इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही प्रतिस्पर्धा के बीच ओला इलेक्ट्रिक ने अपने कारोबार को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी अपनी बैटरी निर्माण इकाई में हिस्सेदारी बेचकर लगभग 2000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की योजना पर काम कर रही है।
बता दें कि कंपनी की बैटरी इकाई ओला सेल टेक्नोलॉजीज तमिलनाडु में स्थित एक बड़ी लिथियम आयन बैटरी निर्माण इकाई का संचालन करती है। वर्तमान में इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता करीब 1.5 गीगावाट घंटा बताई जा रही है, जिसे इस वित्त वर्ष के अंत तक बढ़ाकर लगभग 6 गीगावाट घंटा करने की योजना है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दो प्रमुख निवेश परामर्श कंपनियों को जिम्मेदारी दी गई है। इन संस्थाओं का काम संभावित निवेशकों से बातचीत कर निवेश जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करना होगा।
गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब कंपनी अपने कारोबार में सुधार लाने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी निर्माण ढांचा इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, इसलिए इस परियोजना का मूल्यांकन भी बाजार के लिए अहम साबित हो सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस परियोजना में कुछ बड़े वैश्विक निवेशकों ने भी रुचि दिखाई है। बताया जा रहा है कि कुछ संप्रभु संपत्ति कोष सहित कई वित्तीय संस्थाएं इस निवेश अवसर पर नजर बनाए हुए हैं।
बता दें कि तमिलनाडु में स्थापित यह बैटरी निर्माण संयंत्र लगभग 3500 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश से तैयार किया गया है। इस परियोजना को भारत में बैटरी निर्माण को स्थानीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत अभी भी बड़ी मात्रा में बैटरी सेल आयात पर निर्भर है। ऐसे में घरेलू स्तर पर बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाने से इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह संयंत्र केवल दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ही नहीं बल्कि ऊर्जा भंडारण से जुड़े कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी बैटरी उत्पाद उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।
कंपनी के बैटरी नवाचार केंद्र में दुनियाभर की प्रमुख कंपनियों से जुड़े दो सौ से अधिक विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। इस केंद्र में अब तक करीब चार सौ पेटेंट से जुड़ा शोध कार्य विकसित किया गया है।
गौरतलब है कि यहां बैटरी तकनीक के कई अलग-अलग रूपों पर काम किया जा रहा है, जिनमें विभिन्न रासायनिक संरचनाओं और आकारों वाली बैटरियां शामिल हैं।
भारत सरकार भी वर्ष 2030 तक ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य तय कर चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार जब सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा तो ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की मांग भी तेजी से बढ़ेगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी ने घरेलू उपयोग के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी विकसित की है और आने वाले समय में व्यावसायिक स्तर पर ऊर्जा भंडारण समाधान पेश करने की योजना बना रही है।
इसके अलावा कंपनी ने बैटरी निर्माण में एक नई तकनीक भी विकसित की है जिसे ड्राई इलेक्ट्रोड प्रक्रिया कहा जाता है। इसे लिथियम आयन बैटरी उत्पादन की महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक माना जाता है।
इसी प्रक्रिया के जरिए कंपनी ने भारत सेल नाम से नई बैटरी विकसित की है, जिसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया जा चुका है और इसे पिछले छह महीनों से कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना सफल रहती है तो इससे भारत में बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण उद्योग को नई दिशा मिल सकती है।


