हम दोनों करीब 6 साल से एक-दूसरे को प्यार करते थे। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जब उसने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया तो मुझे बहुत गुस्सा आ गया। गुस्से में मैंने अपनी कमर से देसी कट्टा निकाला और उसकी गर्दन पर सटाकर गोली चला दी। गोली लगते ही वह वहीं गिर पड़ी। यह कहना है सहरसा के सलखुआ थाना क्षेत्र में 8 मार्च को हुई सुषुम कुमारी हत्याकांड के आरोपी भूपेन कुमार (22) का। पुलिस पूछताछ में उसने पूरी वारदात कबूल कर ली है। दरअसल, सहरसा में रविवार(8 मार्च) को एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसका शव मक्के के खेत में खून से लथपथ मिला था। मृतका की पहचान कोपड़िया गांव निवासी धीरेन्द्र यादव की बेटी सुषुम कुमारी (20) के रूप में की गई। DSP मुकेश कुमार ठाकुर ने घटना का खुलासा करते हुए आरोपी भूपेन को अरेस्ट कर लिया है। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… आरोपी का कबूलनामा पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी भूपेन कुमार ने हत्या की बात को स्वीकार किया है। आरोपी ने अपने कबूलनामा में बताया, वह और सुषुम करीब 6 साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे। दोनों के बीच सब कुछ अच्छा चल रहा था। इसी बीच 2024 में उसके पिता ने उसकी शादी सोनबरसा में राकेश कुमार से तय कर दी। इसको लेकर मैं उससे बहुत लड़ा, लेकिन वो अपने पापा के सामने कुछ नहीं बोल पाई। शादी फिक्स होने के बावजूद हम दोनों का प्यार नहीं बदला। हम छिप-छिपकर अक्सर गांव के आसपास मक्के के खेतों या सुनसान जगहों पर मिलते थे। लगातार मोबाइल फोन पर बातचीत भी करते रहते थे। 2024 के मार्च में सुषुम की शादी हो गई। इसके बाद उसके बिना मुझे कुछ अच्छा नहीं लगने लगा। मैं उससे मिलने उसके ससुराल भी चला जाता था। दिनभर फोन पर बात करते रहता था। इस बीच मैं हिमाचल प्रदेश में पेंटर का काम करने चला गया। मैं वहीं रहने लगा, लेकिन सुषुम से मेरी बात लगातार फोन पर होते रहती थी। 2024 में पति से झगड़ा कर लौटी गांव भूपेन ने पुलिस को आगे बताया, 2024 के अगस्त में सुषुम ने अपने पति से लड़ाई कर ली और घर लौट आई। उसने घरवालों से कहा कि उसका पति शराब पीकर उसे पीटता है, इसी वजह से वो उससे अलग रहना चाहती है। घरवालों ने भी सुषुम की बात को सच मान लिया और उसे अपने साथ रखने लगे। इस दौरान सुषुम फिर से मुझसे उतना ही प्यार करने लगी। पूरा समय मुझे देने लगी। 2 सालों तक हमारे बीच सबकुछ ठीक रहा, लेकिन पिछले अक्टूबर महीने से मुझे लग रहा था कि वो किसी और से भी बात करती है। इसी वजह से वो मुझे कम समय देती है। मैं जब भी फोन करता था बीजी आता था। चार-पांच महीने से सुषमा द्वारा की जा रही इस अनदेखी से मैं अंदर ही अंदर घुटने लगा और मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। हिमाचल से लौटा और बन गया कातिल भूपेन ने अपने कबूलनामा में आगे बताया, करीब 6 महीने बाद मैं हिमाचल प्रदेश से बीते 4 फरवरी को गांव लौटा था। गांव आने के बाद मैंने कई बार सुषुम से बात करने की कोशिश की, लेकिन वो हर बार मुझे इग्नोर कर देती थी। उससे बात करने के लिए कई बार खेत की तरफ भी गया, लेकिन वो किसी और से फोन पर बात करते रहती थी। घास लाने निकली थी, खेत में मार दी गोली भूपेन ने पुलिस को आगे बताया, घटना वाले दिन 8 मार्च की दोपहर सुषुम घर से घास लाने के लिए खेत की तरफ गई थी। उसी समय मैं भी उसके पीछे-पीछे खेत की ओर चला गया। मैंने सोचा आज इससे बात करूंगा। पिछले कुछ दिनों से वो जब भी खेत जा रही थी, मुझे फोन नहीं करती थी। मैं वहां जब पहुंचा तो मैंने सुना वो किसी और से फोन पर बात कर रही थी। नजदीक गया तो मुझे सारी बातें सुनाई देने लगी। वो फोन पर हंस-हंस कर प्यार भरी बात कर रही थी। इतना देखते ही मैं गुस्सा हो गया। मैं तुरंत सुषुम के पास पहुंचा और उससे