पाकुड़ शहर के केकेएम कॉलेज के आदिवासी कल्याण बालक छात्रावास परिसर में बाहा पर्व मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र-छात्राएं और समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मसीह मरांडी ने सभी उपस्थित लोगों को पर्व की बधाई दी। उन्होंने बाहा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा है और हमें प्रकृति की रक्षा का संदेश देता है। उन्होंने आपसी भाईचारे के साथ रहने की सीख पर भी जोर दिया। नायकी और कुडाम नायकी ने सखुआ के फूलों की पूजा की अतिथि के संबोधन से पहले, नायकी छोटू मरांडी, कुडाम नायकी राजेन मरांडी और गुडीत बड़का मुर्मू ने परंपरागत तरीके से जाहेर थान की पूजा-अर्चना की। इसके बाद नायकी और कुडाम नायकी ने सखुआ के फूलों की पूजा की। उपस्थित अतिथियों, महिलाओं और पुरुषों को सखुआ के पुष्प भेंट किए गए। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे पर पानी छिड़क कर बाहा पर्व का आनंद लिया। आदिवासी छात्र-छात्राओं सहित अन्य स्थानों से आए आदिवासी समाज के लोग मांदर की थाप पर घंटों झूमते रहे। पेड़ों पर नए पत्ते आने की शुरुआत में इस पर्व का आयोजन होता है बाहा पर्व के अध्यक्ष अंशु टुडू ने बताया कि यह पर्व फागुन के दूसरे सप्ताह में मनाया जाता है। प्रकृति के नियमानुसार, पेड़ों पर नए पत्ते आने की शुरुआत में इस पर्व का आयोजन होता है। यहीं से आदिवासी संथाल समुदाय के लोग बाहा पर्व की शुरुआत करते हैं। यह पर्व आदिवासी समुदाय में काफी महत्व रखता है और ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसमें सखुआ के फूल का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर सीबू टुडू, कमल मुर्मू, नवीन हसदा, अंशु टुडू, नवीन सोरेन, जैसन सोरेन, सबीना मुर्मू, रेनू मरांडी, पूनम हेंब्रम, अजय हेंब्रम, रोजत मरांडी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। पर्व को लेकर विगत एक माह से तैयारियां की जा रही थीं और छात्र-छात्राएं इसे मनाने के लिए काफी उत्साहित थे। पाकुड़ शहर के केकेएम कॉलेज के आदिवासी कल्याण बालक छात्रावास परिसर में बाहा पर्व मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र-छात्राएं और समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मसीह मरांडी ने सभी उपस्थित लोगों को पर्व की बधाई दी। उन्होंने बाहा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा है और हमें प्रकृति की रक्षा का संदेश देता है। उन्होंने आपसी भाईचारे के साथ रहने की सीख पर भी जोर दिया। नायकी और कुडाम नायकी ने सखुआ के फूलों की पूजा की अतिथि के संबोधन से पहले, नायकी छोटू मरांडी, कुडाम नायकी राजेन मरांडी और गुडीत बड़का मुर्मू ने परंपरागत तरीके से जाहेर थान की पूजा-अर्चना की। इसके बाद नायकी और कुडाम नायकी ने सखुआ के फूलों की पूजा की। उपस्थित अतिथियों, महिलाओं और पुरुषों को सखुआ के पुष्प भेंट किए गए। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे पर पानी छिड़क कर बाहा पर्व का आनंद लिया। आदिवासी छात्र-छात्राओं सहित अन्य स्थानों से आए आदिवासी समाज के लोग मांदर की थाप पर घंटों झूमते रहे। पेड़ों पर नए पत्ते आने की शुरुआत में इस पर्व का आयोजन होता है बाहा पर्व के अध्यक्ष अंशु टुडू ने बताया कि यह पर्व फागुन के दूसरे सप्ताह में मनाया जाता है। प्रकृति के नियमानुसार, पेड़ों पर नए पत्ते आने की शुरुआत में इस पर्व का आयोजन होता है। यहीं से आदिवासी संथाल समुदाय के लोग बाहा पर्व की शुरुआत करते हैं। यह पर्व आदिवासी समुदाय में काफी महत्व रखता है और ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसमें सखुआ के फूल का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर सीबू टुडू, कमल मुर्मू, नवीन हसदा, अंशु टुडू, नवीन सोरेन, जैसन सोरेन, सबीना मुर्मू, रेनू मरांडी, पूनम हेंब्रम, अजय हेंब्रम, रोजत मरांडी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। पर्व को लेकर विगत एक माह से तैयारियां की जा रही थीं और छात्र-छात्राएं इसे मनाने के लिए काफी उत्साहित थे।


