राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दायरा बढ़ा:संघ की 12 हजार शाखाएं, हिंदू सम्मेलन में पुरुषों से 6 लाख ज्यादा महिलाएं पहुंचीं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दायरा बढ़ा:संघ की 12 हजार शाखाएं, हिंदू सम्मेलन में पुरुषों से 6 लाख ज्यादा महिलाएं पहुंचीं

प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का लगातार दायरा बढ़ रहा है। राजस्थान में पिछले एक साल में 1352 शाखाएं बढ़ी हैं। प्रदेश में अब 12 हजार 109 शाखाएं लग रही हैं। वहीं 5 हजार 950 मिलन संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 7 हजार 910 स्थानों पर संगठनात्मक कार्य संचालित हो रहा है। जबकि पिछले साल (2024-25) प्रदेश में 6 हजार 839 स्थानों पर 10 हजार 757 शाखाएं और 5 हजार 311 मिलन संचालित हुए थे। प्रदेश में पिछले एक साल में 7175 हिंदू सम्मेलन हुए। इन सम्मेलनों में 76 लाख 30 हजार 965 लोगों की सहभागिता रही। इन हिंदू सम्मेलनों में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं शामिल हुई। इन सम्मेलनों में 35 लाख 03 हजार 278 पुरुष और 41 लाख 26 हजार 687 महिलाएं शामिल हुईं। क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल ने सोमवार को जयपुर स्थित सेवा सदन में हरियाणा के समालखा में हुई तीन दिवसीय (13 से 15 मार्च) अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विजयादशमी तक शाखाओं की संख्या ओर बढ़ाई जाएगी। इस दौरान उन्होंने जातीय जनगणना और दो से ज्यादा बच्चों को लेकर संघ के विचार भी साझा किए। अब संघ में तीन प्रांत की जगह होंगे पांच संभाग
संघ के नए स्ट्रक्चर में अब राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा और बीकानेर पांच संभाग होंगे। प्रांत प्रचारक की जगह अब संभाग प्रचारक होंगे। कार्यक्षेत्र भौगोलिक आधार पर तय किया जाएगा। राज्य में अभी संघ का कार्य क्षेत्र तीन प्रांत जयपुर, जोधपुर और चित्तौड़गढ़ में विभाजित है। नई व्यवस्था लागू होने के साथ प्रांत प्रणाली समाप्त हो जाएगी। नए स्ट्रक्चर में राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू, उत्तरप्रदेश और पंजाब को मिलाकर एक क्षेत्र बनाया जाएगा। नए स्ट्रक्चर का मकसद छोटी इकाइयों पर ज्यादा फोकस करना है। लेह-अंडमान तक पहुंचीं नियमित शाखाएं
डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल ने बताया कि संघ अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह तथा दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, जहां नियमित रूप से शाखाएं संचालित हो रही हैं। देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी संघ कार्य के प्रति उत्साह दिखाई दे रहा है। अंडमान के नौ प्रमुख द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक की मौजूद में आयोजित हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए। अरुणाचल प्रदेश में 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही। जातिगत जनगणना के नाम पर समाज को बांटा तो संघ विरोध करेगा रमेशचंद्र अग्रवाल ने कहा कि संघ का स्पष्ट मानना है कि अच्छे शासन, अच्छी प्रकार की योजनाएं बनाने के लिए जातिगत जनगणना होती है तो संघ को आपत्ति नहीं है। लेकिन जातिगत जनगणना के नाम पर समाज को बांटने वाले कोई भी प्रश्न होते हैं तो संघ उसका प्रतिकार करेगा। दो से ज्यादा संतान के प्रश्न पर अग्रवाल ने कहा कि हिंदू समाज की जनसंख्या घट रही है। न्यूनतम चार-पांच बच्चे भी चलेंगे।

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