अनंत सिंह के राजनीति से संन्यास लेने के 3 कारण:बढ़ती उम्र, कोर्ट का चक्कर, लंदन रिटर्न बेटा संभालेगा बाढ़, मोकामा की राजनीतिक विरासत

अनंत सिंह के राजनीति से संन्यास लेने के 3 कारण:बढ़ती उम्र, कोर्ट का चक्कर, लंदन रिटर्न बेटा संभालेगा बाढ़, मोकामा की राजनीतिक विरासत

‘कह दिए एक गुल, उ नहीं रहेंगे त हम इलेक्शन न लड़ेंगे। अब बाल-बच्चा लड़ेगा।’ यह बयान JDU के बाहुबली नेता अनंत सिंह ने दिया है। वह पटना के मोकामा से विधायक हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में बेऊर जेल में बंद हैं। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए वोट डालने विधानसभा पहुंचे। इस दौरान ऐलान किया कि नीतीश कुमार बिहार में नहीं रहेंगे तो वह भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। अपने बेटे को लड़ाएंगे। अनंत सिंह ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला क्यों किया? अपने बेटों को राजनीति में क्यों उतार रहे हैं? पढ़िए रिपोर्ट…। एम्बुलेंस में सवार होकर जेल से आए अनंत सिंह

राज्यसभा चुनाव में सभी 5 सीट जीतने के लिए NDA के सभी 202 विधायकों का मतदान करना जरूरी था। जदयू विधायक अनंत सिंह जेल में बंद हैं। वह वोट देने बाहर आएंगे या नहीं, इसपर संशय था। अनंत ने कोर्ट में वोटिंग की इजाजत देने की गुहार लगाई। अनुमति मिलने पर सोमवार को विधानसभा पहुंचे। उन्हें जेल से बिहार सरकार की एम्बुलेंस में बिठाकर विधानसभा लाया गया। वोटिंग के बाद इसी एम्बुलेंस से जेल लौट गए। सफेद रंग के शर्ट-पैंट और हल्के भूरे रंग का चश्मा पहने अनंत सिंह एम्बुलेंस से उतरे तो सबकी नजर उन पर टिक गई। वह माथे पर तिलक लगाए हुए थे। मीडियाकर्मियों ने नीतीश के राज्यसभा जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने खुद के आगे चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया। अनंत सिंह के कितने बेटे हैं? अनंत सिंह की पत्नी का नाम नीलम देवी है। उनके 5 बच्चे (तीन बेटा, दो बेटी) हैं। तीन बेटों के नाम अभिषेक कुमार, अंकित कुमार और अभिनव कुमार हैं। अभिषेक और अंकित जुड़वा हैं। उम्र 25 साल। खुद सिर्फ साक्षर रहे अनंत सिंह ने अपने बेटों की पढ़ाई पर खूब ध्यान दिया है। अंकित और अभिषेक ने नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पढ़ने के लिए लंदन गए थे। वहीं, अभिनव दिल्ली में मां के साथ रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले दिनों अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी अपने दोनों बड़े बेटों (अंकित और अभिषेक) के साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलीं। अपने बेटों के चुनाव लड़ने को लेकर अनंत सिंह ने सोमवार को कहा, ‘मैंने नीतीश जी को वोट दिया है। उनके राज्यसभा जाने पर क्या होगा, मुझे कुछ नहीं पता। मैं जेल से आया हूं। आगे मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। विधायक बनना होगा तो मेरा बेटा बनेगा। वह पढ़ा-लिखा है। सब काम करने लायक है।’ अब 3 पॉइंट में जानिए, क्यों अनंत सिंह बेटे को सौंप रहे सियासी विरासत 1. बढ़ती उम्र और कानूनी पचड़ा चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अनंत सिंह 64 साल हैं। 