जिसके बाद अदालत ने अगली तारीख 23 मार्च निर्धारित कर दी है। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि अब फैसले से पहले केवल कानूनी बिंदुओं पर स्पष्टता बाकी है।
कानूनी सवालों के जवाब के बाद ही तय होगी फैसले की तारीख
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सुनवाई के दौरान उठे किसी कानूनी प्रश्न पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है, तो संबंधित पक्ष से जवाब मांगा जाएगा। इन सवालों के समाधान के बाद ही कोर्ट अंतिम निर्णय की तारीख तय करेगा। इस बयान से यह साफ हो गया है कि मामला अब पूरी तरह न्यायिक विश्लेषण के चरण में पहुंच चुका है।
17 नवंबर 2025 को हुई थी सजा, जेल में बंद हैं दोनों नेता
गौरतलब है कि पैन कार्ड मामले में 17 नवंबर 2025 को अदालत ने आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद दोनों को रामपुर जिला कारागार में भेज दिया गया था, जहां वे फिलहाल बंद हैं। इसी सजा को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट में अपील दायर की गई थी।
दोनों पक्षों ने रखे मजबूत तर्क, अदालत ने सुनी विस्तार से दलीलें
मामले में राज्य सरकार की ओर से इलाहाबाद से पहुंचे अपर महाधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह ने पक्ष रखा। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर सुल्तान समेत अन्य वकीलों ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं और न्यायालय द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए। दोनों पक्षों के बीच विस्तृत और गहन बहस हुई, जिससे मामले के कई कानूनी पहलू सामने आए।
अदालत कर रही है कानूनी पहलुओं का गहन विश्लेषण
सुनवाई के बाद अपर महाधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि अदालत अब बहस के दौरान उठे सभी कानूनी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि यदि किसी बिंदु पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण जरूरी समझा जाएगा, तो संबंधित पक्ष को जवाब देने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ही कोर्ट अंतिम फैसले की तारीख घोषित करेगी।
23 मार्च को अगली सुनवाई पर टिकी सभी की नजरें
अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी, जहां यह तय होगा कि क्या कोर्ट को और स्पष्टीकरण की जरूरत है या फिर फैसले की तारीख घोषित कर दी जाएगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही हलकों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर आगे की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।


