बिहार राज्यसभा चुनाव के 3 बड़े मैसेज:तेजस्वी-ओवैसी की जोड़ी से क्या बदलेगी राजनीति, नीतीश को राहत; भाजपा पर प्रेशर बढ़ा, जानें कैसे

बिहार राज्यसभा चुनाव के 3 बड़े मैसेज:तेजस्वी-ओवैसी की जोड़ी से क्या बदलेगी राजनीति, नीतीश को राहत; भाजपा पर प्रेशर बढ़ा, जानें कैसे

बिहार के राज्यसभा की 5 सीटों पर NDA ने शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस के 3 और RJD के 1 विधायकों के वोटिंग से गैर हाजिर होने के कारण महागठबंधन के इकलौते कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) हार गए हैं। 12 साल बाद हुए राज्य में राज्यसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। तेजस्वी यादव और असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती नजदीकियां विपक्ष को नई ताकत दे रही हैं। वहीं, मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे नीतीश कुमार को थोड़ी राहत भी मिली है। राज्यसभा चुनाव के 3 बड़े मैसेज, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 1. ओवैसी ने भाजपा के बी टीम का दाग धोया ओवैसी की पार्टी AIMIM जहां कहीं भी चुनाव लड़ती है, कांग्रेस सहित अन्य विरोधी पार्टियां उनको भाजपा की B टीम कहती हैं। बिहार चुनाव में तो तेजस्वी यादव ने गठबंधन के सवाल पर ओवैसी को चरमपंथी तक कह दिया था। ओवैसी की पार्टी वह अब इस दाग को धोना चाहती हैं। इसलिए वह चुनाव से पहले से भी महागठबंधन में शामिल करने की मांग करती रही। राज्यसभा चुनाव में RJD को समर्थन देने की शर्त में सबसे बड़ी मांग भी यही थी। 2. तेजस्वी की मुस्लिम वोटरों में बनी रहेगी पैठ RJD और कांग्रेस का मुस्लिम आधार वोटर हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पहुंच भी इसी तबके के बीच है। बिहार जातीय गणना-2023 के मुताबिक, राज्य की 13 करोड़ आबादी में से 2.31 करोड़ मतलब 17.7% मुस्लिम हैं। राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 47 पर मुस्लिम वोटर निर्णायक हैं। इसमें से 11 पर 40% से ज्यादा, 7 पर 30% से ज्यादा और 29 सीटों पर 20% से 30% तक मुस्लिम वोटर हैं। सीमांचल के कुछ इलाके में 70% तक मुस्लिम हैं। पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ओवैसी तेजस्वी यादव पर हमलावर रहे। तेजस्वी के चरमपंथी वाले बयान को तो उन्होंने अपनी पहचान से जोड़ दिया। डिप्टी CM के नाम का ऐलान नहीं करने पर भी घेरा। इसका मुस्लिम वोटरों पर असर भी हुआ। इसे आंकड़ों से समझिए… राज्यसभा चुनाव में भले तेजस्वी यादव के कैंडिडेट की हार हुई है, लेकिन चुनाव ने दोनों को एक साथ कर दिया है। इससे मुस्लिम वोटरों में घट रही तेजस्वी की पैठ को मेंटेन किया जा सकता है। पॉलिटिकल एनालिस्ट सत्यभूषण सिंह कहते हैं, ‘तेजस्वी यादव ने बैक स्टेप कर AIMIM को साथ रखा है। इससे उनके प्रति मुस्लिमों के अंदर बढ़ रही दूरी कम हो सकती है। मुस्लिम वोटर एकजुट हो सकते हैं। हालांकि, एक नुकसान भी हो सकता है। अब भाजपा बिहार की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम के पिच पर ले जा सकती है।’ 3. भाजपा पर बढ़ सकता है प्रेशर, नीतीश को थोड़ी राहत 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में मजबूत बनकर उभरे नीतीश कुमार कमजोर हो गए हैं। रिजल्ट ऐसा है कि उनको भाजपा की बातें माननी पड़ रही है और मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है। लेकिन राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के प्रदर्शन से उनको राहत जरूर मिल सकती है। इससे अब भाजपा की बार्गेनिंग पावर कम हो सकती है। इसे ऐसे समझिए… पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की हार हुई है, लेकिन जैसी उम्मीद की जा रही थी, वैसी हार नहीं हुई है। एडी सिंह को एक्जेक्ट उतने वोट मिले हैं, जितने नीतीश कुमार को बिना भाजपा के सरकार बनाने के लिए चाहिए।’ केके लाल कहते हैं, ‘इससे नीतीश कुमार को सत्ता के समीकरण का एक ऑप्शन मिल गया। इसलिए अब संभव है कि भाजपा अब उतना दबाव नहीं बना पाएगी, जितना अभी बना रही थी। नीतीश की सत्ता में हिस्सेदारी अब मजबूत हो सकती है।’ बिहार के राज्यसभा की 5 सीटों पर NDA ने शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस के 3 और RJD के 1 विधायकों के वोटिंग से गैर हाजिर होने के कारण महागठबंधन के इकलौते कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) हार गए हैं। 12 साल बाद हुए राज्य में राज्यसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। तेजस्वी यादव और असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती नजदीकियां विपक्ष को नई ताकत दे रही हैं। वहीं, मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे नीतीश कुमार को थोड़ी राहत भी मिली है। राज्यसभा चुनाव के 3 बड़े मैसेज, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 1. ओवैसी ने भाजपा के बी टीम का दाग धोया ओवैसी की पार्टी AIMIM जहां कहीं भी चुनाव लड़ती है, कांग्रेस सहित अन्य विरोधी पार्टियां उनको भाजपा की B टीम कहती हैं। बिहार चुनाव में तो तेजस्वी यादव ने गठबंधन के सवाल पर ओवैसी को चरमपंथी तक कह दिया था। ओवैसी की पार्टी वह अब इस दाग को धोना चाहती हैं। इसलिए वह चुनाव से पहले से भी महागठबंधन में शामिल करने की मांग करती रही। राज्यसभा चुनाव में RJD को समर्थन देने की शर्त में सबसे बड़ी मांग भी यही थी। 2. तेजस्वी की मुस्लिम वोटरों में बनी रहेगी पैठ RJD और कांग्रेस का मुस्लिम आधार वोटर हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पहुंच भी इसी तबके के बीच है। बिहार जातीय गणना-2023 के मुताबिक, राज्य की 13 करोड़ आबादी में से 2.31 करोड़ मतलब 17.7% मुस्लिम हैं। राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 47 पर मुस्लिम वोटर निर्णायक हैं। इसमें से 11 पर 40% से ज्यादा, 7 पर 30% से ज्यादा और 29 सीटों पर 20% से 30% तक मुस्लिम वोटर हैं। सीमांचल के कुछ इलाके में 70% तक मुस्लिम हैं। पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ओवैसी तेजस्वी यादव पर हमलावर रहे। तेजस्वी के चरमपंथी वाले बयान को तो उन्होंने अपनी पहचान से जोड़ दिया। डिप्टी CM के नाम का ऐलान नहीं करने पर भी घेरा। इसका मुस्लिम वोटरों पर असर भी हुआ। इसे आंकड़ों से समझिए… राज्यसभा चुनाव में भले तेजस्वी यादव के कैंडिडेट की हार हुई है, लेकिन चुनाव ने दोनों को एक साथ कर दिया है। इससे मुस्लिम वोटरों में घट रही तेजस्वी की पैठ को मेंटेन किया जा सकता है। पॉलिटिकल एनालिस्ट सत्यभूषण सिंह कहते हैं, ‘तेजस्वी यादव ने बैक स्टेप कर AIMIM को साथ रखा है। इससे उनके प्रति मुस्लिमों के अंदर बढ़ रही दूरी कम हो सकती है। मुस्लिम वोटर एकजुट हो सकते हैं। हालांकि, एक नुकसान भी हो सकता है। अब भाजपा बिहार की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम के पिच पर ले जा सकती है।’ 3. भाजपा पर बढ़ सकता है प्रेशर, नीतीश को थोड़ी राहत 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में मजबूत बनकर उभरे नीतीश कुमार कमजोर हो गए हैं। रिजल्ट ऐसा है कि उनको भाजपा की बातें माननी पड़ रही है और मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है। लेकिन राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के प्रदर्शन से उनको राहत जरूर मिल सकती है। इससे अब भाजपा की बार्गेनिंग पावर कम हो सकती है। इसे ऐसे समझिए… पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की हार हुई है, लेकिन जैसी उम्मीद की जा रही थी, वैसी हार नहीं हुई है। एडी सिंह को एक्जेक्ट उतने वोट मिले हैं, जितने नीतीश कुमार को बिना भाजपा के सरकार बनाने के लिए चाहिए।’ केके लाल कहते हैं, ‘इससे नीतीश कुमार को सत्ता के समीकरण का एक ऑप्शन मिल गया। इसलिए अब संभव है कि भाजपा अब उतना दबाव नहीं बना पाएगी, जितना अभी बना रही थी। नीतीश की सत्ता में हिस्सेदारी अब मजबूत हो सकती है।’  

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