प्रदेश में स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों को रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा देने की सरकार की व्यवसायिक शिक्षा योजना अब महज कागजी बनकर रह गई है। प्रदेश के शिक्षा तंत्र का इससे बड़ा मजाक क्या होगा कि 2500 से अधिक राजकीय विद्यालयों में पिछले दो वर्षों से विद्यार्थियों को बिना पढ़ाए ही परीक्षा देनी पड़ रही है। जिन विषयों में छात्रों को दक्ष बनाने का सपना दिखाया गया था, वहां शिक्षक ही नहीं हैं और जहां शिक्षक हैं, उन्हें 13 महीने से वेतन नसीब नहीं हुआ है।
शिक्षा विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि बिना शिक्षण कार्य के ही विभाग नियमित रूप से परीक्षाएं आयोजित करवाकर सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है।
टेंडर खत्म, भर्तियां अटकीं, पढ़ाई ठप
प्रदेश के कई विद्यालयों में इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, हेल्थकेयर, रिटेल जैसी महत्वपूर्ण व्यवसायिक ट्रेड शुरू तो कर दी गईं, लेकिन प्रशिक्षकों के अभाव में प्रयोगशालाएं और कक्षाएं सूनी पड़ी हैं। पूर्व में प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए लगे प्रशिक्षकों का टेंडर समाप्त होने के बाद लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं।
विद्यार्थियों का दर्द: जब गुरुजी ही नहीं, तो परीक्षा कैसी
साल भर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों का सीधा सवाल है कि जब पूरे साल विषय पढ़ाने वाला कोई शिक्षक ही नहीं मिला, तो वे परीक्षा में क्या लिखें और तैयारी कैसे करें। जमीनी हकीकत यह है कि स्कूलों में वास्तविक शिक्षण कार्य पूरी तरह बंद है, केवल रजिस्टर में हाजिरी और परीक्षा की औपचारिकता निभाई जा रही है।
विभाग आदेश निकाल रहा, समाधान शून्य
इस पूरे मामले में सरकार और शिक्षा विभाग का रवैया उदासीन बना हुआ है। व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन गर्ग ने पत्रिका को बताया कि यदि जल्द प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो हजारों विद्यार्थियों का भविष्य पूरी तरह अंधकार में चला जाएगा।
विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
वर्तमान में जो प्रशिक्षक कार्यरत हैं, उन्हें 3 से लेकर 13 महीने तक का वेतन नहीं मिला है। इन कार्यरत प्रशिक्षकों का टेंडर भी इसी 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। शिक्षा विभाग केवल आदेशों पर आदेश निकाल रहा है, लेकिन वेतन और स्थाई नियुक्ति को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा।
अभिभावकों में रोष, तुरंत नियुक्ति की मांग
योजना के इस तरह बेपटरी होने से स्थानीय अभिभावकों और शिक्षा संगठनों में भारी रोष है। उनकी मांग है कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग तुरंत प्रभाव से व्यवसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति करे। साथ ही, कार्यरत प्रशिक्षकों का बकाया वेतन जारी कर उनके टेंडर का स्थाई समाधान निकाला जाए, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।


