दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित उर्मिला इंटरप्राइजेज फैक्ट्री पिछले चार दिन से बंद है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं होने के कारण ठप पड़ा है। यहां काम करने वाले करीब 40 कारीगर और मजदूर बेरोजगार होकर बैठे हैं। इस फैक्ट्री में फैन, रस, बन, ब्रेड, बर्गर, टोस्ट समेत अन्य खाद्य सामग्री का निर्माण किया जाता है, जिसकी सप्लाई बिहार के अलग-अलग जिलों में की जाती है। फैक्ट्री पूरी तरह कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर है और प्रतिदिन करीब 10-12 गैस सिलेंडर की खपत होती है। एक महीने में लगभग 300 सिलेंडर खर्च होते हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस की आपूर्ति नहीं होने के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। जिससे मजदूरी की परेशानी बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल से काम करने आए हैं मजदूर कारीगर राजीव मंडल ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण काम बंद पड़ा हुआ है। कई दिनों से खाली बैठे हुए हैं। समझ में नहीं आ रहा है, क्या करें। अगर काम नहीं करेंगे तो घर कैसे चलेगा। उत्पादों के निर्माण के लिए रोजाना करीब 12 सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है, लेकिन सप्लाई नहीं होने से उत्पादन पूरी तरह रुक गया है। मेरे साथ कई मजदूर पश्चिम बंगाल से यहां काम करने आए हैं। काम बंद होने से आर्थिक परेशानी भी बढ़ने लगी है। काम नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी मजदूर छोटू सिंह ने बताया फैक्ट्री में एक महीने में लगभग 300 सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। लेकिन पिछले चार दिनों से गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे कंपनी का काम पूरी तरह ठप हो गया है। पहले नीलम भारत एजेंसी से गैस सिलेंडर मिलता था। फिलहाल आपूर्ति नहीं हो रही है। सभी के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या कंपनी के संचालक प्रभाकर झा ने बताया कि फैक्ट्री में लगभग 40 मजदूर काम करते हैं, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। मजबूरी में पिछले चार दिनों से फैक्ट्री बंद करनी पड़ी है। मजदूर रोजाना फैक्ट्री पहुंचकर पूछते हैं कि काम कब से शुरू होगा। इसी काम से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। जब भी एजेंसी से संपर्क किया जाता है तो वहां से दो-तीन दिन का समय और मांगा जाता है, लेकिन अब तक गैस की नियमित आपूर्ति नहीं हो सकी है। आज भी एजेंसी से संपर्क करने की कोशिश की गई, फोन नहीं उठाया गया। निर्माण कार्य पूरी तरह गैस पर निर्भर है। फैक्ट्री में तीन ओवन रूम हैं। सभी मशीनें गैस से ही संचालित होती हैं। पिछले 25 दिनों से गैस की किल्लत बनी हुई है। काफी प्रयास के बाद चार दिन पहले 10 सिलेंडर मिले थे। जिला प्रशासन से लगाई गुहार फैक्ट्री के संचालक प्रभाकर झा ने दरभंगा के जिलाधिकारी से अपील करते हुए कहा कि जल्द से जल्द कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए। ताकि फैक्ट्री फिर से शुरू हो सके और 40 मजदूरों का रोजगार बचाया जा सके। मजदूरों को बैठे-बैठे भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे कंपनी पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित उर्मिला इंटरप्राइजेज फैक्ट्री पिछले चार दिन से बंद है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं होने के कारण ठप पड़ा है। यहां काम करने वाले करीब 40 कारीगर और मजदूर बेरोजगार होकर बैठे हैं। इस फैक्ट्री में फैन, रस, बन, ब्रेड, बर्गर, टोस्ट समेत अन्य खाद्य सामग्री का निर्माण किया जाता है, जिसकी सप्लाई बिहार के अलग-अलग जिलों में की जाती है। फैक्ट्री पूरी तरह कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर है और प्रतिदिन करीब 10-12 गैस सिलेंडर की खपत होती है। एक महीने में लगभग 300 सिलेंडर खर्च होते हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस की आपूर्ति नहीं होने के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। जिससे मजदूरी की परेशानी बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल से काम करने आए हैं मजदूर कारीगर राजीव मंडल ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण काम बंद पड़ा हुआ है। कई दिनों से खाली बैठे हुए हैं। समझ में नहीं आ रहा है, क्या करें। अगर काम नहीं करेंगे तो घर कैसे चलेगा। उत्पादों के निर्माण के लिए रोजाना करीब 12 सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है, लेकिन सप्लाई नहीं होने से उत्पादन पूरी तरह रुक गया है। मेरे साथ कई मजदूर पश्चिम बंगाल से यहां काम करने आए हैं। काम बंद होने से आर्थिक परेशानी भी बढ़ने लगी है। काम नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी मजदूर छोटू सिंह ने बताया फैक्ट्री में एक महीने में लगभग 300 सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। लेकिन पिछले चार दिनों से गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे कंपनी का काम पूरी तरह ठप हो गया है। पहले नीलम भारत एजेंसी से गैस सिलेंडर मिलता था। फिलहाल आपूर्ति नहीं हो रही है। सभी के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या कंपनी के संचालक प्रभाकर झा ने बताया कि फैक्ट्री में लगभग 40 मजदूर काम करते हैं, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। मजबूरी में पिछले चार दिनों से फैक्ट्री बंद करनी पड़ी है। मजदूर रोजाना फैक्ट्री पहुंचकर पूछते हैं कि काम कब से शुरू होगा। इसी काम से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। जब भी एजेंसी से संपर्क किया जाता है तो वहां से दो-तीन दिन का समय और मांगा जाता है, लेकिन अब तक गैस की नियमित आपूर्ति नहीं हो सकी है। आज भी एजेंसी से संपर्क करने की कोशिश की गई, फोन नहीं उठाया गया। निर्माण कार्य पूरी तरह गैस पर निर्भर है। फैक्ट्री में तीन ओवन रूम हैं। सभी मशीनें गैस से ही संचालित होती हैं। पिछले 25 दिनों से गैस की किल्लत बनी हुई है। काफी प्रयास के बाद चार दिन पहले 10 सिलेंडर मिले थे। जिला प्रशासन से लगाई गुहार फैक्ट्री के संचालक प्रभाकर झा ने दरभंगा के जिलाधिकारी से अपील करते हुए कहा कि जल्द से जल्द कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए। ताकि फैक्ट्री फिर से शुरू हो सके और 40 मजदूरों का रोजगार बचाया जा सके। मजदूरों को बैठे-बैठे भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे कंपनी पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।


