बहन को छेड़ने वाले को चूना भट्ठी में जिंदा जलाया:कंपाउंडर से खूंखार अपराधी बना…दुश्मनों को देता था खौफनाक मौत

बहन को छेड़ने वाले को चूना भट्ठी में जिंदा जलाया:कंपाउंडर से खूंखार अपराधी बना…दुश्मनों को देता था खौफनाक मौत

मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी एक ऐसे खतरनाक अपराधी की, जिसने कई सालों तक प्रदेश के कई जिलों में दहशत फैला रखी थी। उससे सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े बदमाश भी खौफ खाते थे। कटनी का रहने वाला एक साधारण कंपाउंडर किशोर तिवारी उर्फ किस्सू धीरे-धीरे इतना खतरनाक गैंगस्टर बन गया कि वह अपने दुश्मनों को सिर्फ मारता ही नहीं था, बल्कि ऐसी मौत देता था कि लोग उसके सामने आने से भी डरते थे। कई गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस भी उसके खिलाफ सीधे कार्रवाई करने से हिचकती थी। एक साधारण कंपाउंडर आखिर खूंखार अपराधी कैसे बना? उसके दुश्मनों में इतना खौफ क्यों था? और दुश्मनों को मारने का उसका तरीका क्या था? पढ़िए पूरी कहानी… अयोध्या में साधु के वेश में पकड़ा गया संदिग्ध अयोध्या में राम मंदिर के पास स्थित हनुमानगढ़ी में रोज की तरह साधुओं और श्रद्धालुओं की भीड़ थी। उसी भीड़ में भगवा कपड़े पहने एक साधु धीरे-धीरे हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहा था। बढ़ी हुई सफेद दाढ़ी, माथे पर तिलक और हाथ में माला। देखने में वह अयोध्या में रहने वाले दूसरे साधुओं जैसा ही लग रहा था। अचानक कुछ ही मिनटों में वहां का माहौल बदल गया। भीड़ में मौजूद कुछ पुलिसकर्मी उसके सामने आकर खड़े हो गए। कई सालों से अयोध्या में रह रहा यह साधु रोज की तरह सरयू नदी में स्नान कर हनुमानगढ़ी दर्शन के लिए जा रहा था। लेकिन उस दिन उसकी दिनचर्या टूट गई। पुलिस ने उसे रोका और ध्यान से उसका चेहरा देखने लगी। कौन था ये शख्स? और आखिर क्या थी इसके गैंगस्टर बनने की कहानी… इस सवाल का जवाब कहानी में आगे- न्यू ईयर पार्टी के बहाने किया मर्डर बात 31 दिसंबर 1986 की है। काम के सिलसिले में भिलाई में रहने वाला राजेंद्र अपने माता-पिता से मिलने कटनी आया था। रात करीब 8 बजे वह एक कार्यक्रम से लौट रहा था। नगर पालिका कार्यालय के सामने उसकी मुलाकात एक पुराने साथी से हो गई। किसी बात पर दोनों में विवाद हो गया। इसी दौरान उनके कुछ और साथी भी वहां पहुंच गए। सभी एक-दूसरे को जानते थे, इसलिए विवाद खत्म कर उन्होंने साथ में न्यू ईयर पार्टी मनाने का फैसला किया। वे पास की शराब दुकान से शराब लेकर कार में बैठे और शहर से बाहर एक ढाबे पहुंच गए। ढाबे पर शराब पीने के दौरान फिर बहस शुरू हो गई। गाली-गलौज के बीच गुस्से में राजेंद्र ने एक साथी को घूंसा मार दिया। फिर सामने आया खूंखार किस्सू… मारपीट के दौरान राजेंद्र के साथियों संग आए एक युवक ने पास पड़ी लकड़ी उठाकर राजेंद्र के सिर पर मार दी। सिर फटने से खून बहने लगा। यह युवक था-किशोर तिवारी उर्फ किस्सू। राजेंद्र ने जान बचाने के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद वे उसे जबरन कार में बैठाकर कटनी के पास झुकेही के जंगल ले गए। वहां सभी ने मिलकर इतनी बेरहमी से पिटाई की कि कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। उन्होंने मौत के बाद राजेंद्र के शव को पास में स्थित चूना भट्ठी में डाल दिया। जले जूते और कपड़ों से खुला राज देर रात तक जब राजेंद्र घर नहीं लौटा तो परिवार चिंतित हो गया। भाई प्रकाश ने तलाश शुरू की। पता चला कि राजेंद्र को आखिरी बार विवेक और उसके साथियों के साथ देखा गया था। अगले दिन 1 जनवरी 1987 को प्रकाश ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में सामने आया कि जिस कार में राजेंद्र गया था, उसे झुकेही की तरफ से लौटते देखा गया था। