सड़कें अब लोगों के लिए सुरक्षित नहीं:घर, स्कूल-कॉलेज व मंदिर के सामने ज्यादा हादसे सिर्फ एक साल में तेज रफ्तार वाहनों से 98 की मौत

सड़कें अब लोगों के लिए सुरक्षित नहीं:घर, स्कूल-कॉलेज व मंदिर के सामने ज्यादा हादसे सिर्फ एक साल में तेज रफ्तार वाहनों से 98 की मौत

ग्वालियर की सड़कें अब लोगों के लिए सुरक्षित नहीं रहीं। शहर और हाईवे पर रोज औसतन 5 सड़क हादसे हो रहे हैं। हर पांच में से एक व्यक्ति की मौत हो रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी से दिसंबर 2025 तक जिले में 1951 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 377 लोगों की जान चली गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां लोगों को सबसे ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए, उन्हीं जगहों के सामने तेज रफ्तार वाहन लोगों को कुचल रहे हैं। घरों के सामने, धार्मिक स्थलों के पास, कॉलेज-स्कूल और हाईवे के ढाबों के सामने भी हादसे हो रहे हैं। सिर्फ पांच तरह के स्पॉटों पर ही बीते एक साल में 98 लोगों की मौत अलग-अलग सड़क हादसों में हो चुकी हैं। कॉलेजों के सामने 11 लोगों ने तोड़ा दम, एकसाथ 5 दोस्तों की हुई थी मौत कॉलेजों के आसपास भी सड़कें खतरनाक साबित हो रही हैं। मालवा कॉलेज (सिरोल) के सामने ही 5 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा PGV कॉलेज (जनकगंज), IIITM (हजीरा), MITS (गोला का मंदिर), IHM (महाराजपुरा), MP सिटी कॉलेज (विश्वविद्यालय) और शुक्लाहारी कॉलेज (गिजोर्रा) के सामने एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। यानी कॉलेजों के सामने ही 11 लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं। स्कूलों के आसपास 14 लोगों की जान गई स्कूलों के आसपास भी हादसों का खतरा कम नहीं है। पोट्टर स्कूल (झांसी रोड) और सिंध रोड स्कूल (डबरा) के पास दो-दो लोगों की मौत हुई। जबकि KV-4, पद्मा विद्यालय, सरकारी स्कूल (बहोड़ापुर), SHDM स्कूल, ब्लू हार्ट स्कूल (डबरा), DIPS और IPS स्कूल (डबरा जेल रोड) के पास एक-एक व्यक्ति की जान गई। कुल मिलाकर स्कूलों के आसपास 14 लोगों की मौत दर्ज हुई है। ढाबों और होटलों के सामने 22 लोगों की मौत हाईवे पर बने ढाबों और होटलों के सामने भी तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे बढ़ रहे हैं। पंजाब खालसा ढाबा (आंतरी) के सामने 2 लोगों की मौत हुई। याराना ढाबा, बाबा बघेल ढाबा, मामा ढाबा, महफिल पंजाब ढाबा, फौजी ढाबा, लक्ष्मण ढाबा, कृष्णा ढाबा, बिट्टू सरदार ढाबा, अशोक ढाबा, वाहेगुरु ढाबा, काके दा ढाबा और शेर-ए-पंजाब होटल के सामने एक-एक मौत हुई। धार्मिक स्थलों के सामने 51 लोगों की मौत मंदिर, आश्रम और गुरुद्वारों के सामने भी सड़कें सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक ऐसे स्थानों के सामने 51 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है। इनमें शीतला माता मंदिर, सिद्ध बाबा मंदिर (बिलौआ) और काली माता मंदिर (घाटीगांव) के सामने 13 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा गणेश मंदिर, शनिदेव मंदिर गिरराज मंदिर टेकनपुर गुरुद्वारा के पास भी मौतें दर्ज हुई। संवेदनशील जगहों पर लगेंगे वाहन धीमे चलाएं बोर्ड
यातायात पुलिस सड़क हादसों को रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। 2024 की तुलना में 2025 में हादसों की संख्या कम हुई है, लेकिन मौत के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। घर, स्कूल, कॉलेज, धार्मिक स्थल और ढाबों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहां हादसे और मौतें हुई हैं, वहां “वाहन धीमे चलाएं” के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। साथ ही वाहन चालकों को जागरूक किया जा रहा है कि वे वाहन नियंत्रित गति में चलाएं, ताकि खुद के साथ दूसरों की जान भी सुरक्षित रहे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नशे में वाहन न चलाएं और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। -अजीत सिंह चौहान, डीएसपी यातायात पुलिस

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