‘जो चाहूं कर सकता हूं…’ वेनेजुएला और ईरान के बाद अब क्यूबा पर ट्रंप की नजर

‘जो चाहूं कर सकता हूं…’ वेनेजुएला और ईरान के बाद अब क्यूबा पर ट्रंप की नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अब ट्रंप ने अमेरिका के पड़ोसी कम्युनिस्ट देश क्यूबा को लेकर बड़ा संकेत दिया है। व्हाइट हाउस में हुए प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी न किसी रूप में क्यूबा पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है। आपको बता दें कि क्यूबा गंभीर ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है।

क्यूबा को लेकर क्या बोले ट्रंप?

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि क्यूबा पर अमेरिका का नियंत्रण स्थापित करना उनके लिए सम्मान की बात होगी। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि क्यूबा को अपने नियंत्रण में लेने का सम्मान मुझे मिल सकता है। यह बहुत बड़ा सम्मान होगा किसी न किसी रूप में क्यूबा को लेना। ट्रंप ने आगे कहा कि वह क्यूबा के साथ जो चाहें कर सकते हैं क्योंकि फिलहाल यह देश बेहद कमजोर स्थिति में है। चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में लूं सच कहूं तो मैं उसके साथ जो चाहूं कर सकता हूं। अभी वह बहुत कमजोर देश है।

क्यूबा में ब्लैकआउट

क्यूबा इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। हाल ही में देश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जिससे पूरे द्वीप में अंधेरा छाया हुआ है। करीब 96 लाख आबादी वाले इस कैरेबियाई देश में कई हफ्तों से लगातार बिजली कटौती हो रही है। बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन की कमी के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से पिछले तीन महीनों से देश को कोई बड़ा ईंधन शिपमेंट नहीं मिला है।

क्यूबा पर अमेरिका बढ़ा रहा आर्थिक दबाव

विश्लेषकों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर वहां की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि क्यूबा की 67 साल पुरानी एक-दलीय कम्युनिस्ट व्यवस्था कमजोर पड़े और देश आर्थिक रूप से अमेरिका पर अधिक निर्भर हो जाए। प्रेस ब्रीफिंग में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों के बारे में सुना है और हमेशा यह सवाल उठता रहा है कि अमेरिका आखिर कब कदम उठाएगा।

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