Climate Change: क्या आपने कभी सोचा है कि ध्रुवों पर पिघलती बर्फ केवल समुद्र का जलस्तर ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि हमारे ग्रह के घूमने की रफ्तार को भी धीमा कर रही है? वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इंसानी गतिविधियों के कारण हो रहा जलवायु परिवर्तन अब पृथ्वी के घूर्णन को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक बन गया है। हर सदी में दिन की लंबाई में लगभग 1.33 मिलीसेकंड का इजाफा हो रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछले 36 लाख साल में इतनी तेजी से दिन की लंबाई में बदलाव कभी नहीं देखा गया।
ऐसे बढ़ रही दिन की लंबाई
जैसे कोई ‘फिगर स्केटर’ घूमते समय अपने हाथों को बाहर फैलाता है, तो उसकी रफ्तार धीमी हो जाती है। इसी तरह जैसे-जैसे ग्लेशियर और ध्रुवीय बर्फ पिघलती है, वह पानी ध्रुवों से हटकर भूमध्य रेखा की ओर जमा होने लगता है। इससे पृथ्वी के बीच का हिस्सा अधिक भारी होने से घूर्णन गति कम हो जाती है।
इसलिए यह परिवर्तन खतरनाक
इंसानी नजरिए से एक मिलीसेकंड का हजारवां हिस्सा बहुत मामूली लग सकता है, लेकिन आधुनिक तकनीक के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। सटीक जीपीएस सिग्नल और सैटेलाइट ट्रैकिंग के लिए समय का सटीक होना अनिवार्य है। समय के तालमेल में मामूली अंतर भी अंतरिक्ष नेविगेशन में बड़ी गलतियां पैदा कर सकता है।


