डिजिटल न्याय की दौड़ में राजस्थान सबसे आगे:देश में आठ हजार से ज्यादा ई-कोर्ट संचालित हो रहे हैं, इनमें अकेले राजस्थान के 1098

डिजिटल न्याय की दौड़ में राजस्थान सबसे आगे:देश में आठ हजार से ज्यादा ई-कोर्ट संचालित हो रहे हैं, इनमें अकेले राजस्थान के 1098

आम आदमी को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अदालतों में संचार तकनीक और एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। देश भर में 8396 अदालतों में आधुनिक तकनीक के जरिए इंसाफ की रफ्तार भी बढ़ रही है। इसमें राजस्थान सबसे आगे है। ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट के ताजा आंकड़ों में डिजिटल अदालती ढांचे के विस्तार में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है। प्रदेश में 1098 कोर्ट डिजिटल हो चुके हैं।इनमें सबसे ज्यादा राजधानी जयपुर में हैं। इसके बाद जोधपुर, उदयपुर और श्रीगंगानगर जिले हैं। इस तरह की अदालतों को कंप्यूटरीकरण, वाइड एरिया नेटवर्क कनेक्टिविटी, डिजिटल फाइलिंग, ई भुगतान, वर्चुअल और हाइब्रिड सुनवाई, अभिलेखों का डिजिटलीकरण और केस सूचना प्रगाली से मजबूत बनाया जा रहा है। सभी हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शामिल है। अकेले राजस्थान में उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से भी ज्यादा कोर्ट ई कोर्ट बन चुके हैं। यहां कुल 1098 अदालती प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। यह संख्या देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से लगभग दोगुनी है यूपी में ऐसे कोर्ट 584 ही हैं। दूसरे पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में 277 और गुजरात में 467 डिजिटल सुविधायुक्त कोर्ट हैं। इसी तरह हरियाणा में 158 और पंजाब में 200 कोर्ट इसी श्रेणी के हैं। प्रदेश के अलग अलग जिलों में राजधानी 19 राज्यों के ई-कोर्ट से ज्यादा राजस्थान में विकसित हो गए हैं। अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादरा नागर और हवेली, दमन और दीव में पांच पांच भी ऐसे कोर्ट नहीं है। लक्षद्वीप में 6 और लद्दाख में 10 कोर्ट हैं। अरुणाचल, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम में 50 से कम और जयपुर में सबसे ज्यादा कोर्ट हैं। जयपुर जिले में 33, जयपुर मेट्रो प्रथम में 30 और जयपुर द्वितीय में 25 ई कोर्ट हैं। वहीं, अजमेर में 36, अलवर में 39, बालोतरा में 11, बांसवाड़ा में 22, बारां में 25 बाड़मेर में 14, ब्यावर में 15
देश के 19 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में डिजिटल सुविधा वाले कोर्ट की संख्या एक हजार से कम है। अकेले राजस्थान में एक हजार से ज्यादा कोर्ट
भरतपुर में 30, भीलवाड़ा में 41 बीकानेर में 27, बूंदी में 26, चित्तौड़गढ़ में 38, चूरू में 27 दौसा में 24, डीग में 20, धौलपुर में 24, डीडवाना कुचामन में 20 डूंगरपुर में 17, श्रीगंगानगर में 41 हनुमानगढ़ में 32, जैसलमेर में 14 जालोर में 19, झालावाड़ में 28, झुंझुनूं में 30, जोधपुर जिला में 20, जोधपुर मेट्रो में 18, करौली में 22, खैरताल तिजारा में 23, कोटा में 32, कोटपुतली बहरोड़ में 16, नागौर में 19, पाली में 33, फलोदी में 10, प्रतापगढ़ में 18, राजसमंद में 24, सलूंबर में 7, सवाई माधोपुर में 22, सीकर में 36, सिरोही में 21, टॉक में 31 और उदयपुर में 38 ऐसे कोर्ट हैं। इन कोर्ट को पूरी तरह हाईटेक बनाया है। ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-फाइलिंग का उपयोग तेजी से बढ़ा है। अब गवाहों को दूर-दराज के इलाकों से कोर्ट आने की जरूरत नहीं पड़ती, जेलों व अदालतों के बीच भी अब वीडियो लिंक से सुनवाई हो रही है।

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