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि झुकेही की एक चूना भट्ठी में जला हुआ कंकाल मिला है। जब पुलिस वहां पहुंची तो जली हुई हड्डियों के अवशेष मिले। इससे पहले भी मिली थी चूना भट्ठी में लाश पुलिस को झुकेही की चूना भट्ठी में पहली बार कंकाल नहीं मिला था। इससे पहले भी इसी तरह एक व्यक्ति की जली हुई हड्डियां भट्ठी से मिली थीं। यह मामला जबलपुर के राजेश उर्फ राजू सोनी से जुड़ा था। 1985 में राजेश अचानक गायब हो गया था। बहन को छेड़ने की सजा- जिंदा जलाया जांच में पता चला कि राजेश जबलपुर में एक कॉलेज छात्रा को परेशान करता था। वह उसे आते-जाते समय हमेशा छेड़ता था और उसका पीछा करता था। यह लड़की इलाके के कुख्यात बदमाश किस्सू की फुफेरी बहन थी। जब लड़की के पिता ने यह बात किस्सू को बताई तो उसने राजेश को जबलपुर से अगवा कर लिया। उसे कटनी के पास झुकेही के जंगल ले गया, फिर गोली मार दी। इसके बाद मरने से पहले जिंदा हालत में ही उसे चूना भट्ठी में डालकर जला दिया। कंपाउंडर से गैंगस्टर बना किस्सू इन दोनों मामलों से साफ था कि किस्सू कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं, बल्कि बेरहमी से कत्ल करने वाला गैंगस्टर था। 80 के दशक में जबलपुर और कटनी इलाके में किस्सू का नाम सुनकर ही लोगों के हाथ-पांव फूल जाते थे। वह पहले एक साधारण कंपाउंडर था, लेकिन इस काम में न उसे इज्जत नजर आ रही थी और न पैसा। बस फिर क्या था, धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया में उतर गया। कटनी रेलवे डिपो से बहाए जाने वाले खराब डीजल को इकट्ठा कर अवैध तरीके से बेचना उसका सबसे बड़ा धंधा था। इसके अलावा वो चूने की खदान के ठेके भी लेने लगा। जो भी उसके इस धंधे में आड़े आता, उसे वह बेरहमी से मारता। इन सब घटनाओं के बावजूद पुलिस के पास उसके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे। उसका खौफ ही ऐसा था कि कोई उसके खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए … किस्सू साधारण कंपाउंडर से खूंखार गैंगस्टर कैसे बना? अपनी सगी बहन के पति की हत्या क्यों की? अवैध धंधे में आड़े आने वालों को उसने किस तरह मौत के घाट उतारा? और आखिरकार पुलिस ने उसे कैसे पकड़ा? क्या किस्सू को पुलिस कोर्ट में सजा दिला सकी? ये भी पढ़ें… 1. लवमैरिज के 2 साल बाद हत्या,पत्नी के जाते ही फायरिंग, क्राइम फाइल्स पार्ट-1 मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार बात उज्जैन के 10 साल पुराने चर्चित टावर चौक हत्याकांड की। रोज की तरह एक महिला अपने पति को ऑफिस के पास छोड़कर बाजार की ओर चली गई। युवक पैदल ही अपने ऑफिस की तरफ जा रहा था। तभी बाइक पर सवार दो बदमाश आए और उन्होंने उसके सिर में गोली मार दी। पढ़ें पूरी खबर… 2. पति ने प्रेमी के साथ सेक्स करते पकड़ा, क्राइम फाइल्स पार्ट-2 उज्जैन के टावर चौक पर दिनदहाड़े हुए मनीष मीणा हत्याकांड ने पूरे शहर को हिला दिया था। 18 अगस्त 2015 की सुबह ऑफिस जाते समय मनीष के सिर में बेहद करीब से गोली मारी गई थी। चार दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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