मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक होमगार्ड सैनिक को सेवा से हटाने की कार्रवाई को गलत ठहराते हुए उसकी बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मामले में चालान पेश होने के आधार पर अधिकतम दंड देना नियमों के विरुद्ध है। अदालत ने संबंधित अधिकारी को 30 दिन के भीतर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह मामला हेमंत योगी से संबंधित है, जो जिला कमांडेंट कार्यालय गुना में होमगार्ड सैनिक के रूप में कार्यरत थे। उनके खिलाफ पारिवारिक विवाद के चलते दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के बाद चालान पेश होने पर, उन्हें 27 जनवरी 2026 को सेवा से मुक्त कर दिया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। संबंधित अधिकारी की लापरवाही हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में पाया कि सेवा समाप्ति के आदेश में नियम 24 के तहत दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख था। हालांकि, संबंधित अधिकारी ने न तो आरोपों की गंभीरता पर विचार किया और न ही याचिकाकर्ता के जवाब को उचित तरीके से देखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर या चालान के आधार पर किसी को सेवा से हटाना स्वतः सिद्ध नहीं माना जा सकता। प्राधिकारी के लिए आरोपों की प्रकृति और परिस्थितियों का मूल्यांकन करना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी बताया कि नियम 27 के तहत कार्रवाई करने के लिए उच्च अधिकारी की स्वीकृति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जो इस मामले में पूरी नहीं की गई थी। इन तथ्यों के आधार पर, हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 के सेवा समाप्ति आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने मामले को संबंधित अधिकारी के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेजते हुए 30 दिन के भीतर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया है।