28 क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। अगर तय समय पर अगला विधानसभा चुनाव हुआ तो 2030 में होगा। तब तक अनंत सिंह 69 साल के हो जाएंगे। सीनियर जर्नलिस्ट रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अगले चुनाव तक अनंत सिंह की उम्र ज्यादा हो चुकी होगी। अब बेटों की उम्र भी 25 साल हो गई है। इसलिए वह बहुत सलीके से आगे की चाल चल रहे हैं। वह जेल जाने से पहले ही धीरे-धीरे बेटों को पब्लिक के बीच करने लगे थे। कभी घोड़े की सवारी कराते थे तो कभी साथ-साथ घूमाते थे।’ रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अनंत सिंह जानते हैं कि वह कभी भी किसी केस में फंस सकते हैं। इसलिए समय रहते सेकंड लाइन तैयार करनी चाहिए। यही कारण है कि वह बेटों को लोगों के साथ-साथ नेताओं से भी मिला रहे थे।’ रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अनंत सिंह की पहचान बाहुबली और विवादित नेता की रही है। इसलिए वह बेटों के रूप में नई पीढ़ी और नया चेहरा जनता के सामने ला रहे हैं। उनकी तुलना में बेटों की इमेज सॉफ्ट है। इससे नए वोटर जुड़ सकते हैं। JDU को भी आलोचना का सामना नहीं करना पड़ेगा।’ दुलारचंद हत्याकांड में हो सकती है उम्रकैद अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत गिरफ्तार किया गया है। मतलब हत्या का आरोप है। इस धारा के तहत अनंत सिंह को दोषी पाया गया तो उम्रकैद या फांसी तक की सजा हो सकती है। पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह बताते हैं, ‘गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया है। निचली अदालत से जमानत नहीं मिली है। हाईकोर्ट से बेल मिल सकती है। हालांकि, अभी कुछ समय लग सकता है।’ सर्वदेव सिंह बताते हैं, ‘अब तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सबसे मजबूत सबूत माना जा रहा है। इसके अनुसार, दुलारचंद यादव की हत्या गोली लगने से नहीं हुई है बल्कि लंग्स, हर्ट फेल्योर से हुई है। उन्हें गाड़ी चढ़ाकर मारा गया। ऐसे में अगर अनंत सिंह पर कोर्ट में आरोप साबित हुआ तो आजीवन कारावास हो सकती है। हालांकि सबूत ही तय करेंगे कि सजा होगी या नहीं और कितनी होगी।’ 2. बाढ़-मोकामा में परिवार की पकड़ को बनाए रखना बीते 35 साल में मोकामा विधानसभा में अनंत सिंह परिवार का दबदबा है। सिर्फ एक बार 2000 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। परिवार का असर सिर्फ मोकामा में ही नहीं, बाढ़ और इससे सटे मुंगेर, तारापुर, जमालपुर, शेखपुरा, बरबीघा, लखीसराय और सूर्यगढ़ा विधानसभा सीटों पर भी है। सीनियर जर्नलिस्ट रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अनंत सिंह के साथ सिर्फ उनकी जाति (भूमिहार) के लोग ही नहीं हैं। उनके साथ थोड़ा बहुत हर समाज का समर्थन है। आजकल के युवाओं को रॉबिनहुड टाइप नेता खासा पसंद आते हैं। अनंत सिंह ने अपनी छवि कुछ इसी तरह बना ली है।’ रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘3 दशक से ज्यादा समय से जिस इलाके पर पकड़ है, उस इलाके को कोई भी नेता यूं ही नहीं छोड़ेगा। वह अपनी पकड़ को बनाए रखने का पुरजोर प्रयास करेगा। अनंत सिंह भी इलाके में अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं।’ 3. भविष्य की राजनीतिक सुरक्षा चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अनंत सिंह पर 28 क्रिमिनल केस है। बिहार यूनिवर्सिटी के प्रो. प्रमोद कुमार कहते हैं, ‘अनंत सिंह राजनीति की शक्ति को जानते हैं। राजनीति में परिवार का कोई सदस्य रहने से मुश्किल समय में राजनीतिक संरक्षण मिल सकता है। प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है। घर का कोई राजनीति में रहेगा तो पार्टी नेतृत्व से संपर्क बना रहेगा।’ ‘कह दिए एक गुल, उ नहीं रहेंगे त हम इलेक्शन न लड़ेंगे। अब बाल-बच्चा लड़ेगा।’ यह बयान JDU के बाहुबली नेता अनंत सिंह ने दिया है। वह पटना के मोकामा से विधायक हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में बेऊर जेल में बंद हैं। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए वोट डालने विधानसभा पहुंचे। इस दौरान ऐलान किया कि नीतीश कुमार बिहार में नहीं रहेंगे तो वह भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। अपने बेटे को लड़ाएंगे। अनंत सिंह ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला क्यों किया? अपने बेटों को राजनीति में क्यों उतार रहे हैं? पढ़िए रिपोर्ट…। एम्बुलेंस में सवार होकर जेल से आए अनंत सिंह

राज्यसभा चुनाव में सभी 5 सीट जीतने के लिए NDA के सभी 202 विधायकों का मतदान करना जरूरी था। जदयू विधायक अनंत सिंह जेल में बंद हैं। वह वोट देने बाहर आएंगे या नहीं, इसपर संशय था। अनंत ने कोर्ट में वोटिंग की इजाजत देने की गुहार लगाई। अनुमति मिलने पर सोमवार को विधानसभा पहुंचे। उन्हें जेल से बिहार सरकार की एम्बुलेंस में बिठाकर विधानसभा लाया गया। वोटिंग के बाद इसी एम्बुलेंस से जेल लौट गए। सफेद रंग के शर्ट-पैंट और हल्के भूरे रंग का चश्मा पहने अनंत सिंह एम्बुलेंस से उतरे तो सबकी नजर उन पर टिक गई। वह माथे पर तिलक लगाए हुए थे। मीडियाकर्मियों ने नीतीश के राज्यसभा जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने खुद के आगे चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया। अनंत सिंह के कितने बेटे हैं? अनंत सिंह की पत्नी का नाम नीलम देवी है। उनके 5 बच्चे (तीन बेटा, दो बेटी) हैं। तीन बेटों के नाम अभिषेक कुमार, अंकित कुमार और अभिनव कुमार हैं। अभिषेक और अंकित जुड़वा हैं। उम्र 25 साल। खुद सिर्फ साक्षर रहे अनंत सिंह ने अपने बेटों की पढ़ाई पर खूब ध्यान दिया है। अंकित और अभिषेक ने नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पढ़ने के लिए लंदन गए थे। वहीं, अभिनव दिल्ली में मां के साथ रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले दिनों अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी अपने दोनों बड़े बेटों (अंकित और अभिषेक) के साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलीं। अपने बेटों के चुनाव लड़ने को लेकर अनंत सिंह ने सोमवार को कहा, ‘मैंने नीतीश जी को वोट दिया है। उनके राज्यसभा जाने पर क्या होगा, मुझे कुछ नहीं पता। मैं जेल से आया हूं। आगे मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। विधायक बनना होगा तो मेरा बेटा बनेगा। वह पढ़ा-लिखा है। सब काम करने लायक है।’ अब 3 पॉइंट में जानिए, क्यों अनंत सिंह बेटे को सौंप रहे सियासी विरासत 1. बढ़ती उम्र और कानूनी पचड़ा चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अनंत सिंह 64 साल हैं। 28 क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। अगर तय समय पर अगला विधानसभा चुनाव हुआ तो 2030 में होगा। तब तक अनंत सिंह 69 साल के हो जाएंगे। सीनियर जर्नलिस्ट रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अगले चुनाव तक अनंत सिंह की उम्र ज्यादा हो चुकी होगी। अब बेटों की उम्र भी 25 साल हो गई है। इसलिए वह बहुत सलीके से आगे की चाल चल रहे हैं। वह जेल जाने से पहले ही धीरे-धीरे बेटों को पब्लिक के बीच करने लगे थे। कभी घोड़े की सवारी कराते थे तो कभी साथ-साथ घूमाते थे।’ रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अनंत सिंह जानते हैं कि वह कभी भी किसी केस में फंस सकते हैं। इसलिए समय रहते सेकंड लाइन तैयार करनी चाहिए। यही कारण है कि वह बेटों को लोगों के साथ-साथ नेताओं से भी मिला रहे थे।’ रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अनंत सिंह की पहचान बाहुबली और विवादित नेता की रही है। इसलिए वह बेटों के रूप में नई पीढ़ी और नया चेहरा जनता के सामने ला रहे हैं। उनकी तुलना में बेटों की इमेज सॉफ्ट है। इससे नए वोटर जुड़ सकते हैं। JDU को भी आलोचना का सामना नहीं करना पड़ेगा।’ दुलारचंद हत्याकांड में हो सकती है उम्रकैद अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत गिरफ्तार किया गया है। मतलब हत्या का आरोप है। इस धारा के तहत अनंत सिंह को दोषी पाया गया तो उम्रकैद या फांसी तक की सजा हो सकती है। पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह बताते हैं, ‘गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया है। निचली अदालत से जमानत नहीं मिली है। हाईकोर्ट से बेल मिल सकती है। हालांकि, अभी कुछ समय लग सकता है।’ सर्वदेव सिंह बताते हैं, ‘अब तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सबसे मजबूत सबूत माना जा रहा है। इसके अनुसार, दुलारचंद यादव की हत्या गोली लगने से नहीं हुई है बल्कि लंग्स, हर्ट फेल्योर से हुई है। उन्हें गाड़ी चढ़ाकर मारा गया। ऐसे में अगर अनंत सिंह पर कोर्ट में आरोप साबित हुआ तो आजीवन कारावास हो सकती है। हालांकि सबूत ही तय करेंगे कि सजा होगी या नहीं और कितनी होगी।’ 2. बाढ़-मोकामा में परिवार की पकड़ को बनाए रखना बीते 35 साल में मोकामा विधानसभा में अनंत सिंह परिवार का दबदबा है। सिर्फ एक बार 2000 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। परिवार का असर सिर्फ मोकामा में ही नहीं, बाढ़ और इससे सटे मुंगेर, तारापुर, जमालपुर, शेखपुरा, बरबीघा, लखीसराय और सूर्यगढ़ा विधानसभा सीटों पर भी है। सीनियर जर्नलिस्ट रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘अनंत सिंह के साथ सिर्फ उनकी जाति (भूमिहार) के लोग ही नहीं हैं। उनके साथ थोड़ा बहुत हर समाज का समर्थन है। आजकल के युवाओं को रॉबिनहुड टाइप नेता खासा पसंद आते हैं। अनंत सिंह ने अपनी छवि कुछ इसी तरह बना ली है।’ रमाकांत चंदन कहते हैं, ‘3 दशक से ज्यादा समय से जिस इलाके पर पकड़ है, उस इलाके को कोई भी नेता यूं ही नहीं छोड़ेगा। वह अपनी पकड़ को बनाए रखने का पुरजोर प्रयास करेगा। अनंत सिंह भी इलाके में अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं।’ 3. भविष्य की राजनीतिक सुरक्षा चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अनंत सिंह पर 28 क्रिमिनल केस है। बिहार यूनिवर्सिटी के प्रो. प्रमोद कुमार कहते हैं, ‘अनंत सिंह राजनीति की शक्ति को जानते हैं। राजनीति में परिवार का कोई सदस्य रहने से मुश्किल समय में राजनीतिक संरक्षण मिल सकता है। प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है। घर का कोई राजनीति में रहेगा तो पार्टी नेतृत्व से संपर्क बना रहेगा।’  

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