कहा कि क्या तुम मुझसे प्यार करती हो। मुझसे शादी करोगी, लेकिन सुषुम ने साफ तौर पर शादी से इनकार कर दिया। उसने कहा, अब वह मुझसे शादी नहीं कर सकती है। यह सुनकर मैं भड़क गया। मैंने अपने कमर से देसी कट्टा निकालकर सुषुम की गर्दन से सटा दिया और गोली चला दी। गोली लगते ही सुषुम वहीं गिर पड़ी। हत्या के बाद ऐसे रहा जैसे कुछ हुआ ही नहीं भूपेन ने आगे बताया, वारदात को अंजाम देने के बाद मैं पैदल ही अपने घर लौट आया। सामान्य तरीके से रहने लगा, ताकि किसी को मुझपर शक न हो। जब हत्या की बात पूरे गांव में गूंजी तो मैंने भी चौकाने वाला ही एक्शन दिया। हालांकि पुलिस की जांच में धीरे-धीरे सारे सुराग मेरी ओर इशारा करने लगे और आखिरकार मुझे पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। डीएसपी मुकेश कुमार ठाकुर ने बताया, आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। अब पूरा मामला समझिए… घास लाने गई थी, मक्के के खेत में मिली लाश: मृतका के पिता धीरेन्द्र यादव ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि रविवार(8 मार्च) सुबह करीब 11 बजे उनकी बेटी सुषुम घर से घास लाने के लिए बहियार गई थी। इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे गांव के लोगों से सूचना मिली कि मक्के के खेत में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई है। घटना की खबर मिलते ही परिवार और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया। सोमवार को पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया था। गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। पति ने क्या-क्या बताया, पढ़िए… शादी की पहली रात ही मुझे शक हो गया था: राकेश कुमार ने कहा, शादी की पहली रात में ही मैं सुषुम के भेद को समझ गया था। उसके चरित्र पर शक हो गया था। उस समय मैंने उसे समझाया भी था कि अगर मेरे साथ धोखा दोगी तो कभी खुश नहीं रह पाओगी। मैंने उसके साथ 15 दिन बिताए और 16वें दिन काम के लिए दिल्ली चला गया। मेरे जाने के अगले दिन ही वह ससुराल से मायके चली गई। 6 महीने तक वो ससुराल-मायके करती थी फिर अचानक वो वापस ससुराल आने को तैयार नहीं हुई। गांव के ही किसी युवक से बात करती थी: मैं दिल्ली में हलवाई का काम करता हूं। एक रात करीब 1:30 बजे मैंने उसे फोन किया, लेकिन आधे घंटे तक उसका मोबाइल बिजी रहा। करीब 2 बजे बात हुई तो मैंने पूछा कि किससे बात कर रही थी, लेकिन उसने टाल दिया। इसके बाद कई दिनों तक मैंने देखा कि रात के समय उसका फोन अक्सर बिजी रहता था। मुझे शक हुआ कि वह गांव के ही किसी युवक से बात करती थी। कभी मारपीट नहीं की, हर महीने ₹20 हजार भेजता था: राकेश ने कहा, मेरे ससुराल वाले जो आरोप लगा रहे हैं कि मैं दिमागी रूप से ठीक नहीं हूं या पत्नी के साथ मारपीट करता था, यह पूरी तरह गलत है। मैंने आज तक अपनी पत्नी को एक थप्पड़ भी नहीं मारा। छह महीने तक हमारी फोन पर बातचीत होती रही और मैं हर महीने उसे करीब 20 हजार रुपए भी भेजता था। मैंने कई बार कहा कि अगर किसी से प्यार है तो उसी से शादी कर लेती, मेरी जिंदगी क्यों खराब की। मृतका की मां ने क्या-क्या बताया सुसम की मां शांति देवी ने कहा, मेरा दामाद मानसिक रूप से ठीक नहीं है और उसका स्वभाव भी सनकी है। इसी वजह से मैंने उसके घरवालों से कह दिया था कि अपने बेटे की दूसरी शादी कर दें। हालांकि, दोनों के बीच कानूनी तौर पर तलाक नहीं हुआ था, बस आपसी सहमति से अलगाव जैसा हो गया था। उन्होंने बताया, रविवार को मैं खेत में आलू उखाड़ने गई थी। उसी समय सुषुम घास लाने जाने की जिद करने लगी, जबकि वह पहले कभी घास लाने नहीं गई थी। उसकी जिद के आगे मुझे उसे जाने देना पड़ा। उसकी दो छोटी बहनें भी घास लाने निकली थीं, लेकिन वे दूसरे रास्ते चली गईं। कुछ देर बाद गांव की महिलाओं ने मक्के के खेत में उसका खून से लथपथ शव देखा और हमें सूचना दी। हम दोनों करीब 6 साल से एक-दूसरे को प्यार करते थे। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जब उसने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया तो मुझे बहुत गुस्सा आ गया। गुस्से में मैंने अपनी कमर से देसी कट्टा निकाला और उसकी गर्दन पर सटाकर गोली चला दी। गोली लगते ही वह वहीं गिर पड़ी। यह कहना है सहरसा के सलखुआ थाना क्षेत्र में 8 मार्च को हुई सुषुम कुमारी हत्याकांड के आरोपी भूपेन कुमार (22) का। पुलिस पूछताछ में उसने पूरी वारदात कबूल कर ली है। दरअसल, सहरसा में रविवार(8 मार्च) को एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसका शव मक्के के खेत में खून से लथपथ मिला था। मृतका की पहचान कोपड़िया गांव निवासी धीरेन्द्र यादव की बेटी सुषुम कुमारी (20) के रूप में की गई। DSP मुकेश कुमार ठाकुर ने घटना का खुलासा करते हुए आरोपी भूपेन को अरेस्ट कर लिया है। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… आरोपी का कबूलनामा पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी भूपेन कुमार ने हत्या की बात को स्वीकार किया है। आरोपी ने अपने कबूलनामा में बताया, वह और सुषुम करीब 6 साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे। दोनों के बीच सब कुछ अच्छा चल रहा था। इसी बीच 2024 में उसके पिता ने उसकी शादी सोनबरसा में राकेश कुमार से तय कर दी। इसको लेकर मैं उससे बहुत लड़ा, लेकिन वो अपने पापा के सामने कुछ नहीं बोल पाई। शादी फिक्स होने के बावजूद हम दोनों का प्यार नहीं बदला। हम छिप-छिपकर अक्सर गांव के आसपास मक्के के खेतों या सुनसान जगहों पर मिलते थे। लगातार मोबाइल फोन पर बातचीत भी करते रहते थे। 2024 के मार्च में सुषुम की शादी हो गई। इसके बाद उसके बिना मुझे कुछ अच्छा नहीं लगने लगा। मैं उससे मिलने उसके ससुराल भी चला जाता था। दिनभर फोन पर बात करते रहता था। इस बीच मैं हिमाचल प्रदेश में पेंटर का काम करने चला गया। मैं वहीं रहने लगा, लेकिन सुषुम से मेरी बात लगातार फोन पर होते रहती थी। 2024 में पति से झगड़ा कर लौटी गांव भूपेन ने पुलिस को आगे बताया, 2024 के अगस्त में सुषुम ने अपने पति से लड़ाई कर ली और घर लौट आई। उसने घरवालों से कहा कि उसका पति शराब पीकर उसे पीटता है, इसी वजह से वो उससे अलग रहना चाहती है। घरवालों ने भी सुषुम की बात को सच मान लिया और उसे अपने साथ रखने लगे। इस दौरान सुषुम फिर से मुझसे उतना ही प्यार करने लगी। पूरा समय मुझे देने लगी। 2 सालों तक हमारे बीच सबकुछ ठीक रहा, लेकिन पिछले अक्टूबर महीने से मुझे लग रहा था कि वो किसी और से भी बात करती है। इसी वजह से वो मुझे कम समय देती है। मैं जब भी फोन करता था बीजी आता था। चार-पांच महीने से सुषमा द्वारा की जा रही इस अनदेखी से मैं अंदर ही अंदर घुटने लगा और मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। हिमाचल से लौटा और बन गया कातिल भूपेन ने अपने कबूलनामा में आगे बताया, करीब 6 महीने बाद मैं हिमाचल प्रदेश से बीते 4 फरवरी को गांव लौटा था। गांव आने के बाद मैंने कई बार सुषुम से बात करने की कोशिश की, लेकिन वो हर बार मुझे इग्नोर कर देती थी। उससे बात करने के लिए कई बार खेत की तरफ भी गया, लेकिन वो किसी और से फोन पर बात करते रहती थी। घास लाने निकली थी, खेत में मार दी गोली भूपेन ने पुलिस को आगे बताया, घटना वाले दिन 8 मार्च की दोपहर सुषुम घर से घास लाने के लिए खेत की तरफ गई थी। उसी समय मैं भी उसके पीछे-पीछे खेत की ओर चला गया। मैंने सोचा आज इससे बात करूंगा। पिछले कुछ दिनों से वो जब भी खेत जा रही थी, मुझे फोन नहीं करती थी। मैं वहां जब पहुंचा तो मैंने सुना वो किसी और से फोन पर बात कर रही थी। नजदीक गया तो मुझे सारी बातें सुनाई देने लगी। वो फोन पर हंस-हंस कर प्यार भरी बात कर रही थी। इतना देखते ही मैं गुस्सा हो गया। मैं तुरंत सुषुम के पास पहुंचा और उससे