गोपालगंज के DM पवन कुमार सिन्हा ने एक स्कूल के उद्घाटन समारोह के दौरान अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी अनपढ़ मां के समर्पण और सहयोग ने उन्हें एक संघर्षरत छात्र से जिला कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंचाया।
बिहार के गोपालगंज जिले के डीएम पवन कुमार सिन्हा ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी जिंदगी से जुड़ा ऐसा भावुक किस्सा सुनाया, जिसने वहां मौजूद अभिभावकों और छात्रों को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक अनपढ़ मां के सहयोग और त्याग ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया। डीएम ने कहा कि किसी भी बच्चे की सफलता में उसके माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है। अगर अभिभावक बच्चों के साथ खड़े रहें और उन्हें सही माहौल दें, तो कोई भी बच्चा बड़ा अधिकारी बन सकता है। यह बात जिलाधिकारी ने मीरगंज थाना क्षेत्र के भैरोपट्टी स्थित जेनेसिस पब्लिक स्कूल के नए भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान कही।
मैं अपने भाइयों में सबसे कमजोर था
डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि वे बचपन में अपने तीनों भाइयों और बहनों में पढ़ाई के मामले में सबसे कमजोर छात्र माने जाते थे। उनके पिता डीआईजी (DIG) जैसे प्रतिष्ठित पद पर थे, लेकिन उनकी सफलता के पीछे असली इंजन उनकी मां थीं। जिलाधिकारी ने भावुक होकर कहा, ‘मेरी माता जी पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन उनका कंट्रीब्यूशन (योगदान) यह था कि जब तक मैं पढ़ता था, वे मेरे बगल में बैठी रहती थीं। मैं रात के 2-3 बजे तक पढ़ता था और वे जागकर स्वेटर बुनती रहती थीं।’
अनपढ़ मां की उपस्थिति का जादू
डीएम ने बताया कि उनकी मां को यह समझ नहीं आता था कि उनका बेटा किताब में क्या पढ़ रहा है, लेकिन उनका पास होना ही उनके लिए अनुशासन का सबसे बड़ा पाठ था। डीएम बोले, ‘उन्हें बुझता (समझ आता) नहीं था कि बच्चा क्या पढ़ रहा है, लेकिन वे मेरे चाय-पानी की व्यवस्था करती थीं और बगल में बैठी रहती थीं। अकेले बैठकर पढ़ने में बच्चों का मन भटक सकता है, लेकिन आपकी (माता-पिता की) उपस्थिति मात्र से बच्चे के मन में एकाग्रता का भाव जागता है।”
अभिभावकों के लिए डीएम का मंत्र
कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों अभिभावकों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण प्रण लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन बच्चों की शिक्षा का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। डीएम ने अभिभावकों से वचन मांगा कि वे बच्चों को मोबाइल फोन नहीं देंगे।
उन्होंने कहा, ‘मैं सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूं कि जब तक बच्चे पढ़ाई कर रहे हों, उन्हें मोबाइल फोन न दें। माता-पिता में से कम से कम एक व्यक्ति बच्चे के पास बैठा रहे। इससे बच्चे का मन पढ़ाई में लगा रहेगा।’ उन्होंने कहा कि जब बच्चे अकेले पढ़ते हैं तो उनका ध्यान आसानी से भटक सकता है और वे मोबाइल या अन्य चीजों में उलझ सकते हैं। लेकिन अगर माता-पिता पास बैठे हों तो बच्चों में अनुशासन और एकाग्रता बनी रहती है।
IAS बनने की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सच
डीएम सिन्हा ने बताया कि भारत में हर साल हजारों छात्र स्नातक के बाद आईएएस (IAS) बनने का सपना देखते हैं। लगभग 40 हजार अभ्यर्थी इस दिशा में गंभीर प्रयास करते हैं, लेकिन सफलता केवल 700 के करीब ही मिल पाती है। उन्होंने जोर दिया कि सफलता के लिए बुद्धि से ज्यादा अनुशासन आवश्यक है और यह संस्कार परिवार और विद्यालय के साझा प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि कमजोर छात्रा भी अगर अनुशासन के साथ पढ़ाई करे तो वो भी सफलता हासिल कर सकते हैं।
उद्घाटन समारोह में दिग्गजों का जमावड़ा
रविवार को स्कूल को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस नया भव्य भवन और विस्तृत परिसर मिला। इसका उद्घाटन जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा, सारण के एमएलसी सच्चिदानंद राय, एमएलसी वीरेंद्र नारायण यादव और अफाक आलम ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और शैक्षणिक प्रदर्शनी भी प्रस्तुत की गई, जिसमें बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

इस दौरान सारण एमएलसी सच्चिदानंद राय ने कहा कि बच्चों की शिक्षा में माताओं का योगदान सबसे बड़ा होता है। एमएलसी वीरेंद्र नारायण यादव ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में शिक्षा का प्रसार ही देश को सशक्त बनाएगा।
विद्यालय के प्रबंधक ऋषभ पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया और बताया कि नए परिसर में छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी। इस दौरान छात्रों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम और शैक्षणिक प्रदर्शनी के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया।


