Ali Akbar Connection to Lawrence Bishnoi Gang: हरियाणा के अंबाला में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे गए विस्फोटक (RDX) के साथ पकड़े गए आतंकियों के तार अब राजस्थान के अजमेर से गहराई से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस साजिश के मुख्य आरोपियों में से एक, अली अकबर उर्फ बाबू, जो अजमेर में ऑटो चलाता था, उसे लेकर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
जांच में सामने आया है कि अली अकबर कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि वह चार साल पहले ही पुलिस के रडार पर आ चुका था। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि 13 अगस्त 2022 को अजमेर के पीसांगन थाना क्षेत्र में अली अकबर के खिलाफ पहली बार गंभीर शिकायत दर्ज हुई थी। बुधवाड़ा निवासी इकबाल अहमद ने आरोप लगाया था कि अली अकबर ने एक गेस्ट हाउस विवाद को लेकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।

क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य था अबकर?
हैरानी की बात यह है कि उस वक्त अली अकबर ने खुद को कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताया था। उसने पीड़ित को डराने के लिए गैंग का नाम इस्तेमाल किया, ताकि गेस्ट हाउस का कब्जा उसके परिवार के पास ही रहे।
विवाद महज छह महीने के बकाया किराए को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन अली ने इसे अंडरवर्ल्ड स्टाइल में धमकाकर सुलझाने की कोशिश की थी। तब पुलिस ने उसे शांतिभंग की धारा में गिरफ्तार कर पाबंद किया था।

ऑटो चालक से आतंकी साजिश तक का सफर
अजमेर के दिल्ली गेट स्थित लोगिया मोहल्ला का रहने वाला अली अकबर साधारण जीवन जीता था। वह शहर की गलियों में ऑटो चलाकर अपना गुजारा करता था। उसके पिता मोहम्मद रमजान राजस्थान रोडवेज से रिटायर्ड कंडक्टर हैं और उसका भाई गेस्ट हाउस में काम करता है। शादीशुदा अली के दो बच्चे भी हैं।
एक साधारण ऑटो चालक का सीधे पाकिस्तानी हैंडलर्स और ड्रोन के जरिए भेजे गए RDX तक पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस ‘मिसिंग लिंक’ को तलाश रही हैं कि आखिर एक मामूली अपराधी आतंकी नेटवर्क के संपर्क में कैसे आया।

हनुमानगढ़ को दहलाने की थी साजिश
अंबाला में हुई गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में पता चला है कि अली अकबर और उसके साथियों का निशाना राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला था। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए जो विस्फोटक सीमा पार भेजे गए थे, उनका इस्तेमाल हनुमानगढ़ में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था।
मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं…
- क्या अली अकबर केवल एक कुरियर (विस्फोटक पहुंचाने वाला) था या वह स्लीपर सेल का हिस्सा है?
- लॉरेंस गैंग का नाम लेने के पीछे क्या वाकई गैंग से जुड़ाव था या सिर्फ दहशत फैलाने का पैंतरा?
- अजमेर में उसके स्थानीय मददगार कौन हैं, जिन्होंने उसे सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने में मदद की?

सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर ‘स्लीपर सेल’
अली अकबर की गिरफ्तारी के बाद अजमेर और पीसांगन इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। एनआईए (NIA) और अन्य खुफिया एजेंसियां अब अली के मोबाइल डेटा और पिछले 4 सालों के संपर्क इतिहास को खंगाल रही हैं।
अंदेशा जताया जा रहा है कि कट्टरपंथ के रास्ते वह किसी बड़े विदेशी नेटवर्क का हिस्सा बन चुका था। फिलहाल, अली अकबर पुलिस की गिरफ्त में है और उससे यह उगलवाने की कोशिश की जा रही है कि राजस्थान में और कहां-कहां विस्फोटक पहुंचाने की योजना थी।