कहा कि क्या तुम मुझसे प्यार करती हो। मुझसे शादी करोगी, लेकिन सुषुम ने साफ तौर पर शादी से इनकार कर दिया। उसने कहा, अब वह मुझसे शादी नहीं कर सकती है। यह सुनकर मैं भड़क गया। मैंने अपने कमर से देसी कट्टा निकालकर सुषुम की गर्दन से सटा दिया और गोली चला दी। गोली लगते ही सुषुम वहीं गिर पड़ी। हत्या के बाद ऐसे रहा जैसे कुछ हुआ ही नहीं भूपेन ने आगे बताया, वारदात को अंजाम देने के बाद मैं पैदल ही अपने घर लौट आया। सामान्य तरीके से रहने लगा, ताकि किसी को मुझपर शक न हो। जब हत्या की बात पूरे गांव में गूंजी तो मैंने भी चौकाने वाला ही एक्शन दिया। हालांकि पुलिस की जांच में धीरे-धीरे सारे सुराग मेरी ओर इशारा करने लगे और आखिरकार मुझे पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। डीएसपी मुकेश कुमार ठाकुर ने बताया, आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। अब पूरा मामला समझिए… घास लाने गई थी, मक्के के खेत में मिली लाश: मृतका के पिता धीरेन्द्र यादव ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि रविवार(8 मार्च) सुबह करीब 11 बजे उनकी बेटी सुषुम घर से घास लाने के लिए बहियार गई थी। इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे गांव के लोगों से सूचना मिली कि मक्के के खेत में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई है। घटना की खबर मिलते ही परिवार और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया। सोमवार को पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया था। गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। पति ने क्या-क्या बताया, पढ़िए… शादी की पहली रात ही मुझे शक हो गया था: राकेश कुमार ने कहा, शादी की पहली रात में ही मैं सुषुम के भेद को समझ गया था। उसके चरित्र पर शक हो गया था। उस समय मैंने उसे समझाया भी था कि अगर मेरे साथ धोखा दोगी तो कभी खुश नहीं रह पाओगी। मैंने उसके साथ 15 दिन बिताए और 16वें दिन काम के लिए दिल्ली चला गया। मेरे जाने के अगले दिन ही वह ससुराल से मायके चली गई। 6 महीने तक वो ससुराल-मायके करती थी फिर अचानक वो वापस ससुराल आने को तैयार नहीं हुई। गांव के ही किसी युवक से बात करती थी: मैं दिल्ली में हलवाई का काम करता हूं। एक रात करीब 1:30 बजे मैंने उसे फोन किया, लेकिन आधे घंटे तक उसका मोबाइल बिजी रहा। करीब 2 बजे बात हुई तो मैंने पूछा कि किससे बात कर रही थी, लेकिन उसने टाल दिया। इसके बाद कई दिनों तक मैंने देखा कि रात के समय उसका फोन अक्सर बिजी रहता था। मुझे शक हुआ कि वह गांव के ही किसी युवक से बात करती थी। कभी मारपीट नहीं की, हर महीने ₹20 हजार भेजता था: राकेश ने कहा, मेरे ससुराल वाले जो आरोप लगा रहे हैं कि मैं दिमागी रूप से ठीक नहीं हूं या पत्नी के साथ मारपीट करता था, यह पूरी तरह गलत है। मैंने आज तक अपनी पत्नी को एक थप्पड़ भी नहीं मारा। छह महीने तक हमारी फोन पर बातचीत होती रही और मैं हर महीने उसे करीब 20 हजार रुपए भी भेजता था। मैंने कई बार कहा कि अगर किसी से प्यार है तो उसी से शादी कर लेती, मेरी जिंदगी क्यों खराब की। मृतका की मां ने क्या-क्या बताया सुसम की मां शांति देवी ने कहा, मेरा दामाद मानसिक रूप से ठीक नहीं है और उसका स्वभाव भी सनकी है। इसी वजह से मैंने उसके घरवालों से कह दिया था कि अपने बेटे की दूसरी शादी कर दें। हालांकि, दोनों के बीच कानूनी तौर पर तलाक नहीं हुआ था, बस आपसी सहमति से अलगाव जैसा हो गया था। उन्होंने बताया, रविवार को मैं खेत में आलू उखाड़ने गई थी। उसी समय सुषुम घास लाने जाने की जिद करने लगी, जबकि वह पहले कभी घास लाने नहीं गई थी। उसकी जिद के आगे मुझे उसे जाने देना पड़ा। उसकी दो छोटी बहनें भी घास लाने निकली थीं, लेकिन वे दूसरे रास्ते चली गईं। कुछ देर बाद गांव की महिलाओं ने मक्के के खेत में उसका खून से लथपथ शव देखा और हमें सूचना दी।


